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राजपाठः सियासी पैंतरा

अखिलेश यादव सक्रिय हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार छह महीने से ज्यादा कार्यकाल पूरा कर चुकी है।

Author October 30, 2017 1:49 AM
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।

अखिलेश यादव सक्रिय हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार छह महीने से ज्यादा कार्यकाल पूरा कर चुकी है। अभी तक खास छाप नहीं छोड़ पाई। अलबत्ता अखिलेश ने अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यों की दुहाई देने का अभियान छेड़ दिया है। आगरा से लखनऊ तक के जिस एक्सप्रेसवे के निर्माण में भ्रष्टाचार की दुहाई दे योगी सरकार ने जांच बिठाई थी, उसी के पिछले दिनों खूब चर्चे हुए, जब वायुसेना के लड़ाकू विमानों को इस सड़क पर भारी लड़ाकू विमानों की लैंडिंग कराई गई। फिर तो केंद्र सरकार की इस्पात कंपनी सेल ने भी श्रेय ले लिया कि उसका विशेष ताकत वाला हजारों टन स्टील लगा था इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में। जहां तक दूसरी विकास परियोजनाओं का सवाल है, अभी सब कुछ हवा-हवाई है। या यों कहें कि कुछ निर्णायक हो ही नहीं रहा है। कई बड़े प्रशासनिक पदों पर महीनों से तैनातियां नहीं हो पाई हैं तो एक भी विकास प्राधिकरण अभी तक कोई नई आवासीय योजना गरीबों के लिए लांच नहीं कर पाया। इसके उलट अखिलेश यादव ने सूबे के दौरे शुरू कर दिए हैं।

मेरठ जैसे जाट बहुल इलाके में भी समाजवादी पार्टी की सक्रियता बढ़ी है। मुलायम सिंह यादव के पुराने सहयोगी राजपाल सिंह जाट को अखिलेश यादव ने सपा का जिला अध्यक्ष बना कर पुराने समाजवादियों की अहमियत पहचानी है। पाठकों को बता दें कि राममनोहर लोहिया के साथ सोशलिस्ट पार्टी की स्थापना करने वालों में मेरठ के जाट महाराज सिंह भारती भी थे, जो पहले एमएलसी रहे और फिर 1967 में लोकसभा चुनाव जीते थे। मुलायम सिंह यादव को विधानसभा का पहली बार पार्टी टिकट इटावा के कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया के विरोध के बावजूद उन्होंने ही दिया था। उनकी जयंती के अवसर पर एक नवंबर को मेरठ में पुराने समाजवादियों का जमावड़ा होगा। राजपाल सिंह और गोपाल अग्रवाल ने मेरठ कालेज में लोकतंत्र की चुनौतियां विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया है।

भारती के बहाने खांटी समाजवादी और जाट नेता राजेंद्र चौधरी भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों पर प्रहार करेंगे। अजित सिंह के गढ़ के ढह जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों में भाजपा ने पैठ बनाई थी। लेकिन आरक्षण के सवाल पर जाट अब भाजपा से रूठ रहे हैं। ऐसे में राजेंद्र चौधरी और राजपाल सिंह ने खांटी जाट नेता महाराज सिंह भारती के बहाने जाटों को सपा से जोड़ने का दांव चला है।

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