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चुनावी स्टंट

पश्चिम बंगाल में भाजपा के मिशन चौबीस प्लस को कतई परवान नहीं चढ़ने देना चाहतीं दीदी। दीदी यानी तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और सूबे की मुख्यमंत्री। आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तरह ममता भी केंद्र की भाजपा सरकार के पीछे हाथ धोकर पड़ी हैं।

Author January 12, 2019 5:13 AM
प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (फाइल फोटोः पीटीआई)

पश्चिम बंगाल में भाजपा के मिशन चौबीस प्लस को कतई परवान नहीं चढ़ने देना चाहतीं दीदी। दीदी यानी तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और सूबे की मुख्यमंत्री। आंध्र के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तरह ममता भी केंद्र की भाजपा सरकार के पीछे हाथ धोकर पड़ी हैं। अपने सूबे में तो भाजपा की दाल गलते देखना चाहती ही नहीं, देशभर में इस पार्टी के खिलाफ लोकसभा चुनाव में माहौल बनाने की पुरजोर कवायद में जुटी हैं। पर अपने जनाधार को लेकर भी उतनी ही चौकस हैं। तभी तो सरकारी कर्मचारियों और किसानों पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान दिख रही हैं। सरकारी खजाने का मुंह पूरी तरह खोल दिया है दोनों तबकों के लिए। पहले सूबे के किसानों के लिए आकर्षक कृषक बंधु योजना लागू की और किसी भी किसान की मौत पर उसके परिवारजनों को दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता का एलान कर दिया। खेती के लिए पांच हजार रुपए प्रति एकड़ की नकद आर्थिक सहायता अलग। अब सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता भी एक झटके में सौ फीसद बढ़ा दिया।

यह भत्ता अब एक सौ पच्चीस फीसद हो गया है। इसी महीने के वेतन के साथ लागू हो जाएगी बढ़ोत्तरी। इस फैसले के बाद केंद्र और सूबे के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में महज तेईस फीसद का ही अंतर रह गया है। पिछले हफ्ते शिक्षकों और कुलपतियों की सेवानिवृत्ति की उम्र तो बढ़ा ही दी थी। यानी बासठ की जगह अब पैंसठ साल तक सेवा में रहेंगे शिक्षक। कुलपतियों को सत्तर साल की उम्र पूरी होने तक पद पर बने रहने का अवसर मिलेगा। ममता अपने फैसले के पक्ष में दलीलें भी तैयार रखती हैं। उम्र बढ़ाने के पक्ष में दलील दी है कि अनुभवी बेहतर काम करते हैं। याद कीजिए कि दुर्गा पूजा के मौके पर ममता ने नर्सों की सेवानिवृत्ति की उम्र भी साठ से बढ़ाकर बासठ कर दी थी। अपने फैसले की वाहवाही और दूसरे के फैसले की खिल्ली उड़ाना अब फैशन बन चुका है। लिहाजा भाजपा ने भी इस फैशन को अमल में लाते हुए ममता की घोषणाओं को चुनावी स्टंट बताने में देर नहीं लगाई।

(अनिल बंसल)

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