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राजपाटः दीदी के तेवर

ममता बनर्जी को उनके सूबे में उनके समर्थक बंगाल की शेरनी कहते हैं। जुझारू हैं भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री। एक बार फिर भाजपा और आरएसएस से दो-दो हाथ करने के मूड में आ गई हैं।

Author March 10, 2018 01:55 am
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ( फाइल फोटो)

ममता बनर्जी को उनके सूबे में उनके समर्थक बंगाल की शेरनी कहते हैं। जुझारू हैं भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री। एक बार फिर भाजपा और आरएसएस से दो-दो हाथ करने के मूड में आ गई हैं। त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति तोड़ने की वारदात के बहाने ममता ने इन दोनों पर तीखा हमला तो बोला ही, अपने सूबे में दंगा भड़काने की साजिश का आरोप भी जड़ दिया। यों वे लेनिन की समर्थक नहीं हैं। लेनिन ठहरे वामपंथी। वामपंथियों के दुर्ग को ध्वस्त करके ही तो सत्ता में आ पार्इं ममता। लेकिन प्रतिमा गिराने की घटना पर तो विरोध जताना ही था। यहां तक आशंका जता दी कि अब अलगाववाद की राजनीति गांधी, सुभाष और विवेकानंद की प्रतिमाओं को भी बना सकती हैं अपना निशाना। भाजपा को नसीहत भी दे डाली कि त्रिपुरा के विकास पर ध्यान देने के बजाए हिंसा की सियासत को बढ़ा रहे हैं भाजपाई। कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को तोड़ने की वारदात हुई तो तमाशबीन नहीं रही ममता सरकार। मुखर्जी ही थे जनसंघ के पहले अध्यक्ष।

सरकार हरकत में आई और सबसे पहले निगम कर्मचारियों से प्रतिमा के चेहरे पर पुती कालिख साफ कराई। अपने खर्चे पर प्रतिमा की मरम्मत कराने का बयान भी तपाक से दे दिया सरकार ने। ममता पहले भी लगा चुकी हैं भाजपा और उससे जुड़े संगठनों पर सूबे में दंगे भड़काने की कोशिश का आरोप। झारग्राम की प्रशासनिक बैठक में ममता ने कहा था कि भाजपा और उसके लोग नई साजिश लेकर आए हैं। कुछ लोगों को पैसे बांट रहे हैं। मंदिरों और मस्जिदों में मांस फिकवाने के चक्कर में हैं। ममता ने तो भविष्य की आशंका भी पहले ही जता दी कि रामनवमी पर भी कर सकते हैं सांप्रदायिक संगठन ऐसी नापाक हरकत। ऊपर से धमकी अलग दी है कि कड़ाई से निपटेंगी वे ऐसे तत्त्वों से।

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