उपचुनावी गणित का नफा-नुकसान

आलाकमान को अब पता चल रहा है कि जिन लोगों को ठिकाने लगाने का इंतजाम किया गया था उन्होंने ही भाजपा को ठिकाने लगा दिया और 2022 में भी भाजपा को प्रदेश में कुछ मिलेगा इसकी उम्मीद कम ही है।

Rajpaat, Jansatta Opinion
जयराम सिंह ठाकुर और प्रतिभा सिंह।

हार पर भी वार
हिमाचल प्रदेश के तीन विधानसभा और एक संसदीय हलके के उपचुनाव के नतीजे आने के बाद प्रदेश कांग्रेस में जश्न का माहौल है। आखिर जश्न हो भी क्यों न कांग्रेस के खेमे में। 2014 के बाद पहली बार किसी चुनाव में ऐसी जीत मिली है कि प्रदेश कांग्रेस का नाम देश भर में लिया जाने लगा। सत्ता में भाजपा की सरकार होने के बाद इतनी बड़ी जीत हासिल की गई है, ऐसे में कांग्रेस का गदगद होना तो बनता ही है। लेकिन इन चारों सीटों को कांग्रेस की ओर से जीत जाने का जश्न कुछ भाजपाई भी मना रहे हों तो थोड़ा अचरज जरूर होता है। यह सच है कि प्रदेश के कई बड़े भाजपाई भाजपा की हार से बेहद प्रसन्न हैं। अब वे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और उनकी मित्रमंडली की एक-एक खामियां निकालने में लगे हुए हैं। आलाकमान भी इस हार से हतप्रभ हैं कि आखिर इतना बड़ा जनाधार खिसक कैसे गया।

आलाकमान को अब पता चल रहा है कि जिन लोगों को ठिकाने लगाने का इंतजाम किया गया था उन्होंने ही भाजपा को ठिकाने लगा दिया और 2022 में भी भाजपा को प्रदेश में कुछ मिलेगा इसकी उम्मीद कम ही है। अपनों को ठिकाने लगाने की ये चोट 2024 तक भाजपा को सालती रहेगी। लेकिन अब न तो केंद्रीय स्तर पर और न ही राज्य स्तर पर भाजपा के पास ऐसा कोई मरहम बचा है कि वह इस चोट के जख्म को भर सके।

भाजपा को इस तरह फंसा देखकर भाजपा के ये नेता जश्न के सुरूर में तो हैं ही साथ ही जयराम व उनकी मित्रमंडली को ठिकाने लगाने पर भी आ गई है। भाजपा में अब जो घमासान होने वाला है वह बेहद दिलचस्प रहने वाला है। एक जीत व एक हार जीवन में, कम से कम राजनीतिक जीवन में तो बहुत कुछ बदल ही देते हैं। भाजपाई अब बोल रहे कि बस अब थोड़ा इंतजार और फिर देखना अंजाम।

भक्ति की शक्ति
उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाला चुनाव अन्य दलों के साथ आम आदमी पार्टी के लिए भी अहमियत रखता है। अभी तक उसका वर्चस्व दिल्ली में ही है। राजनीतिक विस्तार के लिए उत्तर प्रदेश के मैदान से बेहतर कुछ हो भी नहीं सकता है। वहां के आगामी चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने अपना सियासी कार्ड खेल दिया है। इससे पहले दिल्ली से मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना की शुरुआत करके आम आदमी पार्टी ने सबसे पहले अपना एक धार्मिक चेहरा जनता के सामने रखा था। इस यात्रा के जरिए दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के दूर-दराज के राज्यों में आम जनता को तीर्थ यात्रा करवाई जा रही है।

इससे न केवल एक खास वर्ग को आम आदमी पार्टी ने अपनी तरफ जोड़ा है बल्कि श्रवण कुमार के पोस्टर के जरिये सब को धार्मिक यात्रा कराने वाली पार्टी के तौर पर खुद को तैयार किया है। आने वाले साल में उत्तर प्रदेश के चुनाव हैं और इन चुनाव से पहले ही उपचुनाव को प्रदेश में लड़ने के लिए जमीन तैयार कर रही पार्टियां काफी अहम मान रही हैं। इससे कांग्रेस को फिर से वापसी की उम्मीद जागी है और बीते चुनाव में पिछड़ चुके दल भी अब सक्रियता दिखा रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने अपने एजंडे में राम मंदिर के दर्शन को जोड़ दिया है।

राम मंदिर और अयोध्या पर तो भाजपा का एकाधिकार सा है। लेकिन, अरविंद केजरीवाल जो दिल्ली में चुनाव जीतने के बाद भगवान हनुमान के प्रति भक्ति दिखा चुके हैं वहां भी अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में ही अपने मंत्रियों के साथ राम मंदिर के सजे बड़े मंच के साथ पूजन कर अपनी तरफ से यह संदेश देने की कोशिश की है कि भगवान राम या राम मंदिर किसी एक पार्टी का प्रयास या आस्था का सवाल नहीं है।

इसके पहले भी हर धार्मिक अवसर पर आम आदमी पार्टी की सरकार विज्ञापनों पर खर्च में जरा भी परहेज नहीं करती है। आम आदमी पार्टी के इस ताजा राजनीतिक कार्ड ने उत्तर प्रदेश में अभी से सियासी पारे को गर्म कर दिया है। देशभक्ति के बाद अब भक्ति के मामले में भी अरविंद केजरीवाल भाजपा को टक्कर दे रहे हैं।

प्रतिभा सिंह का घर
मंडी संसदीय हलके से सांसद का चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की उम्मीदवार प्रतिभा सिंह को लेकर मंडी में सवाल उठने लगे कि वह मंडी कब आएंगी। उनका एक महल रामपुर में है और दूसरा घर शिमला हालीलाज में। ऐसे में अगर मंडी के लोगों को अपने सांसद से कहीं मिलना-जुलना हो तो कहां मिला जाएगा इस पर चर्चा शुरू हो गई। इस बाबत मंडी के कुछ कांग्रेसियों ने शिगूफा छोड़ दिया कि प्रतिभा सिंह मंडी में अपना घर बनाएंगी। अब यह घर बनता है या नहीं यह तो देखने वाली बात है, लेकिन शिगूफा तो छोड़ ही दिया गया है।

प्रतिभा सिंह पहले भी मंडी से सांसद रह चुकी हैं। तब भी वह कहां मंडी में रहती थीं। सांसद निधि से जो धन देना होता था वह कांग्रेसियों की मांग के अनुरूप दे देती थीं। तब सब कामकाज उनके पति व पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह खुद देखते थे। प्रतिभा सिंह की तो सांसद निधि भी पूरी खर्च नहीं होती थी। लेकिन अब माहौल व हालात बदल गए है। अब उन्हें सब कुछ खुद ही करना पड़ेगा। अन्यथा राजनीति से कब लोग बेदखल कर दें पता ही नहीं चलेगा। ऐसे में मंडी में प्रतिभा सिंह का घर बन जाए तो उसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए। प्रतिभा सिंह पर लोगों ने भरोसा किया है तो उन्हें इसकी जिम्मेदारी का अहसास होगा ही।
(संकलन : मृणाल वल्लरी)

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