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राजपाट: कसौटी शगुन की

सूबेदार सचिन पायलट ने मेरा बूथ मेरा गौरव अभियान छेड़ रखा है। सभी विधानसभा क्षेत्रों में जारी इस अभियान में भीड़ भी खूब जुट रही है। एक वजह टिकट के दावेदारों का इस बहाने शक्ति प्रदर्शन भी है। पर जयपुर के शाहपुरा इलाके में ऐसे ही एक आयोजन में नेताओं के बीच लात-घूंसे चल गए। टिकट की दावेदारी ही थी फसाद की वजह।

Author June 2, 2018 4:26 AM
सांकेतिक तस्वीर।

राजस्थान में कांग्रेसी अति आत्मविश्वास के शिकार लग रहे हैं। भाजपा में नए सूबेदार को लेकर पेच फंसा है तो कांग्रेस में भी सब कुछ सहज नहीं है। हां, इस खुशफहमी में छोटा-बड़ा हर कांग्रेसी है कि व्यवस्था विरोध और सियासी मिजाज के चलते सत्ता पर सवारी की बारी अब उनकी है। पिछले दिनों हुए उपचुनाव के नतीजों ने दिमाग सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। नतीजतन नेताओं के बीच गुटबाजी साफ दिखने लगी है। सूबेदार सचिन पायलट ने मेरा बूथ मेरा गौरव अभियान छेड़ रखा है। सभी विधानसभा क्षेत्रों में जारी इस अभियान में भीड़ भी खूब जुट रही है। एक वजह टिकट के दावेदारों का इस बहाने शक्ति प्रदर्शन भी है। पर जयपुर के शाहपुरा इलाके में ऐसे ही एक आयोजन में नेताओं के बीच लात-घूंसे चल गए। टिकट की दावेदारी ही थी फसाद की वजह।

प्रभारी महासचिव अविनाश पांडेय की मौजूदगी में हुआ घमासान। और तो और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संदीप चौधरी की उन्हीं के इलाके में उनके विरोधियों ने खासी धुनाई कर दी। सचिन पायलट ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए ब्लॉक अध्यक्ष समेत और भी कई दावेदारों को दरवाजा दिखा दिया। आलाकमान के चेहरे पर अलबत्ता चिंता की लकीरें जरूर दिखने लगी है कि टिकट बंटवारा जी का जंजाल न बन जाए। हालांकि सूबे के कांग्रेसी इस सिर फुटौव्वल को भी शुभ संकेत ही मान रहे हैं। उन्हें घमासान से अच्छे दिनों की आहट साफ महसूस होने लगी है।

कांग्रेस में जूतम-पैजार की नौबत है पर सत्तारूढ़ भाजपा में सन्नाटा। सूबेदार ही नहीं तो फिर पार्टी की सक्रियता दिखे भी कैसे? ऊपर से जातीय उलझनें और बढ़ गई हैं। भाईलोग आपस में ही डर दिखा रहे हैं कि राजपूत को सूबेदार बनाया तो जाट रूठ जाएंगे और गुर्जर को बनाया तो मीणा खफा होंगे। दलित को अगड़े कभी स्वीकार नहीं करेंगे। रही कांग्रेसियों की बात तो वे बेशर्मी से खिल्ली उड़ा रहे हैं कि उनकी पार्टी में जिसे आलाकमान तय कर दे उसी को सब सिर माथे बिठा लेते हैं। भाजपा जैसी गत कांग्रेस की नहीं है। पार्टी का सूबेदार गुर्जर है तो विधानसभा में नेता जाट है। जाति का कार्ड भाजपा ही खेलती रही है सो, वही फंस भी गई है अपने बिछाए जाल में।

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