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राजपाट: मुख्यमंत्री के दावेदार

मुख्यमंत्री रावत और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक सतपाल महाराज से बुरी तरह चिढ़े हुए हैं। सतपाल महाराज खुद मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रहे हैं। जब भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को बदले जाने की बात उठती है तो सतपाल महाराज सबसे बड़े दावेदार के रूप में सामने आते हैं।

Uttarakhand chief minister Trivendra Singh Rawat, Trivendra Singh Rawat, Election Commission of India, DEHRADUN, cbdt, Garhwal Mandal Vikas Nigam, hindi news, News in Hindi, Jansattaउत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (PTI Photo)

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ कुछ विधायकों ने लगातार मोर्चा खोल रखा है। पहले बसपा के पूर्व विधायक शहजाद के बेटे की शादी में रावत के जाने पर हरिद्वार जिले के लक्सर के भाजपा विधायक संजय गुप्ता ने उन पर हमला करते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री के पास झोटा बिरयानी वालों के पास जाने के लिए तो समय है, लेकिन पार्टी के विधायकों से मिलने के लिए समय नहीं है। इस बयान पर जमकर हंगामा भी हुआ था। अब हरिद्वार के मंगलौर क्षेत्र में बूचड़खाने खोलने का लाइसेंस देने के लिए चार विधायकों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनकी सरकार को घेर लिया है। दरअसल मुख्यमंत्री से भाजपा विधायकों की नाराजगी कैबिनेट मंत्री और हरिद्वार के विधायक मदन कौशिक को लेकर है।

मदन कौशिक की भाजपा के विधायकों यतीश्वरानंद, संजय गुप्ता व कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के साथ पटरी नहीं बैठती है। इन तीनों विधायकों ने कौशिक को मंत्री बनाने का विरोध किया था, लेकिन संघ से जुड़े नेता शिवकुमार के दबाव में कौशिक को कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। वहीं दूसरी ओर सतपाल महाराज को भी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मदन कौशिक ने करारा झटका दिया है। कांवड़ मेले के बाद हर साल पुलिस का बड़ा खाना कई सालों से प्रेम नगर आश्रम में होता रहा है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के इशारे पर पुलिस प्रशासन ने बड़े खाने का स्थान प्रेम नगर आश्रम के बजाए पुलिस लाइन कर दिया। इसके पीछे प्रशासन का यह तर्क है कि पिछले साल सतपाल महाराज के आश्रम की दीवार को लेकर हरिद्वार के मेयर मदन कौशिक के खास मनोज गर्ग और सतपाल समर्थकों में मारपीट हो गई थी, जिसका मुकदमा ज्वालापुर थाने में दर्ज है। इसलिए सतपाल महाराज के प्रेम नगर आश्रम में बड़ा खाना नहीं रखा गया। हालांकि पिछले साल इस घटना के बाद प्रेम नगर आश्रम में ही बड़ा खाना रखा गया था तो इस बार क्यों नहीं रखा गया। इसे लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।

दरअसल मुख्यमंत्री रावत और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक सतपाल महाराज से बुरी तरह चिढ़े हुए हैं। सतपाल महाराज खुद मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रहे हैं। जब भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को बदले जाने की बात उठती है तो सतपाल महाराज सबसे बड़े दावेदार के रूप में सामने आते हैं। वैसे मदन कौशिक भी मुख्यमंत्री बनने की लाइन में लगे हुए हैं और वे त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार के प्रवक्ता हैं। राज्य की भाजपा सरकार वास्तव में मदन कौशिक ही चला रहे हैं। कौशिक की संघ, भाजपा हाईकमान और सूबे के अधिकारियों में अच्छी पकड़ है। पहाड़ीवाद के कारण कौशिक मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। वरना उनमें मुख्यमंत्री बनने के गुण त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी ज्यादा हैं। वह मिलनसार हैं और उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र में उनका जनाधार बहुत अच्छा है।

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