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राजपाट: उलटबांसी

लोकसभा के चुनाव को जीत कर भी लाभ शायद ही हो पाए। केंद्र में सरकार बनने की कोई गारंटी जो नहीं। पर विधानसभा चुनाव में तो सब मान कर चल रहे हैं कि जीत कांग्रेस की ही होगी। विधानसभा चुनाव की हसरत इसी कारण सीपी जोशी, गिरिजा व्यास, नमो नारायण मीणा और लालचंद कटारिया सरीखे दिग्गज नेता भी पाले बैठे हैं।

माहौल माकूल हो तो छोटे-बड़े की परवाह कौन करता है? मसलन, जीत की गारंटी हो तो बड़े पद की चाहत वाले छोटा पद लेने में भी गुरेज नहीं करते। राजस्थान में कांग्रेस के नेताओं का आजकल यही हाल है। लोकसभा के बजाए ज्यादातर बड़े नेता विधानसभा चुनाव को अपने लिए फायदेमंद मान रहे हैं। हालांकि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में ज्यादा फासला नहीं रहेगा। विधानसभा के चुनाव इस साल नवंबर में हो जाएंगे तो लोकसभा के भी मार्च-अप्रैल में होंगे। लेकिन उनकी अपनी सोच गलत नहीं है।

लोकसभा के चुनाव को जीत कर भी लाभ शायद ही हो पाए। केंद्र में सरकार बनने की कोई गारंटी जो नहीं। पर विधानसभा चुनाव में तो सब मान कर चल रहे हैं कि जीत कांग्रेस की ही होगी। विधानसभा चुनाव की हसरत इसी कारण सीपी जोशी, गिरिजा व्यास, नमो नारायण मीणा और लालचंद कटारिया सरीखे दिग्गज नेता भी पाले बैठे हैं। और तो और अभी तक केंद्र की सियासत करते रहे पार्टी के सूबेदार सचिन पायलट भी विधानसभा का चुनाव लड़ने का सपना देख रहे हैं।

समर्थकों ने उनके अनुकूल दिखने वाले तीन सीटों का चयन भी कर लिया है। सांसदों के विधानसभा चुनाव लड़ने की मंशा रखने की खबर ने विधानसभा टिकट के दावेदारों की नींद उड़ा दी है। पूर्व सांसदों ने अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा कर होश उड़ा दिए हैं क्षत्रपों के। नए दावेदार केंद्र की राजनीति करने वाले पार्टी नेताओं के विधानसभा चुनाव लड़ने के इरादों का मुखर विरोध कर रहे हैं। राजस्थान में भाजपा की सरकार के खिलाफ माहौल तो लगता ही है। तभी तो लोकसभा की दोनों और विधानसभा की इकलौती सीट भाजपा हार गई थी।