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राजपाट: उथल-पुथल

ऐसा हुआ तो वसुंधरा विरोधी और संघी खेमा श्रेय लेना चाहेगा। दरअसल विधानसभा चुनाव की हार को पार्टी ने वसुंधरा के नेतृत्व की नाकामी और सरकार के भ्रष्टाचार का अंजाम माना था। चुनाव में नारा भी सुनाई पड़ा था कि मोदी से बैर नहीं पर वसुंधरा खैर नहीं।

Author May 11, 2019 4:43 AM
राजस्थान भाजपा में भीतरघात के आसार। (express photo)

राजस्थान में लोकसभा चुनाव निपटा तो भाजपा में उथल-पुथल का अंदेशा बढ़ गया है। विधानसभा चुनाव की हार का ठीकरा तो आलाकमान और वसुंधरा विरोधी खेमे ने वसुंधरा राजे व उनकी मंडली के सिर फोड़ दिया था। लेकिन लोकसभा में उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले तो क्या होगा? पिछली दफा सारी पच्चीस सीटें भाजपा ने जीती थीं। इस बार भी भाजपाई कम से कम बीस सीटें जीतने की उम्मीद लगा रहे हैं। उम्मीद केवल प्रधानमंत्री के नाम पर। यानी विधानसभा की तुलना में लोकसभा का पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहेगा, यह विश्वास कायम है।

ऐसा हुआ तो वसुंधरा विरोधी और संघी खेमा श्रेय लेना चाहेगा। दरअसल विधानसभा चुनाव की हार को पार्टी ने वसुंधरा के नेतृत्व की नाकामी और सरकार के भ्रष्टाचार का अंजाम माना था। चुनाव में नारा भी सुनाई पड़ा था कि मोदी से बैर नहीं पर वसुंधरा खैर नहीं। भाजपा ने बीस सीटें जीत ली तो फिर वसुंधरा खेमे के लिए संकट की घड़ी आ सकती है। वैसे भी वसुंधरा ने पार्टी आलाकमान को अपने सामने हमेशा बौना ही माना। तभी तो गजेंद्र सिंह शेखावत को पार्टी का सूबेदार बनाने की आलाकमान की इच्छा वसुंधरा ने पूरी नहीं होने दी थी।

शेखावत का इस बार चुनाव में जोधपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत से मुकाबला है। शेखावत के प्रचार में प्रधानमंत्री और पार्टी के मुखिया तो आए पर वसुंधरा ने मुंह फेरे रखा। आरोप तो यहां तक है कि वसुंधरा समर्थकों ने शेखावत के लिए खाई खोदने का काम किया। फिर भी शेखावत जीत गए तो उनकी बल्ले-बल्ले होगी। पार्टी नतीजे की राह देख रही है। रालोपा नेता हनुमान बेनीवाल और जयपुर राजघराने की पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी को वसुंधरा के विरोध के बावजूद आलाकमान ने उम्मीदवार बनाया। ये दोनों भी जीते तो फिर वसुंधरा राजे और उनके समर्थकों का खड्डेलाइन लगना तय होगा, ऐसा दावा संघी खेमे से जुड़े नेता खुलकर कर रहे हैं।

 

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