सियासत का अवसर और सियासी चालें

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि उमेश शर्मा देर सवेर भाजपा छोड़ कांग्रेस में आएंगे। भाजपा के नेता फिर से उन्हें नहीं बरगला सकते हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम से उमेश शर्मा काऊ की विश्वसनीयता पर जरूर धब्बा लग गया है। सूबे में अब तक काऊ की छवि गंभीर किस्म के राजनेता की थी।

Rjapaat, jansatta opinion
देहरादून के रायपुर से भाजपा विधायक उमेश शर्मा और हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर।

छलनी हुई छवि

देहरादून के रायपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के कांग्रेस गोत्र के विधायक उमेश शर्मा काऊ यशपाल आर्य और उनके बेटे संजीव शर्मा के साथ भाजपा छोड़ कांग्रेस में जाने वाले थे। वह आर्य के साथ राहुल गांधी के दिल्ली स्थित घर पर पहुंचे थे। परंतु राहुल गांधी से आधा घंटा मुलाकात में देरी होने के बीच भाजपा के नेता अनिल बलूनी ने उनसे टेलीफोन पर संपर्क साधा और उन्हें मंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया जिस पर उमेश शर्मा ने भाजपा छोड़ कांग्रेस में जाने का विचार छोड़ दिया और राहुल गांधी के आवास पर मौजूद कांग्रेस नेताओं से लघु शंका जाने का बहाना बनाया और राहुल गांधी के घर से गायब हो गए। वहां मौजूद कांग्रेस के प्रदेश नेता उमेश शर्मा की चाल को नहीं समझ सके और हाथ मलते रह गए।

उमेश शर्मा विजय बहुगुणा के खास हैं। वे बहुगुणा को बिना बताए भाजपा में जा रहे थे जब बहुगुणा से भाजपा नेताओं ने संपर्क साधा तो उन्होंने उमेश शर्मा को मंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा जिसे भाजपा हाईकमान ने मंजूर कर लिया और इस तरह उमेश शर्मा की कांग्रेस में फिर से वापसी रुकी। पिछले दिनों उनकी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री धनसिंह रावत से अनबन चल रही थी जिससे वे भाजपा से नाराज थे और पिछले दिनों तभी उन्होंने नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह से संपर्क साधा था और कांग्रेस में फिर से वापस आने की इच्छा जताई थी। तभी वे इन नेताओं के साथ राहुल के घर पहुंचे थे।

कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि उमेश शर्मा देर सवेर भाजपा छोड़ कांग्रेस में आएंगे। भाजपा के नेता फिर से उन्हें नहीं बरगला सकते हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम से उमेश शर्मा काऊ की विश्वसनीयता पर जरूर धब्बा लग गया है। सूबे में अब तक काऊ की छवि गंभीर किस्म के राजनेता की थी।

गाड़ी सरकारी

बिजली महकमे में एक दिलचस्प अधिकारी को अहम ओहदे पर बिठाया गया है। बताते हैं कि नौकरशाह हो मंत्री या कोई और नेता, इन साहब के पास इन्हें आईने में उतारने का नुस्खा है। बात कुछ पुरानी है। प्रदेश की मुख्य सचिव की कुर्सी पर अचानक राम सुभग सिंह की ताजपोशी हो गई। इन साहब को पता नहीं कहां से पता चला कि नए मुख्य सचिव को फूलों से प्यार है। बस फिर क्या था, बिजली महकमे की गाड़ी मशोबरा को घुमा दी। लेकिन वहां अच्छे गमले नहीं। फिर पता चला कि किंगल के पास कहीं अच्छे गमले हैं।

साहब ने गाड़ी वहां पहुंचा दी और तीस गमले वाहन में डाल कर शिमला पहुंच गए। शिमला पहुंचने पर इन गमलों को मुख्य सचिव की नजर पेश कर दिया गया। अब पता नहीं मुख्य सचिव को गमले और लगे फूल पसंद आए या नहीं। अब पता चला है कि यह साहब इन दिनों किसी बड़े अधिकारी के घर रोजाना सुबह शाम हाजिरी भर रहें है। जाहिर है सरकारी गाड़ी तो है ही।

जयकारे का जलवा

हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक तौर पर अहम सबसे बड़े कांगड़ा जिले के फतेहपुर हलके में चल रहे उपचुनावी मुकाबले में भाजपा और कांग्रेस के अंदर सिर्फ ‘जय भवानी’ का ही जलवा है। दरअसल कांग्रेस की दंगल में उतरे प्रत्याशी का नाम भवानी सिंह पठानिया है और भाजपा की ओर से हलके में पार्टी के सह प्रभारी वन महकमे के वजीर राकेश पठानिया के सियासी वारिस बेटे का नाम भी भवानी सिंह पठानिया ही है। मंत्री पुत्र भवानी चंद अब वाणी नाम की कन्या के साथ परिणय सूत्र में बंधने जा रहे हैं।

लिहाजा राजपूत समुदाय में किसी को अदबी से पेश आने के लिए पहले से प्रचलित ‘जयदेवा’ कहने की बजाय अब ठाकुर ही नही बल्कि पार्टी के दूसरे भाई लोग भी कांग्रेस उम्मीदवार का नाम जानते-बूझते भी ‘जी हूजूरी’ के जरिए वन मंत्री को खुश करने के लिए ‘जय भवानी’ का ही जयकारा ठोक रहे हैं। कांग्रेस की बांछें खिल उठी हैं कि मंत्री पुत्र के बहाने ही सही भाजपाइयों की जुबान से कांग्रेस के भवानी का नाम तो निकल रहा है। बहरहाल लोग जय भवानी का जो मर्जी अर्थ निकाल लें। असल निचोड़Þ तो चुनावी नतीजे से सामने आएगा।

जब दिल ही टूट गया

हिमाचल के उपचुनावों में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का बहुत कुछ दांव पर लगा है। जयराम ठाकुर ने चार साल तक प्रदेश में किस तरह से सरकार चलाई जनता को इस बाबत फैसला देना है। जयराम ठाकुर का इतना सब कुछ दांव पर लगा है लेकिन नामाकंन भरने के बाद भाजपा के दो जिम्मेदार नेता अचानक गुम हो गए हैं। अर्की में बागी हो रहे गोबिंद राम शर्मा को तो अनुराग ठाकुर ने नामांकन न भरने के लिए मना लिया। ये दो नेता यहां भी नजर नहीं आए।

ये दो नेता हैं प्रदेश भाजपा के प्रभारी अविनाश राय खन्ना व सह प्रभारी संजय टंडन। कुछ अरसा पहले यह अति सक्रिय हो गए थे। इन दोनों ने आलाकमान को कई रपटें भी भेजीं थीं। लेकिन आलाकमान ने इनकी सुनी नहीं थी। तब से ये दोनों मायूस थे। ये दोनों टिकट आबंटन के मसले पर दिल्ली गए थे। तब से लेकर नामांकन वापसी के दिन तक यह हिमाचल ही नहीं लौटे। अब पता चल रहा है कि खन्ना तो एक दो दिन में शायद लौट भी आएं। लेकिन संजय टंडन कब आएंगे इसकी खबर किसी को नहीं है। प्रचार में बस मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और सुरेश कश्यप के ही नाम छाए हुए हैं।
(संकलन : मृणाल वल्लरी)

पढें राजपाट समाचार (Rajpat News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट