चुनावी मौसम में सियासी चालें

उत्तराखंड कांग्रेस ने संगठन में फेरबदल कर चुनाव संचालन समिति की कमान हरीश रावत को सौंपी। कांग्रेस संगठन में इस परिवर्तन से भाजपा के नेताओं की चिंताएं बढ़ गई क्योंकि उत्तराखंड में इस समय सक्रिय नेताओं में हरीश रावत जैसा कद्दावर नेता न भाजपा में है न ही कांग्रेस में।

Jansatta Rajpaat
यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, और उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत।

हर-हर ब्राह्मण
उत्तर प्रदेश में इन दिनों ब्राह्मणों का महत्व अचानक बढ़ गया है। अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव इसकी वजह है। सूबे में ब्राह्मण ही संख्या के मामले में दूसरी अगड़ी जातियों से ज्यादा हैं। ब्राह्मण नेता हालांकि अपनी जाति की जनसंख्या में हिस्सेदारी 12 फीसद होने का दावा करते हैं। पर नौ-दस फीसद तो इनकी संख्या जरूर होगी। गोस्वामी, गिरि, गुसांई, महापंडित, उपाध्याय, पांचाल, बढ़ई, जोगी और पड़िया जैसी जातियां यों ओबीसी में हैं पर दावा वे भी ब्राह्मण होने का ही करती हैं। परंपरागत रूप से सूबे के ब्राह्मण 1990 तक कांग्रेस का ठोस वोट बैंक माने जाते थे।

इस पार्टी ने सत्ता में भागीदारी भी ब्राह्मणों को सबसे ज्यादा दी। लेकिन रामजन्म भूमि आंदोलन के बाद ब्राह्मणों का झुकाव भाजपा की तरफ बढ़ता गया। केवल 2007 में मायावती ने इस वोट बैंक में अपने सर्वजन हिताय के फार्मूले से सतीश मिश्र के जरिए सेंध लगा दी थी। तब नकुल दुबे और रामबीर उपाध्याय जैसे नेता भी पार्टी में थे। लेकिन 2012 में ब्राह्मणों का यह वोट बैंक बिखर गया। कुछ सपा के हिस्से में भी आए। माता प्रसाद पांडे, मनोज पांडे, अभिषेक मिश्र के अलावा कुछ और ब्राह्मण नेताओं को भी अखिलेश यादव ने अहम पद दिए। पर 2017 में सूबे के ब्राह्मण इस उम्मीद में भाजपा के साथ लामबंद हो गए कि पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री का पद देगी। तब लक्ष्मीकांत वाजपेयी पार्टी के सूबेदार थे। यह बात अलग है कि मुख्यमंत्री बन गए राजपूत योगी आदित्यनाथ। पिछले साल विकास दुबे की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के बाद भाजपा के प्रति ब्राह्मणों का असंतोष बढ़ता गया, इसे पार्टी आलाकमान और संघ नेतृत्व दोनों ने ही महसूस किया। तभी तो जितिन प्रसाद को कांग्रेस से तोड़कर पार्टी में शामिल किया गया।

अब चर्चा है कि उन्हें मंत्रिपद दिया जाएगा। भाजपा की इस कवायद की प्रतिक्रिया पहले बसपा में हुई और फिर सपा में। सतीश मिश्र ने तो 23 जुलाई को अयोध्या में ही कर डाला ब्राह्मण सम्मेलन। भाजपा में ब्राह्मणों की उपेक्षा का आरोप भी जड़ दिया। अब सपा ने भी इस वोट बैंक की सुध ली है। पांच अगस्त को पार्टी का चेहरा रहे जनेश्वर मिश्र की जयंती पर साइकिल यात्राएं तो निकाली ही जाएंगी, सत्ता में आने पर परशुराम की 108 फुट ऊंची प्रतिमा लगाने का ऐलान तो पहले ही कर चुकी है पार्टी। लखनऊ में पार्टी के पांच बड़े ब्राह्मण नेता माता प्रसाद पांडे, सनातन पांडे, मनोज पांडे, पवन पांडे और अभिषेक मिश्र रविवार को अखिलेश यादव से मिलकर उन्हें परशुराम का चित्र भी भेंट कर आए।

असमंजस में कांग्रेस
हिमाचल में कांग्रेस पार्टी मंडी संसदीय हलके और अर्की विधानसभा हलके को लेकर उलझी हुई है। इन दोनों हलकों का हॉलीलाज कांग्रेस से सीधा नाता है। मंडी संसदीय हलके से हॉलीलाज कांग्रेस से पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह प्रत्याशी रह चुकी हंै जबकि अर्की विधानसभा हलका पूर्व मुख्यमंत्री और उनके पति वीरभद्र सिंह का रहा है। वे शिमला ग्रामीण हलका अपने बेटे विक्रमादित्य सिंह के लिए छोड़ कर पिछले चुनावों में अर्की की ओर आए थे और यहां से जीत भी गए। उनके निधन के बाद अब हॉलीलाज कांग्रेस को तय करना है कि इन दो हलकों में से उन्हें कौन सा चुनना है।

प्रतिभा सिंह को लेकर कांग्रेस में उनके समर्थकों के एक धड़े का कहना है कि उन्हें मंडी संंसदीय हलके से चुनाव मैदान में उतरना चाहिए जबकि एक खेमा इसके खिलाफ है। इस खेमे का मानना है कि मंडी संसदीय हलका बड़ा हो जाएगा और इसे संभालना आसान नहीं होगा। अर्की विधानसभा हलका है ऐसे में यहां तमाम इंतजाम करने आसान होंगे। लेकिन अभी तक कांग्रेस पार्टी को हॉलीलाज कांग्रेस से कोई इशारा नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर भाजपा लगातार हालीलाज कांग्रेस पर डोरे डाले हुए है। ऐसे में कांग्रेस पूरी तरह से सतर्क है। अब कांग्रेस इस इंतजार में है कि हॉलीलाज कांग्रेस से कोई इशारा मिले तो वह अर्की व मंडी में अपनी रणनीतिक गतिविधियों को ठोस तरीके से शुरू कर सके।

बदलाव की बयार
उत्तराखंड कांग्रेस ने संगठन में फेरबदल कर चुनाव संचालन समिति की कमान हरीश रावत को सौंपी। कांग्रेस संगठन में इस परिवर्तन से भाजपा के नेताओं की चिंताएं बढ़ गई क्योंकि उत्तराखंड में इस समय सक्रिय नेताओं में हरीश रावत जैसा कद्दावर नेता न भाजपा में है न ही कांग्रेस में। इसे देखते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष ने अचानक देहरादून का दौरा किया और राज्य की राजनीति की स्थितियों का आकलन किया।

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद से मैदानी मूल के नेता और हरिद्वार के विधायक तथा त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में मंत्री रहे मदन कौशिक को हटाकर गढ़वाल मंडल के किसी गढ़वाली मूल के ब्राह्मण नेता को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बिठाना चाहती है। इसके लिए विधायक महेंद्र भट्ट, ज्योति प्रसाद गैरोला, विनोद चमोली और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के नाम सामने आ रहे हैं। उनियाल कांग्रेस से आए थे इसलिए भाजपा संघ से जुड़े हुए महेंद्र भट्ट, गैरोला या विनोद चमोली में से किसी को भी पार्टी का अध्यक्ष बना सकती है। यह तो तय है कि भाजपा में प्रदेश संगठन में फेरबदल पूरी तरह से संभव है।

(संकलन : मृणाल वल्लरी)

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