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राजपाट: राहु का प्रकोप

चार साल तक न संघ और न भाजपा आलाकमान ने सुनी तिवाड़ी की टीस। यहां तक कि योग गुरु रामदेव की मार्फत भी आलाकमान के पास शिकायत भेजना बेकार गया। अब पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। आलाकमान को भेजे पत्र में अपने असंतोष की असली वजह वसुंधरा की कार्यशैली को बताया है।

Author June 30, 2018 3:17 AM
राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे।

लगता है कि यह साल राजस्थान में भाजपा के लिए शुभ संकेत लेकर नहीं आया है। एक के बाद एक झटके सहने पड़े हैं पार्टी को। पहले लोकसभा की दो और विधानसभा की एक सीट के उपचुनाव ने पार्टी को करारी हार का मुंह देखना पड़ा। फिर सूबेदार अशोक परनामी के इस्तीफे की नौबत आई। उनकी जगह नया सूबेदार तय करने में नाकाम साबित हो गए आलाकमान। ढाई महीने लटकाने के बाद आखिर चली वसुंधरा की ही और शुक्रवार को मदन लाल सैनी को बनाना पड़ा नया सूबेदार। ताजा झटका घनश्याम तिवाड़ी ने दिया है। पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं। लेकिन वसुंधरा राजे ने अपने आलोचक तिवाड़ी की वरिष्ठता को ठेंगा दिखा दिया। उन्हें मंत्री पद नहीं दिया। सो, वे भी लगातार मोर्चेबंदी करते रहे अपनी ही सरकार के खिलाफ।

चार साल तक न संघ और न भाजपा आलाकमान ने सुनी तिवाड़ी की टीस। यहां तक कि योग गुरु रामदेव की मार्फत भी आलाकमान के पास शिकायत भेजना बेकार गया। अब पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। आलाकमान को भेजे पत्र में अपने असंतोष की असली वजह वसुंधरा की कार्यशैली को बताया है। तिवाड़ी न केवल अतीत में संघ के प्रचारक रहे हैं बल्कि भैरोसिंह शेखावत और वसुंधरा की पिछली सरकार में भी मंत्री थे। अपने पत्र में आलाकमान को वसुंधरा की तुलना में बौना करार दिया है। कुछ केंद्रीय नेताओं की साठगांठ से वसुंधरा सरकार द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार का भी खुलासा करने से नहीं चूके हैं। पहले से ही दागदार हो चुकी पार्टी की छवि को काफी नुकसान पहुंचा है तिवाड़ी के तेवर से। उनकी बगावत को ब्राह्मणों की नाराजगी के रूप में प्रचारित कर रहे हैं भाजपा विरोधी।

सचिन पायलट के कारण गुर्जर और अशोक गहलोत के कारण माली बिरादरी को तो कांग्रेस पहले से ही अपना पक्का वोट बैंक समझ रही थी। ब्राह्मण रूठ गए तो नुकसान का आकलन करना मुश्किल होगा। चुनाव नजदीक देख अब सूबे की नौकरशाही भी रंग बदलने लगी है। यानी कांग्रेस ही नहीं नौकरशाह भी मान बैठे हैं कि मुश्किल हैं फिर भाजपा सरकार बनने के आसार।

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