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राजपाट: बेअसर मंत्र

राजस्थान में भाजपा का संगठन चाहे जितना मजबूत हो जाए, वोट तो आम जनता ही देगी। अजमेर और अलवर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा के उपचुनाव के नतीजे बतौर उदाहरण पेश हो रहे हैं। तीनों जगह संगठन की मजबूती कम नहीं थी। लेकिन बूथ पर मतदाता रूठ गए।

Author July 28, 2018 2:44 AM
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Source: PTI)

पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता के जोश और जुनून से ही सियासी हवा का अंदाज लग जाता है। राजस्थान में विधानसभा चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं है। लिहाजा लोगबाग खुद ही आकलन करने लगे हैं कि कांग्रेस और भाजपा में से कौन कितने पानी में है। भाजपा ने अमित शाह और नरेंद्र मोदी दोनों के जयपुर में कार्यक्रम कराए तो मकसद कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने का ही होगा। दोनों के कार्यक्रम में कार्यकर्ता जुटे भी खूब। यह बात अलग है कि वसुंधरा सरकार के प्रति नाराजगी का भाव उनके चेहरों पर साफ दिखा। कार्यकर्ता अब बड़े नेताओं को समझा रहे हैं कि अपनी सरकार हो तो चुनाव में जनता उसके कामकाज के आधार पर वोट देती है। उनकी राय की बड़े नेता तो अनदेखी ही करेंगे। सो, आलाकमान और प्रधानमंत्री दोनों ही उपदेश दे गए कि संगठन को मजबूत करें व केंद्र सरकार की उपलब्धियों का प्रचार करें।

राजस्थान में भाजपा का संगठन चाहे जितना मजबूत हो जाए, वोट तो आम जनता ही देगी। अजमेर और अलवर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा के उपचुनाव के नतीजे बतौर उदाहरण पेश हो रहे हैं। तीनों जगह संगठन की मजबूती कम नहीं थी। लेकिन बूथ पर मतदाता रूठ गए। सूबे की सरकार के कामकाज से लोग खुश नहीं लग रहे। बूथ कमेटी के कार्यकर्ता लोगों को सरकार की उपलब्धि गिनाते हैं तो लोग भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और बढ़ते अपराध को लेकर मुंह पिचकाने लगते हैं। लेकिन आलाकमान का तो एक ही मंत्र है जिसे वे हर जगह जपते हैं कि बूथ पर पकड़ बनाओ। तुलना कांग्रेस से करें तो भाजपा को संगठन के संदर्भ में कुछ भी नहीं करना चाहिए।

कांग्रेस की तुलना में तो सौ गुना मजबूत है अभी भी भाजपा का संगठन। लेकिन लोगों को इस मजबूती से कोई सरोकार भला क्यों हो? कांग्रेस ने भी मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम की कड़ी आयोजित कर भाजपा को हिला दिया। भाजपा से ज्यादा टिकटार्थी इस बार कांग्रेसी खेमे में जुट रहे हैं। वैसे भी राजस्थान में तो परंपरा सी बन चुकी है कि हर बार सत्ता परिवर्तन हो जाता है। शायद यही तथ्य कांग्रेस को संगठन की मजबूती की राह पकड़ने की जरूरत महसूस नहीं होने दे रहा। भाजपा सरकार की नकारात्मक छवि के कारण कांग्रेसियों को कुछ करने की जरूरत ही कहां है?

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