चुनावी बेला में जाति के मुद्दों का विवाद

पिछले दिनों कांग्रेस नेता अलका लांबा शिमला आई थीं। उन्होंने केंद्रीय एजंसी द्वारा गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पकड़ी गई तीस हजार किलो हेरोइन के बाद शिमला के होटल में ठहरे दो अफगान नागरिकों की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र व राज्य की जयराम सरकार को घेरा। लांबा ने केंद्र में मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से सवाल पूछ लिए कि इन नशे के सौदागरों का हिमाचल से क्या संपर्क है।

Rajpaat, Jansatta Story
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और कांग्रेस नेता अलका लांबा।

जाति की फांस
मिहिर भोज की जाति भाजपा के गले की फांस बन गई है। नौवीं शताब्दी के सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर अपनी जाति का मानते हैं। विवाद की ताजा शुरुआत हुई 22 सितंबर को उनकी एक प्रतिमा के अनावरण को लेकर। ग्रेटर नोएडा के दादरी स्थित मिहिर भोज कॉलेज में स्थापित की गई सम्राट मिहिर भोज की 15 फुट ऊंची प्रतिमा का अनावरण किया था सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने। दादरी के विधायक तेजपाल नागर भी गुर्जर हैं। प्रतिमा के अनावरण के लिए मुख्यमंत्री का कार्यक्रम उन्होंने ही तय कराया था। अगले विधानसभा चुनाव में सियासी फायदे की गरज से। पर अनावरण से पहले ही राजपूत समाज ने यह कहकर मामले को तूल दे दिया कि सम्राट मिहिर भोज गुर्जर नहीं, क्षत्रिय थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी क्षत्रिय ठहरे। प्रतिमा के अनावरण से ठीक पहले वहां लगी शिला पर अंकित गुर्जर सम्राट मिहिर भोज में से गुर्जर शब्द पर भाजपाइयों ने पेंट कर दिया।

अनावरण समारोह में मुख्यमंत्री ने भी मिहिर भोज का उल्लेख करते समय गुर्जर सम्राट नहींं कहा। यह देख वहां मौजूद भीड़ में से कुछ लोगों ने गुर्जर सम्राट के नारे लगाए तो योगी आदित्यनाथ हकीकत भांप गए। फरमाया कि महापुरुषों को जातियों में कैद नहीं करना चाहिए। वे तो राष्ट्र नायक होते हैं। अनावरण से पहले भाजपा ने वे पोस्टर भी रातों रात हटवा दिए थे, जिन पर मिहिर भोज के नाम के साथ गुर्जर सम्राट छपा था। विवाद बढ़ा और गुर्जर बिरादरी में नाराजगी दिखी तो भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर दादरी कॉलेज पहुंचे और शिलापट्टिका पर सम्राट से पहले गुर्जर अंकित कराया।

अगले दिन गुर्जर समाज के कुछ लोगों ने पहले तो गंगाजल से प्रतिमा को धोया। फिर शिलापट्टिका पर लिखे मुख्यमंत्री और भाजपा नेताओं के नामों पर पेंट कर दिया। इस चक्कर में अब यह विवाद गुर्जर बनाम राजपूत में बदल गया है। अखिलेश यादव और मायावती को भी इस बहाने भाजपा पर वार करने का मौका मिल गया। इसी तरह का एक विवाद ग्वालियर के पास लगी मिहिर भोज की प्रतिमा को लेकर मध्यप्रदेश के हाई कोर्ट तक जा पहुंचा है। उधर नागोद (मप्र) के राजकुमार कुंवर अरुणोदय सिंह परिहार ने खुद को मिहिर भोज का वंशज और क्षत्रिय बताते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। गुर्जर स्वाभिमान बचाओ समिति का दावा है कि मिहिर भोज परिहार नहीं, गुर्जर प्रतिहार जाति के थे।

खेल में खलल
उत्तराखंड में राज्य की सरकार में शामिल कांग्रेस गोत्र के नेता अहम मंत्री बनने के बाद भी भाजपा नेतृत्व को परेशानी में डालते रहते हैं। इनमें सबसे आगे हरक सिंह रावत और यशपाल आर्य हैं। पिछले दिनों मसूरी में रावत ने अपने ही मुख्यमंत्री को लेकर कहा कि उत्तराखंड की कमान नालायकों के हाथों में है जिससे राज्य का विनाश हो रहा है। जिन युवाओं ने उत्तराखंड राज्य बनाने के लिए अपना बलिदान दिया था आज उन शहीदों की आत्मा राज्य की बागडोर नालायक नेताओं के हाथों में आने से रो रही है। भाजपा नेताओं ने हरक सिंह रावत के बयान का विरोध किया तो कांग्रेस ने रावत के बयान को मुद्दा बना दिया। मुख्यमंत्री बीते दिनों यशपाल आर्य की नाराजगी दूर करने के लिए उनके घर नाश्ते पर बिना बताए चले गए। यशपाल आर्य दलित नेता हैं। उनके भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने की चर्चा तेजी से चल रही है।

माना जा रहा है कि वे सोनिया गांधी से मुलाकात करके आए और उन्हें कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी की तरह उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाने का भरोसा दिया। जब मुख्यमंत्री धामी को यह खबर लगी तो वे समय गंवाए बिना आर्य के घर पहुंच गए और मीडिया के सामने आर्य को यह सफाई देनी पड़ी कि वे भाजपा छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं। उनके बारे में न जाने कौन अफवाह फैला रहा है। साथ ही आर्य ने यह कहकर कांग्रेस में जाने की बातों को बल दे दिया कि चुनाव के समय नेताओं का विभिन्न पार्टियों में आना-जाना लगा रहता है। अब देखना है कि आगे क्या होता है।

लांबा की लकीर
पिछले दिनों कांग्रेस नेता अलका लांबा शिमला आई थीं। उन्होंने केंद्रीय एजंसी द्वारा गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पकड़ी गई तीस हजार किलो हेरोइन के बाद शिमला के होटल में ठहरे दो अफगान नागरिकों की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र व राज्य की जयराम सरकार को घेरा। लांबा ने केंद्र में मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से सवाल पूछ लिए कि इन नशे के सौदागरों का हिमाचल से क्या संपर्क है। गुजरात से हिमाचल में नशे की खेप कैसे पहुंच रही है। भाजपा के प्रवक्ता बलदेव तोमर को पलटवार के लिया उतारा गया। उन्होंने पलटवार किया भी लेकिन न तो किसी मंत्री ने कुछ बोला और न ही प्रदेश भाजपा के किसी बड़े नेता ने कहीं जुबान खोली।

आम तौर पर प्रदेश अध्यक्षों पर ऐसे हमले के बाद किसी भी पार्टी के लोग सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में कहा जाने लगा है कि प्रदेश में भाजपा में नड्डा का कोई बड़ा भक्त ही नहीं है। जबकि दूसरी ओर अनुराग ठाकुर के खिलाफ कोई कुछ बोले तो इससे जयराम ठाकुर को राजनीतिक लाभ मिलता है। ऐसे में अलका लांबा उपचुनावों से पहले भाजपा में खलबली तो मचा ही गई हैं। अब यह प्रदेश के कांग्रेसियों को देखना है कि वह लांबा की खींची इस लकीर को कितना आगे तक ले जा सकते हैं।
(संकलन : मृणाल वल्लरी)

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