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राजपाट: अग्निपरीक्षा

लोकसभा चुनाव भाजपा से मिलकर लड़ेंगे तो 2009 की तरह 25 सीटें तो मिलने से रहीं। ऊपर से हवा का रुख भी अनुकूल नहीं लग रहा। उधर भाजपा के मुखिया ने भी इसी महीने बिहार दौरे का कार्यक्रम बना रखा है। जाहिर है कि नीतीश को उनके साथ मंत्रणा के लिए समय निकालना ही पड़ेगा।

Author July 7, 2018 04:19 am
नीतीश कुमार और पीएम नरेंद्र मोदी (Source: Twitter/PMO)

नीतीश कुमार की नींद उड़ गई लगती है। उपक्रम तो बेफिक्री का ही कर रहे हैं। पर भविष्य को लेकर बेचैनी चेहरे पर साफ झलकती है। जिम्मेदारियों का बोझ भी कम नहीं। बिहार के मुख्यमंत्री तो हैं ही, अपनी पार्टी जद (एकी) के मुखिया भी ठहरे। पता नहीं क्या सोचकर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक दिल्ली में करने का फैसला किया? शरद यादव जैसा भरोसेमंद साथी तो अब है नहीं। दिल्ली में ले-देकर केसी त्यागी संभालेंगे बंदोबस्त। भाजपा को संदेश भले अपनी पार्टी के बिहार से बाहर भी असरदार होने का देना चाहते हैं पर हकीकत तो कतई उलट है। अब तो बिहार में ही वजूद के लाले पड़े हैं।

लोकसभा चुनाव भाजपा से मिलकर लड़ेंगे तो 2009 की तरह 25 सीटें तो मिलने से रहीं। ऊपर से हवा का रुख भी अनुकूल नहीं लग रहा। उधर भाजपा के मुखिया ने भी इसी महीने बिहार दौरे का कार्यक्रम बना रखा है। जाहिर है कि नीतीश को उनके साथ मंत्रणा के लिए समय निकालना ही पड़ेगा। तभी उनकी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता महसूस कर पाएंगे कि भाजपा के साथ रिश्तों में कुछ अस्वाभाविक नहीं है। भरोसा दिलाएंगे कि वे अगला लोकसभा चुनाव भाजपा के साथ मिलकर जीत जाएंगे। विरोधियों को पछाड़ देंगे। अपनी साख के बूते। यह बात अलग है कि अब उनकी पार्टी के नेताओं को भी उनकी साख का पहले जैसा असर नजर नहीं आ रहा।

तीन साल पहले महागठबंधन बना कर भाजपा को झटका दिया था। मुंह पर भले कोई नुक्ताचीनी नहीं करे पर यह मलाल तो नीतीश के समर्थकों को भी है कि जनादेश भाजपा के साथ मिलकर सरकार चलाने का नहीं था। बिहार में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वालों की तादाद भी बढ़ी है। ऐसे में नीतीश दो नावों की सवारी कर सुरक्षित खेलने की रणनीति अपना रहे हैं। सूबे के लिए विशेष राज्य के दर्जे की पुरानी मांग को फिर जीवित कर दिया। भाजपा के हर एजंडे को ढोने से भी कतरा रहे हैं। यानी भावी रणनीति अभी अनिश्चित है। सब कुछ सहज नहीं दिखा तो पाला बदलने में भी गुरेज नहीं करेंगे। राजनीति में यों भी कोई किसी का सगा नहीं होता।

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