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सत्ता में टकराव और कोरोना के दौर में सियासत

उत्तराखंड में कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण चार धाम यात्रा स्थगित करने को लेकर मुख्यमंत्री ने जो एकतरफा फैसला लिया उससे राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज बुरी तरह खफा हैं। दोनों के बीच टकराव साफ दिख रहा है।

jansatta Rajpaatउत्तराखंड के सीएम तीरथ सिंह रावत और ओड़ीशा के सीएम नवीन पटनायक। (फोटो- जनसत्ता)

अब चार धाम यात्रा पर तकरार
हरिद्वार में कुंभ कराकर उत्तराखंड सरकार ने जैसे आफत मोल ले ली है। उत्तराखंड में जिस तरह से कुंभ के दो शाही स्नान के बाद कोरोना तेजी से फैला उससे राज्य सरकार कठघरे में खड़ी हुई नजर आई। कुंभ स्थल में कोरोना के कायदों की धज्जियां उड़ने की वैश्विक स्तर पर आलोचना हुई।

उधर अब राज्य में जिस तरह से कोरोना फैल रहा है उसे देखते हुए नैनीताल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को एक दिन में पचास हजार कोरोना जांच करने के निर्देश दिए। लेकिन राज्य सरकार के पास संसाधनों का अभाव है। कुंभ में भी नैनीताल हाई कोर्ट ने एक दिन में पचास हजार कोरोना की जांच करने के निर्देश दिए थे। परंतु पूरे संसाधन झोंकने के बाद भी राज्य सरकार कुंभ क्षेत्र में एक दिन में पंद्रह से बीस हजार ही जांच करवा पाई थी, जिससे राज्य सरकार की खासी फजीहत हुई थी। कुंभ में सभी के लिए कुंभ नगरी हरिद्वार में आने के दरवाजे खोलने की मुख्यमंत्री की घोषणा उन्हें महंगी पड़ी और बाद में प्रधानमंत्री को कुंभ के शाही स्नान को लेकर दखल देना पड़ा और उन्हें प्रतीकात्मक स्नान की साधु संतों से अपील तक करनी पड़ी।

वहीं राज्य में कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण चार धाम यात्रा स्थगित करने को लेकर मुख्यमंत्री ने जो एकतरफा फैसला लिया उससे राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज बुरी तरह खफा हैं। उन्हें मुख्यमंत्री के इस फैसले की जानकारी पत्रकारों से मिली। सतपाल महाराज ने चार धाम यात्रा की समीक्षा के लिए देहरादून में पर्यटन विकास परिषद की बैठक आहूत की थी। लेकिन जब मुख्यमंत्री ने चार धाम यात्रा स्थगित करने का ऐलान किया तो सतपाल महाराज ने गुस्से में आकर यह बैठक स्थगित कर दी। इससे तो लग रहा कि राज्य सरकार के मुखिया तीरथ सिंह रावत और मंत्री सतपाल महाराज में पटरी नहीं बैठती है। सरकार के मंत्रियों और मुख्यमंत्री के बीच कई मामलों को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं। वन मंत्री हरक सिंह रावत ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से पूछे बिना वन विभाग के दर्जनों अधिकारियों के तबादले कर दिए।

चुनाव प्रचार नहीं समाज सेवा कहिए
कोरोना की दूसरी लहर से जनता हलकान है तो नेता भी कम परेशान नहीं हैं। इन सबके बीच सबसे बड़ा सच है चुनाव। इस कारण नेताओं में राजनीति का तो पता नहीं पर समाज सेवा का गजब का जज्बा जरूर नजर आ रहा है। हिमाचल में आने वाले दिनों में दो उप चुनाव हैं। एक है कांगड़ा में फतेहपुर विधानसभा का और दूसरा मंडी संसदीय हलके का। इसके बाद दिसंबर 2022 में विधानसभा के चुनाव हैं।

उधर, कोरोना है कि जाने का नाम ही नहीं ले रहा है। पाबंदियां लग गई हैं। ऐसे में नेताओं के पास लोगों तक पहुंचने का कोई जरिया ही नहीं रह गया। लेकिन लोगों का दिल भी तो जीतना है। हालात को देखते हुए हिमाचल में भाजपा और कांग्रेस दोनों दल लोगों की मदद करने के लिए तत्परता दिखा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने गांधी हेल्पलाइन चालू कर दी है। इसे देश भर में किया गया तो हिमाचल में भी कर दिया है। दो सेवानिवृत्त डाक्टरों को जिम्मा भी दे दिया गया। कांगड़ा में कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री हैं सुधीर शर्मा। उन्होंने पहले ही मोर्चा मार लिया। उन्होंने अपने आलीशान भवन को कोरोना मरीजों के लिए देने का एलान कर दिया।

जयराम सरकार में मंत्री हैं राकेश पठानिया। वह भी पीछे कैसे रहते। उन्होंने भी आनन-फानन में एलान कर दिया कि उनका नर्सिंग संस्थान कोरोना मरीजों के लिए इस्तेमाल हो सकता है। इसके लिए उपायुक्त को चिट्ठी भी लिख दी। यही नहीं पिछले तीन सालों से भाजपा में हाशिए पर धकेले गए पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल भी इन दिनों सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने सुजानपुर भाजपा मंडल को सक्रिय कर दिया है। उन्होंने एलान कर दिया कि अगर सुजानपुर में किसी परिवार में संक्रमित मरीज की मौत हो जाती है और पूरा परिवार संक्रमित हो जाता है तो भाजपा कार्यकर्ता मृतक का अंतिम संस्कार करेगा। यह मदद भी एक त्रासदी ही है। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर में अब राजनीतिक दल अपनी जिम्मेदारी को लेकर थोड़े सजग दिख रहे और लोगों को मदद पहुंचा रहे।

पटनायक बने नायक
कोरोना वायरस की दूसरी लहर से सामना करने के लिए जिस तरह से ओड़ीशा की नवीन पटनायक सरकार ने काम किया है उसे कई मंचों पर सराहा जा रहा है। राष्ट्रीय पटल पर भाजपा के एकक्षत्र जैसे नेतृत्व के बीच नवीन पटनायक वैसे क्षेत्रीय क्षत्रप हैं जो जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्र के साथ ईमानदारी से कदमताल की कोशिश करते हैं। जब महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश तेलंगाना जैसे राज्य ऑक्सीजन की कमी से पस्त हो गए तो पटनायक ने केंद्र से बात की और उन राज्यों को ऑक्सीजन भिजवाया जहां इसकी कमी की वजह से तबाही मची हुई थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने संकट के इस समय में एक देश के रूप में खड़े होने और मदद करने के लिए पटनायक का आभार जताया। कोरोनारोधी टीके को 18 से 44 साल तक के लोगों को लगाने पर इसकी अलग-अलग कीमतों को लेकर विवाद शुरू हुआ तो पटनायक ने एलान किया कि राज्य के सभी लोगों को मुफ्त टीका लगाया जाएगा।
(संकलन : मृणाल वल्लरी)

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