सूबेदारों में टकराव, श्रेय लेने की मची होड़

वसुंधरा अपने बेटे दुष्यंत को केंद्र में मंत्री नहीं बनाए जाने से भी नाराज बताई जाती हैं। ऊपर से आलाकमान ने उनकी सहमति के बिना सतीश पुनिया को पार्टी का सूबेदार बनाया तो वसुंधरा बिफर गई।

Rajpaat, jansatta special story
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर और राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया।

खट्टर-अमरिंदर
पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले किसानों को सुविधाएं देने के मुद्दे पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर आमने-सामने हो गए हैं। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री किसान आंदोलन के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने के साथ किसानों को सुविधाएं देने के मुद्दे पर श्रेय लेने की होड़ में जुटे हैं। खट्टर ने हरियाणा की सीमा में चल रहे किसान आंदोलन के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया। खट्टर ने इसके बाद अपने कार्यकाल के दौरान किसान हित में लिए फैसलों के बारे में रिपोर्ट जारी कर दी।

खट्टर द्वारा अपने साढ़े सात साल के कार्यकाल के दौरान जब किसान हित में लिए गए फैसलों के बारे में बताया गया तो अमरिंदर ने भी पलटवार करते हुए अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए किसान हितैषी फैसलों के साथ-साथ हरियाणा को किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर घेर लिया। पंजाब सरकार अब तक पांच लाख 64 हजार किसानों का कर्ज माफ कर चुकी है। हरियाणा सरकार किसानों का कर्ज माफ करने से पीछे हट चुकी है। अब पंजाब सरकार हरियाणा को किसान कर्ज माफी के मुद्दे पर घेर रही है।

बदली फिजा
उत्तराखंड की विधानसभा के मानसून सत्र में इस बार नजारा बदला हुआ था। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बैठे हुए थे और नेता प्रतिपक्ष की सीट पर कांग्रेस की नेता रहीं दिवंगत इंदिरा हृदयेश की जगह प्रीतम सिंह बैठे हुए थे। सिंह अब तक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। इंदिरा हृदयेश की मौत के बाद उन्हें कांग्रेस विधानमंडल दल का नेता बना दिया गया इसीलिए इस बार प्रीतम सिंह सिंह पूरे जोश खरोश में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे थे। त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटाकर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को बनाया गया था जिन्होंने विधानसभा का मुंह नहीं देखा।

धामी ने मुख्यमंत्री की शपथ लेने के डेढ़ महीने बाद ही विधानसभा का मानसून सत्र बुला लिया और पूरे सत्र में मौजूद रहे। धरने पर बैठे विपक्ष के विधायकों को उन्होंने बड़ी विनम्रता से उठाकर उनकी मांगों पर गौर किया। उन्होंने विपक्ष के साथ टकराव के बजाए संवाद की नीति रखी। इसलिए इस बार विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव ना के बराबर देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों की इस भूमिका पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सरकार और विपक्ष दोनों की पीठ थपथपाई।

बोलवीर के तीर
जयराम सरकार के मंत्री बेतुके बोल बोलते रहते हैं। प्रदेश में नए जिलों का शिगूफा एक बार फिर छेड़ दिया गया है। वन मंत्री राकेश पठानिया कांगड़ा में नए जिला बनाने की मांग करने लगे हैं। उनका विधानसभा हलका नूरपूर है। वे चाहते हैं कि 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले नूरपूर को जिला बना दिया जाए  ताकि वह वहां नायक बनकर उभर सकें। पठानिया ने इस तरह की मांग उठाकर मुख्यमंत्री को मुश्किल में डाल दिया है। उधर जयराम सरकार में सबसे ताकतवर मंत्री है महेंद्र सिंह। उन्होंने भी तीन चार दिन पहले बोल दिया कि बागवानों को बोरी में ले जाकर सेब सड़क किनारे बेचना चाहिए। अब उनकी लगातार किरकरी हो रही है।

किसान संगठनों व कांग्रेस ने उनकी फजीहत करने का अभियान छेड़ दिया। इन सबका कहना है कि महेंद्र सिंह को सेब कारोबार के बारे में कुछ पता नहीं है। इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके शहरी विकास मंत्री भी पिछले दिनों पराला मंडी में कह आए कि सेब के दाम मांग व आपूर्ति के हिसाब से बढ़ते-घटते हैं। इस पर उन्हें भी घेर लिया कि संकट की इस घड़ी में मंत्री जो सेब उत्पादक पट्टी से आते वे आढ़तियों के पक्ष की बात कर रहे हैं। इन सब मंत्रियों  की इन तमाम बातों का खमियाजा बेशक भुगतना मुख्यमंत्री को पड़े। लेकिन मंत्री हैं कि उन्हें इस बाबत कोई चिंता ही नहीं है। उनके बेतुके बोल जारी हैं।

राजे का राजस्थानराजे का राजस्थान
राजस्थान भाजपा में वसुंधरा राजे के समर्थकों और भाजपा आलाकमान के बीच शीत युद्ध चल रहा है। सूबे की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी और फिलहाल पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे के समर्थक उन्हें मुख्यधारा में रखने के लिए कुछ न कुछ करते रहते हैं। वसुंधरा अपने बेटे दुष्यंत को केंद्र में मंत्री नहीं बनाए जाने से भी नाराज बताई जाती हैं। ऊपर से आलाकमान ने उनकी सहमति के बिना सतीश पुनिया को पार्टी का सूबेदार बनाया तो वसुंधरा बिफर गई।

आलाकमान उन्हें 2023 के चुनाव में सूबे के अगले मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं करना चाहता। उधर वसुंधरा इससे कम पर कतई राजी नहीं। रस्साकसी इसलिए जारी है। पिछले सोमवार को वसुंधरा समर्थकों ने जयपुर में ‘टीम वसुंधरा राजे राजस्थान’ का दफ्तर भी खोल दिया। एक तरह से उनके समर्थक समानांतर संगठन खड़ा कर रहे हैं।

हालांकि उद्घाटन के मौके पर खुद वसुंधरा नहीं थीं। उनके समर्थक अशोक शर्मा ने बताया कि वे दिल्ली में थीं। शर्मा के मुताबिक इस मंच की सभी 33 जिलों में शाखाएं खुल गई हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने इसके राजनीति से सरोकार न होने की सफाई भी दी। फरमाया कि इस टीम को फैंस क्लब मान सकते हैं। जिससे वसुंधरा के पांच लाख वफादार समर्थक जुड़े हैं।
(संकलन : मृणाल वल्लरी)

पढें राजपाट समाचार (Rajpat News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट
X