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राजपाट: थोथा गोप्रेम

राने जमाने में ऐसे अनुपयोगी यानी बूढ़ी और बीमार गायों व उनके बछड़ों की देख-रेख पंचायती गोशालाओं में होती थीं। अब या तो ज्यादातर गोशालाएं बंद हो गर्इं या फिर उनकी माली हालत ऐसी नहीं है कि वे ऐसे अनुपयोगी मवेशियों के चारे और देख-रेख का बोझ उठा सकें।

उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार सत्ता में आई है, आवारा मवेशियों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। नीलगायों के आतंक से तो किसान पहले ही पीड़ित थे, अब गोवंश भी उनके जी का जंजाल बन गया है। वजह है- सरकार का गोवध पर कड़ा रुख। दरअसल विदेशी नस्ल की बूढ़ी गाय और बछड़े ग्वालों के किसी काम के नहीं होते। पुराने जमाने में ऐसे अनुपयोगी यानी बूढ़ी और बीमार गायों व उनके बछड़ों की देख-रेख पंचायती गोशालाओं में होती थीं। अब या तो ज्यादातर गोशालाएं बंद हो गर्इं या फिर उनकी माली हालत ऐसी नहीं है कि वे ऐसे अनुपयोगी मवेशियों के चारे और देख-रेख का बोझ उठा सकें। नतीजतन अरसे से ऐसा अनुपयोगी गोवंश कत्लखानों के हवाले हो रहा था। पहले खेती में बैलों का उपयोग था। पर ये बैल देसी नस्ल की गाय का वंश होते थे।

अब ज्यादातर दुधारू गाय विदेशी नस्ल की हैं, जिनके बछड़े खेती के काम नहीं आते। कानूनी बंदिश के चलते ज्यादातर मवेशीपालक ऐसे बछड़ों और अनुपयोगी गायों को आवारा छोड़ रहे हैं। कत्लखाने वाले भी गैरकानूनी होने के कारण उनकी खरीद नहीं कर रहे। आवारा मवेशी खेती को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पिछले हफ्ते उत्तर प्रदेश के पशुधन विकास मंत्री एसपी सिंह बघेल दिल्ली में पत्रकारों से रूबरू हुए। अक्तूबर में सूबे की राजधानी लखनऊ में आयोजित होने वाली किसान प्रदर्शनी का मकसद बताने के बहाने सरकार के किसान हितैषी होने का बखान करते रहे। पर पत्रकारों के सवालों से असहज हो गए।

एक पत्रकार ने आवारा गौवंश से खेती को हो रहे नुकसान और योगी सरकार की कड़ाई का जिक्र किया तो मंत्रीजी ने फरमाया कि आवारा गौवंश उनके कार्यकाल का नहीं है। उनकी सरकार को तो अभी सवा साल ही हुआ है सत्ता संभाले। गाय गर्भधारण के बाद प्रजनन में आठ महीने लेती है। लिहाजा सपा सरकार का दोष उन पर क्यों हो? फिर दूरगामी योजना भी बता दी कि वे नस्ल सुधार योजना लागू करेंगे। मवेशीपालकों को ऐसा वीर्य उपलब्ध कराएंगे कि गाय केवल बछिया देगी, बछड़ा नहीं। सामाजिक विसंगति पर कटाक्ष भी कर दिया कि अपने लिए भले बेटे की सबको चाहत हो पर अपनी गाय से बछिया ही चाहते हैं। नीलगाय के मुद्दे पर भी खूब बेबाकी दिखाई कि यह जानवर तो हिरण के वंश का है। गाय की तरह सींग नहीं होते इसके। पता नहीं किसने नीलगाय नाम रख दिया। लेकिन इनसे किसानों को निजात दिलाने के लिए क्या करेंगे, इस पर चुप्पी ही साधे रहे। ये मंत्री राजनीति में आने से पहले पुलिस में दरोगा थे। मुलायम सिंह यादव की निजी सुरक्षा में भी रहे। भाजपा में विधानसभा चुनाव से पहले ही आए थे। सपा-बसपा में रहते कभी नहीं जगा उनका गोवंश प्रेम।

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