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बयान, टोटकेबाजी और पोस्टर पर सियासी बखेड़ा

हाल ही में ग्रहण लगा था। दुनिया वालों के लिए यह खगोलीय घटना सदा से ही उत्सुकता का विषय रही है। इससे जुड़े अंधविश्वास भी रहे हैं। धीरे-धीरे लोग ग्रहण को लेकर फैले तमाम तरह के अंधविश्वासों से दूर होने लगे हैं। लेकिन राजनेता कर्मकांड और अनुष्ठानों का सार्वजनिक प्रदर्शन करने में दो कदम आगे रहते हैं।

बाबा रामदेव और हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह।

गुरु का गुबार
योग गुरु रामदेव अपने बयानों के कारण हमेशा विवादों में बने रहते हैं। इस बार एलोपैथी के डॉक्टरों के खिलाफ दिए बयान के कारण रामदेव बुरी तरह फंस गए हैं। हर कोई उनकी निंदा कर रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की राष्ट्रीय इकाई और उत्तराखंड इकाई दोनों ने रामदेव के खिलाफ डटकर मोर्चा खोल दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन उत्तराखंड की इकाई ने तो उनके खिलाफ एक हजार करोड़ रुपए का मानहानि का दावा करने के लिए कानूनन नोटिस भेज दिया। पंद्रह दिन के भीतर रामदेव से माफी मांगने या नोटिस का जवाब देने की बात कही है। वरना एसोसिएशन मानहानि का दावा करेगी और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएगी।

उधर, रामदेव के खिलाफ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को सख्त शब्दों में चिट्ठी लिखनी पड़ी। उसके बाद स्वामी रामदेव ने माफी मांग ली थी। लेकिन रामदेव के सोशल मीडिया खाते पर एलोपैथी डॉक्टरों के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की गई, जिससे मामला और गरमा गया। रामदेव के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कई आरोप लगाए जिससे उनका पक्ष मजबूत होने के बजाय कमजोर हुआ। योग गुरु की बेतुकी बातों को पढ़े-लिखे समाज ने नकारा और उनकी छवि इस घटनाक्रम से खराब हुई है। एलोपैथी के डॉक्टर सवाल कर रहे हैं कि जब 2011 में रामदेव दिल्ली के रामलीला मैदान में अपने धरने से एक महिला के कपड़े पहन कर और भागकर हरिद्वार अपने पतंजलि आश्रम आए थे और अनशन पर बैठे थे तब अनशन पर बैठने से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें जौलीग्रांट के हिमालयन एलोपैथी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। तब एलोपैथी के डॉक्टरों ने ही उनकी जान बचाई थी और इसी तरह दो साल पहले कथित फूड प्वाइजनिंग की घटना में जब उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण बेहोश हो गए थे तब उन्हें हरिद्वार के एलोपैथी हॉस्पिटल भूमा निकेतन में भर्ती कराया गया था।

वहां तबीयत सुधरने के बाद उन्हें ऋषिकेश एम्स के एलोपैथी अस्पताल में भर्ती किया गया। तब एलोपैथी के डॉक्टरों ने उनकी जान बचाई थी और आज रामदेव को एलोपैथी के डॉक्टर और चिकित्सा पद्धति बकवास लग रही है। जिस तरह से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने रामदेव की घेरेबंदी की है वे अलग-थलग पड़ते दिखाई दे रहे हैं। जब कोरोना से बड़ी संख्या में लोग मर रहे हैं तब उन्होंने ऐसी बेतुकी बहस छेड़ी दी जो इस समय माहौल को और खराब कर गया।

ग्रहण पर वहम
बीते दिनों चंद्र ग्रहण लगा था। दुनिया वालों के लिए यह खगोलीय घटना सदा से ही उत्सुकता का विषय रही है। इससे जुड़े अंधविश्वास भी रहे हैं। धीरे-धीरे लोग ग्रहण को लेकर फैले तमाम तरह के अंधविश्वासों से दूर होने लगे हैं। लेकिन राजनेता कर्मकांड और अनुष्ठानों का सार्वजनिक प्रदर्शन करने में दो कदम आगे रहते हैं। पिछले दिनों लगे चंद्र ग्रहण के दिन भी ऐसा ही हुआ। हिमाचल में प्रदेश भाजपा के एक बड़े नेता की चमकीली कार को खुफियागिरी करते लोगों ने देख लिया। इसे बाबत सत्ता केंद्र से लेकर नौकरशाहों और चापलूसों में तरह-तरह के कयास लगने लगे। भाजपा के नेताओं की नजर इन दिनों बड़े ओहदों पर है तो वे तांत्रिकों और टोटके करवाने वालों को भी आजमा रहे हैं।

ऐसे में कहा जा रहा है कि ग्रहण के दिन दोपहर को उनकी चमकीली कार हिमाचल की राजधानी में घूमी। इससे पहले पता चला कि कोई राजनीतिक घमासान होने जा रहा है। लेकिन जब शाम तक कुछ नहीं हुआ तो खुफियागिरी करने वालों ने पता लगाया कि ये चमकीला वाहन चंद्र ग्रहण के दिन कुछ कर्मकांड करने का इंतजाम कर लौट गया है। बाद में जयराम के एक मंत्री ने तो इस नेता से पूछ भी लिया कि क्या वह राजधानी में थे। जवाब में नेताजी ने ठहाका लगाया और मंत्री महोदय खामोश हो गए। उन्हें ये एहसास तो हो गया कि सत्ता के केंद्र में वे अभी बेमानी नहीं हुए है। लेकिन वे राजधानी में थे या नहीं इस बबत उन्होंने राज तक नहीं खोला। पर चमकीला वाहन बहुत कुछ कह गया।

पोस्टर पर कलह
हिमाचल कांग्रेस पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का रुतबा कायम है। इन दिनों उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। बीते दिनों कांग्रेस पार्टी ने कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए एक कार्यक्रम का आगाज अपने मुख्यालय में किया। इसमें पोस्टर, बैनर और फ्लैक्स भी खूब लगाए गए। कांग्रेस भाजपा से तूफानी प्रचार करना सीख चुकी है। ऐसे में इस कार्यक्रम का भी प्रचार खूब किया गया। लेकिन राजधानी शिमला में जो बैनर और फलैक्स लगाए गए उनमें उनकी तस्वीर ही नहीं थी। बस फिर क्या था, उनके समर्थक आग बबूला हो गए और उन्होंने बैनर व फलैक्स को फाड़ डाला। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर ने वीरभद्र सिंह के दो समर्थकों को पार्टी से निलंबित भी कर दिया। तब लगा था कि अब कांग्रेस की फजीहत होनी रुक जाएगी। लेकिन कुछ दिनों बाद वहां लगाए गए फलैक्स में कांग्रेस के पूर्व मंत्री जी एस बाली की तस्वीर पर किसी ने कालिख पोत दी। सुना है कि बाली आलाकमान से आगामी विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करवाने के जुगाड़ में हैं। कांग्रेस के भीतर चल रही इन हरकतों से भाजपाइयों के चेहरे खिले हुए है।

(संकलन : मृणाल वल्लरी)

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