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अंधे का रेवड़ी वितरण

गुटबाजी राजनीति का ही नहीं नौकरशाही का भी रोग बन चुका है अब। उत्तराखंड में नौकरशाही इस रोग की ज्यादा ही चपेट में है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अभिनव प्रयोग के तहत गणतंत्र दिवस पर ईमानदार और बेदाग छवि वाले कार्यकुशल अफसरों को सम्मानित करने का फैसला किया ताकि उनका मनोबल बढ़े।

Author January 12, 2019 5:09 AM
उत्तरखंड के सीएम त्रिवेंद सिंह रावत (फाइल)

गुटबाजी राजनीति का ही नहीं नौकरशाही का भी रोग बन चुका है अब। उत्तराखंड में नौकरशाही इस रोग की ज्यादा ही चपेट में है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अभिनव प्रयोग के तहत गणतंत्र दिवस पर ईमानदार और बेदाग छवि वाले कार्यकुशल अफसरों को सम्मानित करने का फैसला किया ताकि उनका मनोबल बढ़े। सूची बनाने का जिम्मा मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति को सौंप दिया। पर यह समिति तटस्थ और निष्पक्ष तरीके से अपने काम को अंजाम नहीं दे पाई। आनन-फानन में 48 अफसरों की सूची तो बना दी पर कसौटी पर सवाल उठने से नहीं रोक पाई। मसलन, कुछ नामचीन ईमानदार इस सूची से नदारद थे तो कुछ विवादास्पद इसमें जगह पा गए। और तो और समिति में शामिल अफसरों में भी अपने नाम जुड़वा लिए। अंधा बांटे रेवड़ी की तर्ज पर खुद ही उलझ गए बंदरबांट में। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली समिति से इस तरह के फैसले की उम्मीद नहीं करने वाले हैरान हैं।

(अनिल बंसल)

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