सियासत और सियासतदां

अटकलें हैं कि क्या लालू के पटना लौटने पर कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। उनकी जमानत के बीच दो राजनीतिक घटनाएं घटीं।

Raajpat, jansatta special storyबिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया।

गुणा-भाग तेज
राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव को जमानत मिल चुकी है। दिल्ली एम्स में इलाज करा रहे लालू यादव अभी बेलबॉन्ड भरने के बाद पटना नहीं पहुंचे हैं। दिल्ली में ही अपनी बेटी मीसा भारती के घर पर रह रहे हैं। लेकिन उनको लेकर बिहार में सियासी सरगर्मी खूब दिख रही है। अटकलें हैं कि क्या लालू के पटना लौटने पर कोई बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। उनकी जमानत के बीच दो राजनीतिक घटनाएं घटीं। राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने अपने फेसबुक खाते पर अपनी एक फोटो डाल दी, जिसमें वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ दिख रहे हैं।

दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) ने लालू को जमानत मिलने पर खुशी जताई है। मांझी की पार्टी नीतीश के नेतृत्व वाले बिहार राजग गठबंधन में है। लेकिन पिछले महीने विधान परिषद के लिए 12 सदस्यों के मनोनयन के बाद से नाराज है। भाजपा और जद (एकी) के छह-छह सदस्य मनोनीत किए गए। मांझी अपनी पार्टी के लिए कम से कम एक सीट चाहते थे। दूसरी ओर, तिवारी ने अपने फेसबुक पेज पर जो फोटो डाली उसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, कांग्रेस नेता रामजतन सिन्हा, पूर्व मंत्री मिथिलेश सिंह और पिछले साल ही जद (एकी) से आरजेडी में आए श्याम रजक दिख रहे हैं। रजक को राजद ने फुलवारी शरीफ से विधानसभा का टिकट नहीं दिया था। यूं तो यह फोटो चैती छठ का प्रसाद ग्रहण करने के दौरान औपचारिक मुलाकात की है, लेकिन राजनीति में इशारों का महत्व माना जाता है। इसलिए इस तस्वीर पर चर्चा का बाजार गर्म होना स्वभाविक है। ध्यान देने वाली बात यह है कि 2020 विधानसभा चुनाव में जद (एकी) 43 सीटें हासिल कर तीसरे नंबर की पार्टी रह गई थी।

हालांकि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी गई। मुख्यमंत्री बनने के बाद से नीतीश कुमार लगातार इस कोशिश में हैं कि उनका कुनबा मजबूत होता जाए। उन्होंने कई निर्दलीयों और चिराग पासवान की पार्टी लोकजनशक्ति पार्टी के एकमात्र विधायक को अपने साथ ले लिया। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का विलय जद (एकी) में हो ही चुका है। नीतीश के करीबी के नेता सार्वजनिक बयान देने में नहीं हिचकते कि कांग्रेस के 19 विधायकों में कई हमारे साथ जुड़ने को उत्सुक हैं। ऐसे में लालू के बिहार पहुंचने के पहले राजनीतिक गलियारे में गुणा-भाग तेज हो गया है।

साधने की जुगत
उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के सल्ट विधानसभा क्षेत्र सियासत के दो खिलाड़ियों के लिए परीक्षा का केंद्र बना हुआ है। यहां मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की राजनीतिक इज्जत दांव पर लगी है। हरीश रावत ने बड़ी जद्दोजहद के बाद अपनी पसंदीदा उम्मीदवार गंगा पंचोली को टिकट दिलवाया। गंगा पंचोली को टिकट का विरोध हरीश रावत के एक जमाने में खास रहे रणजीत सिंह रावत ने किया। रणजीत रावत अपने बेटे के लिए टिकट चाहते थे। हरीश रावत ने रणजीत रावत के बेटे को टिकट का खूब विरोध किया। इसके बाद रणजीत रावत के समर्थकों ने भाजपा के उम्मीदवार महेश जीना का समर्थन किया। महेश जीना सल्ट विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे दिवंगत सुरेंद्र जीना के भाई हैं। वे अपने भाई का चुनाव प्रबंधन देखते थे।

इस कारण उनका क्षेत्र में संपर्क बना हुआ है। सल्ट के समीकरणों के साथ ही नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की संभावित सीट को लेकर चर्चा चल निकली है। छह महीने के भीतर उनको विधानसभा चुनाव लड़ना है। सतपाल महाराज ने पौड़ी गढ़वाल जिले की अपनी विधानसभा सीट चौबट्टा खाल उनके लिए खाली करने से साफ मना कर दिया है। सतपाल महाराज से पहले इस सीट पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत कई साल तक विधायक रहे। चौबट्टा खाल विधानसभा सीट खाली होने की स्थिति में आलाकमान सतपाल महाराज को पौड़ी की लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़ाता। लेकिन अब उनके इनकार के बाद पार्टी को मुख्यमंत्री के लिए दूसरी सुरक्षित सीट तलाश करनी पड़ेगी। चर्चा तो यह भी है कि दो उपचुनावों का जोखिम उठाने की जगह सितंबर में विधानसभा भंग कर चुनाव करा दिए जाएं।

वसुंधरा की नसीहत

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजनीतिक दलों को एकजुटता की नसीहत दी है। उन्होंने कहा है कि यह समय राजनीति का नहीं, राज्य नीति पर चलने का है। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने एक बयान में कहा, यह ऐसा समय है जब हमें राजनीति नहीं, राज्य नीति पर चलना है, तो आओ साथ चलें। राजे ने कहा कि कोरोना विषाणु संक्रमण के कारण सिर्फ कोई एक राज्य नहीं, पूरा देश संकट से गुजर रहा है। डरने की नहीं, सावधानी बरतने की जरूरत है। आपसी सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।

अभी हाल में राजस्थान में भाजपा ने तीन विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव के दौरान स्टार प्रचारकों की सूची से वसुंधरा राजे का नाम गायब कर दिया। प्रचार के लिए वसुंधरा के भतीजे ज्योतिरादित्य सिंधिया को मैदान में उतारा। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस निर्णय के पीछे भाजपा कुछ बड़ी योजना बना रही है। 17 अप्रैल को उपचुनाव हो गए। लेकिन इसकी सियासी तपिश बनी हुई है। दरअसल, राजसमंद, सहाड़ा और सुहानगढ़ की सीटों पर उपचुनाव में कई निर्दलीय मैदान में दिखे, जिनके बारे में कहा गया कि वे वसुंधरा समर्थक थे। उसके बाद राजे की भूमिका सीमित कर दी गई।

Next Stories
1 कोरोना का दंश और राजनीति
2 सियासी नैतिकता और राजनेता
3 सियासी गुटबाजी और राजपाट
यह पढ़ा क्या?
X