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राजपाट: यात्रा की सियासत

राजस्थान में जो दल इस संभाग की ज्यादा सीटें जीतता है उसकी ही सरकार बनती है। इस कारण भी राजे इस इलाके पर पूरा फोकस कर रही हैं। राजे को अपनी यात्रा में सबसे ज्यादा विरोध शेखावटी अंचल और जोधपुर के मारवाड़ संभाग के साथ ही श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में झेलना पड़ सकता है।

Author August 11, 2018 2:51 AM
जयपुर में 3 अगस्त को राजस्थान गौरव यात्रा की शुरुआत करने से पहले लग्जरी बस की पूजा करती हुईं सीएम वसुंधरा राजे (फोटो-पीटीआई)

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले एंटी इंकबेंसी के फैक्टर के असर को कम करने के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे प्रदेश में गौरव यात्रा निकाल रही हैं। राजे दो महीने तक प्रदेश के हर कोने में घूम-घूम कर बताएंगी कि उनकी सरकार ने कितना विकास किया है और योजनाओं के जरिए जनता का कल्याण किया है। प्रदेश में दो महीने पहले तक तो भाजपा के खिलाफ तगड़ा माहौल बन गया था। दरअसल दो लोकसभा और एक विधानसभा उपचुनाव की करारी हार से तो जमीनी स्तर का कार्यकर्ता ही कहने लग गया था कि गए काम से। इसके साथ ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को लेकर जैसी तनातनी मची और दो महीने तक फैसला ही नहीं हो पाया उससे भी पार्टी का ग्राफ काफी नीचे आ गया था। हालांकि गौरव यात्रा के जरिए वसुंधरा लोगों से कह रही हैं कि हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा मत दोहरा देना, हमने बहुत काम किया है।

राजे ने इससे पहले 2003 और 2013 में यात्राएं निकाल कर भारी बहुमत से सरकार बनाई थी। दोनों बार विपक्ष में रहते हुए यात्रा निकली तो फायदा पहुंचा। वसुंधरा राजे धुन की पक्की नेता ठहरीं और इस बार तो उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व को यह मानने पर भी मजबूर कर दिया कि उन्हें ही नेता घोषित कर चुनाव लड़ने में फायदा है। राजे ने आलाकमान को पक्का भरोसा दिया कि वो सरकार बना कर दिखाएंगी और गौरव यात्रा से लोगों की नाराजगी दूर करने में भी सफल होंगी। यह गौरव यात्रा राजे के लिए अग्निपरीक्षा भी साबित होगी। पहले चरण की यात्रा उदयपुर संभाग के आदिवासी बहुल इलाकों से हो रही है जहां महिलाओं में राजे का अच्छा खासा आकर्षण है।

राजस्थान में जो दल इस संभाग की ज्यादा सीटें जीतता है उसकी ही सरकार बनती है। इस कारण भी राजे इस इलाके पर पूरा फोकस कर रही हैं। राजे को अपनी यात्रा में सबसे ज्यादा विरोध शेखावटी अंचल और जोधपुर के मारवाड़ संभाग के साथ ही श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में झेलना पड़ सकता है। इसका अंदेशा होते ही उन्होंने अपने भरोसेमंद मंत्रियों को इन इलाकों में दौड़ा दिया है। इस इलाके में राजनीतिक जागरूकता बहुत ज्यादा है और अलग-अलग जातियों का वर्चस्व होने से भाजपा के लोग भी यहां जीतना कठिन मान रहे हैं। राजे पहली बार मुख्यमंत्री रहते हुए यात्रा निकाल रही हैं तो प्रशासन और पुलिस भी विरोध को दबाने में लगे हुए हैं। राजे ने विपक्ष में रहते हुए यात्राएं निकाली थीं तो लोगों में जोश भी खूब था, लेकिन इस बार सत्ता में रह कर निकल रही इस यात्रा में कार्यकर्ताओं के साथ ही जनता में जोश की कमी साफ दिख रही है।

एनआरसी पर घमासान

असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस यानी एनआरसी मुद्दे पर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में घमासान मचा है। दोनों दल इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने के प्रयास में जुट गए हैं। एनआरसी के विरोध में ममता बनर्जी ही सबसे मुखर रही हैं। उनके आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा 11 अगस्त को यहां एक रैली आयोजित कर रही है। इस मुद्दे पर राज्य में सांप्रदायिक धुव्रीकरण भी तेज होने लगा है। एनआरसी के मुद्दे पर अपना रुख साफ करने के लिए रैली से पहले भाजपा की ओर से राज्य में जगह-जगह जो बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं। उनमें कहा गया है कि पार्टी बांग्लादेशी मुसलमानों को राज्य से भगाएगी, बंगालियों को नहीं। यह ममता के उन आरोपों का जवाब है जिसमें उन्होंने केंद्र और असम की भाजपा सरकारों पर एनआरसी के बहाने असम से बंगालियों और बिहारियों को खदेड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं। भाजपा तो पहले से ही तृणमूल कांग्रेस पर अल्पसंख्यकों के तुष्टीकरण का आरोप लगाती रही है। अब वह एनआरसी के बहाने उनको कठघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रही है।

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