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राजपाट दबदबा राजा का, राग दरबारी

हिमाचल कांग्रेस के सूबेदार सुखविंदर सिंह सुक्खू की डगमगा रही कुर्सी को सहारा देना रहा होगा अंबिका सोनी का मकसद।

Author November 7, 2016 5:40 AM
हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह।

दबदबा राजा का
हिमाचल कांग्रेस के सूबेदार सुखविंदर सिंह सुक्खू की डगमगा रही कुर्सी को सहारा देना रहा होगा अंबिका सोनी का मकसद। सूबे के उनके दौरे का और कोई मकसद तो कांग्रेस ने बताया भी नहीं। अलबत्ता पत्रकारों से कह गईं कि संगठन में छोटे स्तर पर कुछ बदलाव संभव हैं। पर बड़े स्तर पर किसी बदलाव की संभावना नहीं है। वीरभद्र और सुक्खू को एक मेज पर बिठा भी दिया उन्होंने। तीनों के बीच हुई बातचीत औपचारिक तौर पर तो सामने नहीं आई पर अनौपचारिक संकेत गिले-शिकवे दूर करने की कवायद के ही मिले हैं। पत्रकारों से भी वीरभद्र की मौजूदगी में सुक्खू ने यही कहा कि मुख्यमंत्री से उनके अच्छे संबंध हैं। विवाद की बात मीडिया की देन है। सुक्खू ने मीडिया को दोष दिया तो मीडिया के निशाने पर अंबिका सोनी आ गईं। कांग्रेस अपने करे-धरे का ठीकरा हमेशा मीडिया के सिर ही क्यों फोड़ती है, इस असहज सवाल पर अंबिका ने अपना संतुलन खोया नहीं। जो भी हो इस बार कौल सिंह जैसा बुरा सलूक शायद ही हो सुक्खू के साथ। कौल सिंह को तो पिछले विधानसभा चुनाव से पहले अचानक सूबेदारी से बेदखल किया था आलाकमान ने। जबकि बेचारे मुख्यमंत्री पद का ख्वाब देख रहे थे। सुक्खू और वीरभद्र के मन बेशक न मिल पाए हों पर दिखावा तो दोनों एका का ही कर रहे हैं। जबकि कुछ दिन पहले तक तो रिश्तों में खटास कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी। इतनी कि प्रेम कुमार धूमल ने सुक्खू की संपत्तियों की जांच की मांग की तो वीरभद्र ने तपाक से कहा था कि जांच करा लेंगे। उनकी एक पंक्ति ने सुक्खू की नींद उड़ा दी थी। गनीमत है कि सूबे की प्रभारी अंबिका सोनी फिलहाल तो उन्हें संजीवनी दे ही गईं।
राग दरबारी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा अब हिमाचल की सियासत में खूब दिलचस्पी ले रहे हैं। पिछले दिनों शिमला गए तो सूबे की कांग्रेस सरकार की खिंचाई करना नहीं भूले। कांग्रेस ने भी पलटवार में देर नहीं लगाई। तो उसके पलटवार पर नड्डा समर्थक भाजपा नेताओं को भी गला साफ करने का मौका मिल गया। जबकि वीरभद्र सरकार के तीन मंत्रियों ने नड्डा के खिलाफ साझा बयान दाग दिया। हैरानी की बात यह रही कि ये तीनों मंत्री नड्डा के करीबी माने जाते रहे हैं। पर अपने आका के ऊपर हमला हो तो चुप भी कैसे रह पाते। मुख्यमंत्री का विश्वास पात्र दिखने की होड़ लग गई। लेकिन इस सियासत को ज्यादा हवा प्रेम कुमार धूमल ने दी। फरमाया कि मंत्रियों के बयान किसी बहस से कम नहीं हैं। मंत्रियों पर मुख्यमंत्री पद का ख्वाब देखने का अनुमान भी थोप दिया। उधर मुख्यमंत्री वीरभद्र बुखार के चलते शिमला के सरकारी अस्पताल में थे। धूमल की अटकल पर भरोसा करें तो प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआइ के चक्रव्यूह से वीरभद्र का निकल पाना आसान नहीं। उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा तो कौन बनेगा उनका उत्तराधिकारी। हो सकता है कि आला कमान उस सूरत में फैसला वीरभद्र पर ही छोड़ दे। यानी वीरभद्र के प्रति भक्तिभाव के पीछे दूरदृष्टि है मंत्रियों की। जाहिर है जो ज्यादा विश्वासपात्र होगा उसी का नाम बढ़ाएंगे वीरभद्र।

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