ताज़ा खबर
 

राजपाटः दोनों विघ्नसंतोषी

चर्चा है कि अपने विधायकों को राह पर लाने के लिए वे अध्यादेश लाने की सोच रहे हैं। पर हैरानी की बात तो यह है कि भाजपा के ज्यादातर विधायक कोरोना काल में भी मंत्रिपद की चाह छोड़ने को तैयार नहीं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पार्टी के सूबेदार बंशीधर भगत भी।

गहमागहमी के बिना सियासत सूनी लगती है। उत्तराखंड की सियासत में सूनापन कभी नहीं दिखा। कोरोना के संक्रमण के दौर में भी नहीं। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे सूबों में पार्टियां वर्चुअल (आभासी) रैलियां करें तो मकसद समझ आता है पर यही कवायद उत्तराखंड में हो तो फिलहाल फिजूल ही कही जाएगी। चुनाव 2022 में होंगे लिहाजा अभी से प्रचार की क्या तुक? छोटा सूबा अलग ठहरा। इसके बावजूद कांग्रेस और भाजपा दोनों में ही ऐसी आभासी रैलियां करने की होड़ लग गई। भाजपा की ऐसी रैलियों को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे दिग्गज संबोधित कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पार्टी के सूबेदार बंशीधर भगत भी। रही कांग्रेस की बात तो किसी बड़े नेता ने भले ऐसी रैली की जरूरत नहीं समझी हो पर सूबेदार प्रीतम सिंह और नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने आभासी रैली की होड़ को कायम रखा। इसके बाद शुरू हुआ टांग खींचने का अभियान। दोनों ने एक-दूसरे की आभासी रैलियों को नाकाम बताया। भाजपा नेताओं ने विपक्षी कांग्रेस पर कोविड-19 संबंधी नियमों का पालन न करने का आरोप अलग जड़ दिया। फिर तो कांग्रेसी भी पिल पड़े। खुलासा किया कि ज्यादातर भाजपा विधायकों ने कोरोना-नियंत्रण कोष के लिए अपने वेतन का तीस फीसद चुकाया ही नहीं जबकि कांग्रेस के विधायकों ने इसे अपना दायित्व समझ बिना देरी किए कर दिया अपना योगदान। इस आरोप से मुख्यमंत्री चौंके।

चर्चा है कि अपने विधायकों को राह पर लाने के लिए वे अध्यादेश लाने की सोच रहे हैं। पर हैरानी की बात तो यह है कि भाजपा के ज्यादातर विधायक कोरोना काल में भी मंत्रिपद की चाह छोड़ने को तैयार नहीं। उनकी लाबिंग का मुख्यमंत्री पर असर नहीं हो रहा तो न हो। इस बीच कांग्रेसियों ने एक शरारती बयान दे भाजपाई खेमे में खलबली मचाने का पैतरा चला है। उनका कहना है कि मौजूदा मुख्यमंत्री नाकाम और अलोकप्रिय साबित हुए हैं। भाजपा आलाकमान अगर पूरे पांच साल उन्हीं को मुख्यमंत्री रखे तो कांग्रेस की पौ-बारह अगले चुनाव में बिना कुछ किए ही हो जाएगी। त्रिवेंद्र सिंह रावत समर्थक इसे शेखचिल्ली का हसीन सपना बता खिल्ली उड़ा रहे हैं।
(प्रस्तुति : अनिल बंसल)

Next Stories
1 राजपाटः कौन किसका सगा
2 राजपाटः निराशा का मंजर
3 राजपाट: परेशान चौहान
दिशा रवि केस
X