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राजपाट: दीदी की चिंता

दीदी यानी ममता बनर्जी की चिंता है कि अंतिम मसविदे में ऐसे लोगों के नाम भी काट दिए गए हैं जिनके पास पासपोर्ट, आधार कार्ड व वोटर कार्ड हैं। लिहाजा, एनआरसी को असम से बंगालियों व बिहारियों को खदेड़ने की सरकारी योजना माना जाना चाहिए।

Author August 4, 2018 2:28 AM
ममता का बीजेपी पर हमला

असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) का मसविदा जारी होना पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के लिए राजनीतिक घमासान का बहाना बन गया है। इस मुद्दे पर दीदी यानी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 40 लाख लोगों के नाम काटने पर चिंता जता चुकी हैं। केंद्र सरकार पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगा चुकी हैं। वे कह चुकी हैं कि एनआरसी में जिन लोगों को असम का नागरिक नहीं माना गया है पश्चिम बंगाल उनको शरण देने पर विचार कर सकता है। दीदी यानी ममता बनर्जी की चिंता है कि अंतिम मसविदे में ऐसे लोगों के नाम भी काट दिए गए हैं जिनके पास पासपोर्ट, आधार कार्ड व वोटर कार्ड हैं। लिहाजा, एनआरसी को असम से बंगालियों व बिहारियों को खदेड़ने की सरकारी योजना माना जाना चाहिए। इसका असर बंगाल पर भी पड़ेगा। ममता बनर्जी की आशंका दरअसल यह है कि उनके राज्य में इस मुद्दे को भाजपा दूसरे तरीके से उछाल रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी राज्य की सत्ता में आई तो असम की तर्ज में बंगाल में भी राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) प्रकाशित किया जाएगा और यहां रहने वाले तमाम अवैध नागरिकों को बांग्लादेश भेज दिया जाएगा। उनका कहना है कि घुसपैठियों का समर्थन करने वालों को भी देश से बाहर निकाल दिया जाएगा। भाजपा नेता ने कहा कि असम में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एनआरसी लागू किया जा रहा है।

भारी पड़ता भतीजा
नीतीश कुमार कैसे निपटें अपने भतीजे से। भतीजा तेजस्वी यादव चैन से नहीं रहने दे रहा है। अभी से इतना तंग कर रहा है तो लोकसभा चुनाव आते-आते पता नहीं क्या-क्या करेगा। कहीं महागठबंधन को हरा-भरा न कर दे। उसने मुजफ्फरपुर बालिका गृह के कांड को इतना उछाला कि उसकी मांग को पूरा करने के सिवा कोई दूसरा चारा ही नहीं था। सुशासन बाबू ने पहले अपने पुलिस अधिकारियों पर पूरा भरोसा किया। पुलिस अधिकारियों ने भी डंके की चोट पर कह दिया कि कांड की हो रही जांच से वे संतुष्ट हैं। लेकिन दूसरे दिन ही मुख्यमंत्री को कांड की जांच सीबीआइ से कराने का एलान करना पड़ा।

भतीजे ने ऐसे घेरा कि पुलिस और प्रशासन की घिग्घी बंध गई है। सूबे में भ्रष्टाचार, जुल्म, महिला उत्पीड़न, दलित उत्पीड़न के आरोप और वारदात सामने आ रहे हैं। नीतीश कुमार कभी कहा करते थे कि अपराध कर अपराधी बच नहीं सकता। लेकिन अब पहले की तरह जोशीले नहीं दिख रहे। बालिका गृह कांड का मुख्य अभियुक्त तो राजनीतिकों, अफसरों और पत्रकारों का प्यारा था। प्यारा होने की आड़ में क्या-क्या करता रहा। भतीजा तमाम छोटे-बड़े मुद्दे उठा रहा है। विपक्षी दल के नेता के रूप में धार दिखा रहा है। आखिर भतीजा सलाह किससे ले रहा है।

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