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राजपाट- उलटबासी

बेशक शिक्षा जगत में इसने भूचाल ला दिया है। बुद्धिजीवी तो इस फैसले को चापलूसी की पराकाष्ठा बता रहे हैं।
Author August 28, 2017 05:24 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। फोटो सोर्स- यूट्यूब

द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण उज्जैन के संदीपनी आश्रम में गुरु दीक्षा हासिल करने गए होंगे, उस दौर में गुरु के आश्रम में गोशाला भी होने का जिक्र हर जगह मिलता है। लेकिन कलयुग में भी मध्य प्रदेश द्वापर की परंपराओं की तरफ लौटता दिख रहा है। वैसे भी तो यह प्रदेश अजब और गजब ठहरा। यहां के माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता व संचार विश्वविद्यालय ने अपने बिशनखेड़ी स्थित विशाल नए परिसर में लगभग दो एकड़ जमीन पर गोशाला बनाने का फैसला किया है। महापरिषद के इस फैसले पर हर कोई हैरान है। एक तरफ रिपोर्टिंग के आधुनिक तौरतरीकों की खोजबीन हो रही है तो दूसरी तरफ विश्वविद्यालय परिसर में गोशाला खुलेगी। कुलपति बीके कुठियाला फरमा रहे हैं कि छात्रों को गोशाला की रिपोर्टिंग भी सिखाई जाएगी। छात्रावास और परिसर के बाशिंदों को शुद्ध दूध मिलेगा। ऊपर से गोबर गैस रसोई में काम आएगी। गोशाला खोलने के अपने फैसले को कुठियाला गलत नहीं मानते। बेशक शिक्षा जगत में इसने भूचाल ला दिया है। बुद्धिजीवी तो इस फैसले को चापलूसी की पराकाष्ठा बता रहे हैं।

किसी को इसमें अनुदान हथियाने की योजना की गंध आ रही है। उधर सोशल मीडिया पर परिसर की खाली पड़ी भूमि पर पत्रकारिता के छात्रों के लिए खेती के प्रशिक्षण की व्यवस्था के सुझाव देकर तंज कसने वालों की भी कमी नहीं। छात्रों में मतभेद है। कुछ फैसले के साथ हैं तो कुछ विरोध कर रहे हैं। समर्थक कह रहे हैं कि गोशाला बनेगी, कत्लखाना तो नहीं। रही विरोधियों की बात तो वे फैसले को सियासी समझ रहे हैं। कुठियाला का बतौर कुलपति यह दूसरा कार्यकाल है। जो कुछ महीने बाद खत्म हो जाएगा। लिहाजा उनकी इस कवायद को आरएसएस के तुष्टीकरण की कोशिश के रूप में देखने वालों की भी कमी नहीं जिसकी बदौलत वे कुलपति की कुर्सी पर दो बार विराजमान हो चुके हैं तो तीसरी बार क्यों नहीं हो सकते? कांग्रेस के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी और केके मिश्रा ने तंज कसा है कि अब यह विश्वविद्यालय पत्रकार के बजाय चरवाहे पैदा करेगा। बात किसी हद तक ठीक भी है। कृषि विश्वविद्यालय होता तो बात गले उतर भी सकती थी पर पत्रकारिता के विश्वविद्यालय में गोशाला खोलना तो अटपटा लगता भी है।

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