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भाजपा का संघीकरण करना है अमित शाह का एजंडा। कम से कम राजस्थान में तो यही है उनका इरादा। तभी तो संघ के पूर्णकालिक प्रचारकों की तर्ज पर भाजपा में भी विस्तारक योजना लागू कर दी है।

Author July 3, 2017 03:36 am
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह (पीटीआई)

भाजपा का संघीकरण करना है अमित शाह का एजंडा। कम से कम राजस्थान में तो यही है उनका इरादा। तभी तो संघ के पूर्णकालिक प्रचारकों की तर्ज पर भाजपा में भी विस्तारक योजना लागू कर दी है। विधानसभा टिकट के दावेदारों की राह इससे और मुश्किल हुई है। बड़े नेताओं के साथ-साथ अब इन विस्तारकों की भी करनी पड़ेगी जी हजूरी। विस्तारकों को पार्टी में तैनाती से पहले आरएसएस के प्रचारकों से बाकायदा प्रशिक्षण दिलाया गया है। नई व्यवस्था में आला कमान का दखल बढ़ेगा। क्षत्रपों को कुछ समझ नहीं आ रहा। टिकट बंटवारे में विस्तारकों की राय को आधार बनाएगा आला कमान। पर ये विस्तारक खुद चुनाव लड़ने की हसरत नहीं पालेंगे। तभी तो दूसरे इलाकों में तैनात करने की रणनीति अपनाई है अमित शाह ने। विस्तारकों को राष्ट्रीय संगठन मंत्री वी सतीश और शिव प्रकाश भी ज्ञान देते रहेंगे। पुराने नेता कैसे पचा सकते हैं इस नई संस्कृति को। सो अभी से सूबेदार के पास कर रहे हैं विस्तारकों की शिकायत। यह बात अलग है कि सूबेदार अशोक परनामी तो खुद को पहले से ही बौना मान बैठे हैं। वे क्या बिगाड़ेंगे विस्तारकों का।

असमंजस लगातार बरकरार है मध्यप्रदेश के जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा के सियासी भविष्य को लेकर। अब तो हाईकोर्ट ने भी इनकार कर दिया है चुनाव के आदेश पर रोक लगाने से। आयोग ने उनके चुनाव लड़ने पर तीन साल का प्रतिबंध लगाया है। इसी फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ में फरियाद की थी मिश्रा ने। लेकिन अदालत ने तत्काल रोक से इनकार करते हुए चुनाव आयोग का जवाब आने तक इंतजार करने की सलाह दे डाली। पांच जुलाई तक मांगा है आयोग से अदालत ने जवाब। 2008 के विधानसभा चुनाव को पेड न्यूज और तय सीमा से ज्यादा खर्च कर जीतने का आरोप लगाया था नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले कांग्रेसी उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने। फैसला सुनाने में आयोग ने आठ साल लगा दिए। जबकि इस बीच 2013 का विधानसभा चुनाव भी हो गया और उसमें भी जीत दर्ज कर मंत्री बने हैं मिश्रा।

भारती चाहते हैं कि मिश्रा तत्काल विधानसभा और मंत्री पद से इस्तीफा दें। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी तो विधानसभा का बचा कार्यकाल पूरा कर पाएंगे मिश्रा। सो चौकस हाईकोर्ट में भारती भी हैं। एक तरफ अदालती मशक्कत चल रही है तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने अपने आदेश को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित करने के लिए भेज दिया है। राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष दोनों को भी दी गई है इस आदेश की जानकारी। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष सीता शरण शर्मा ने गेंद राजभवन के पाले में डाल दी है। राज्यपाल ओपी कोहली अभी चुप्पी साधे हैं। फिलहाल तो बेचारे मिश्रा को चिंता राष्ट्रपति चुनाव की है। हाईकोर्ट ने आयोग के फैसले पर रोक न लगाई तो शायद ही कर पाएंगे वे राष्ट्रपति चुनाव में मतदान। रही विधानसभा सचिवालय की बात तो वह अभी चुनाव आयोग से आने वाली राष्ट्रपति चुनाव की संशोधित मतदाता सूची का इंतजार कर रहा है।

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