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राजपाटः निशाना अपनों का

उधर योगी के चहेते गोरखपुर के पार्टी सांसद और भोजपुरी अभिनेता रविकिशन शुक्ला ने अग्रवाल को सलाह दी है कि शर्म आती है तो पार्टी और विधानसभा से इस्तीफा क्यों नहीं दे देते।

इस बार तो अग्रवाल को पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। गुनाह उनके एक ट्वीट को बताया गया है।

उत्तर प्रदेश में भाजपा का बंपर बहुमत है। 403 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 309 सदस्य हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तूती बोल रही है पार्टी में। पर गोरखपुर के भाजपा विधायक डाक्टर राधामोहन दास अग्रवाल ही उनके मुखर आलोचक बने हुए हैं। लगातार चौथी बार विधायक हैं तो मंत्री पद नहीं मिल पाने का मलाल होगा ही। आरएसएस से तो पुराना नाता है पर सियासत में उन्हें योगी आदित्यनाथ ही 1998 के अपने पहले लोकसभा चुनाव में लाए थे।

योगी गोरखपुर से लगातार पांच बार सांसद रहे हैं। उनसे पहले उनके गुरु महंत अवैद्यनाथ यहां से तीन बार सांसद रहे। पर वे हिंदु महासभा की तरफ से लड़ते थे। योगी आदित्यनाथ ने राधामोहन दास अग्रवाल को 2002 में पहली बार न केवल गोरखपुर शहर से हिंदु महासभा के उम्मीदवार के नाते चुनाव लड़ाया, बल्कि प्रतिष्ठा का मुद्दा बना जिताया भी था। अनबन तो दोनों के बीच 2014 से भी पहले ही शुरू हो गई थी। पर 2017 में योगी आदित्यनाथ उनका टिकट नहीं कटवा पाए थे। बहरहाल इस बार तो अग्रवाल को पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। गुनाह उनके एक ट्वीट को बताया गया है। अग्रवाल ने सूबे की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए खुद को विधायक होने पर शर्म महसूस होने की बात कही थी। इसे सरकार और संगठन की छवि धूमिल करने वाला आचरण माना है सूबेदार स्वतंत्र देव सिंह ने।

उधर योगी के चहेते गोरखपुर के पार्टी सांसद और भोजपुरी अभिनेता रविकिशन शुक्ला ने अग्रवाल को सलाह दी है कि शर्म आती है तो पार्टी और विधानसभा से इस्तीफा क्यों नहीं दे देते। एक सहायक अभियंता के तबादले को लेकर हुई है सांसद और विधायक में खटपट। अग्रवाल को छोड़ रविकिशन की लोकसभा सीट के बाकी चारों विधायक उनके साथ हैं। अग्रवाल भी इस गुटबाजी में अकेले नहीं। गोरखपुर जिले के ही दूसरे भाजपा सांसद कमलेश पासवान विधायक के समर्थन में कूद पड़े।

(प्रस्तुति : अनिल बंसल)

 

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