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जब नरेंद्र मोदी से पटती थी, तब अटल-आडवाणी पर हमला बोला करते थे प्रवीण तोगड़िया

कभी विहिप नेता तोगड़िया मोदी के बहुत खास हुआ करते थे, हिंदुत्व की राजनीति में वाजपेयी को विफल बताकर रैलियों में मोदी के नाम लेते थे..आज वही मोदी उनके निशाने पर हैं। बीजेपी का जो नेता राम मंदिर के एजेंडे से तनिक भी भटका, उसे कतई नहीं बख्शते तोगड़िया

Author नई दिल्ली | Updated: January 16, 2018 8:51 PM
कभी अटल बिहारी बाजपेयी के साथ भी प्रवीण तोगड़िया का रहा 36 का आंकड़ा

विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया की सिर्फ नरेंद्र मोदी ही नहीं, अतीत में अटल-आडवाणी की जोड़ी से भी नहीं निभी। जबकि यह जोड़ी आमतौर पर नरम मिजाज की मानी जाती थी। एनडीए सरकार के दौरान वाजपेयी से तोगड़िया का 36 का आंकड़ा रहा । कहा जाता है कि छह साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान वाजपेयी को अगर किसी ने सबसे ज्यादा निशाना साधकर परेशान किया तो वह तोगड़िया ही थे । भाजपा का जो भी शीर्ष नेता हिंदुत्व के एजेंडे से तनिक भी टस से मस हुआ, उसे तोगड़िया ने नहीं बख्शा। अटल-आडवाणी दोनों पर राम मंदिर आंदोलन से पीछा छुड़ाने की तोहमत मढ़कर जुबानी हमले करते रहे। एक बार यहां तक कह दिया कि वाजपेयी और मुलायम सिंह की विचारधारा में कोई अंतर नहीं है। फिर उन्होंने द्वापर युग के एक प्रसंग के जरिए वाजपेयी की बलराम से तुलना करते हुए कहा था कि-इस देश को बलराम जैसे नेताओं की जरूरत नहीं है, जो लड़ाई लड़ते-लड़ते भूल जाते हैं कि उन्हें करना क्या है । यही नहीं तोगड़िया ने वाजपेयी को तब राजनीति छोड़कर यात्रा पर चले जाने की सलाह दी थी और कहा था कि वह टिकट करा देंगे। बीजेपी सरकार में अटल-आडवाणी की जोड़ी पर ऐसे तमाम हमले करने के बाद तोगड़िया ने कभी सफाई भी नहीं दी, हमेशा कहते रहे कि जिस राम मंदिर की बदौलत भाजपा को सत्ता मिली, उसी एजेंडे से भटक गई है, ऐसे में भाजपा नेताओं से तो सवाल पूछा ही जाएगा। प्रवीण तोगड़िया के अतीत के बयानों को खंगालने के बाद का यह निष्कर्ष है कि भाजपा की चाहे जो सरकार रही, तोगड़िया से पटरी नहीं खाई।

देश को चाहिए शेरॉन और जॉर्ज बुश जैसे नेताः  दो अक्टूबर 2002। तब केंद्र में वाजपेयी की सरकार थी। इस दिन लखनऊ रैली में विहिप और बाजपेयी सरकार के बीच चल रही अंतरकलह खुलकर सामने आई। विहिप नेता प्रवीण तोगड़िया ने मंच से खुलकर अटल-आडवाणी की जोड़ी पर वार किए। उन्होंने कहा- ‘‘ इस देश को एरियल शेरॉन और जॉर्ज बुश जूनियर जैसे नेताओं की जरूरत है, जो आतंकवाद के खिलाफ कठोर फैसला लेते हैं। मौजूदा सरकार और नेता देश को नेतृत्व देने में विफल हैं। ” बता दें, एरियल शेरॉन इजरायल के 11 वें प्रधानमंत्री रहे, विश्व के बड़े सैन्य नेताओं में भी उनकी गिनती होती है। आतंकवाद का फन सख्ती से कुचलने के चलते शेरॉन को ‘बुलडोजर’ कहा जाता था।

उसी दौरान वरिष्ठ पत्रकार शरत प्रधान को चार मार्च 2002 को दिए एक इंटरव्यू में तोगड़िया ने आतंकवाद रोकने में बाजपेयी सरकार को पूरी तरह विफल बताया था। कहा था कि- इस सरकार में कश्मीर के रास्ते देश की संसद के दरवाजे तक आतंकवाद पहुंच गया। तोगड़िया से ठीक पहले अशोक सिंघल बाजपेयी सरकार की खूब आलोचना कर रहे थे। जब तोगड़िया से विहिप के तत्कालीन अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की ओर से बाजपेयी की आलोचना पर सवाल पूछा गया था, तब तोगड़िया ने कहा था- ‘‘दशकों से किसी पार्टी का एक समर्थक अगर आलोचना करता है तो इसे चिंता की अभिव्यक्ति माना जाना चाहिए। यह भाजपा नेताओं के आत्मनिरीक्षण का वक्त है। उम्मीद है कि भाजपा नेता जरूर आत्मनिरीक्षण करेंगे। ”

इस इंटरव्यू में तोगड़िया से शरत प्रधान ने पूछा था- क्या आप बाजपेयी और आडवाणी में मुलायम सिंह यादव की छवि देखते हैं ? इस पर उन्होंने कहा था-‘‘ हम मुलायम के साथ वाजपेयी और आडवाणी की तुलना नहीं कर सकते। लेकिन मुझे यह कहने में संकोच नहीं है कि बाजपेयी हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री के लायक काम नहीं कर रहे हैं। देश में जैसे पहले की सरकारें काम कर रहीं थीं, उसी तरह ये भी सरकार काम कर रही है। कुछ बदला नहीं है। मुस्लिम वोटों के लिए घुटने टेकना खतरनाक प्रवृत्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद से पार्टी 1993 से खुद को राम मंदिर आंदोलन से दूर कर रही है। ”

वाजपेयी फेल हुए तो जगह-जगह मोदी खड़े होंगेः 2002 में गोधरा दंगे के बाद नरेंद्र मोदी विहिप की नजरों में हीरो हुआ करते थे। लखनऊ की उस रैली में तोगड़िया ने वाजपेयी की ओर इशारा करते हुए कहा था कि- ‘‘ देश के नेता सुन लें, अगर जेहादियों के खिलाफ कठोर एक्शन नहीं लेंगे तो देश गृहयुद्ध की चपेट में आएगा। फिर जगह-जगह मोदी खड़े नजर आएंगे। ” उस वक्त मोदी के साथ तोगड़िया की ट्यूनिंग काफी अच्छी थी। हिंदुत्व को लेकर मोदी की हार्ड लाइनर छवि को तोगड़िया काफी पसंद करते थे। वह मोदी के लिए देश की हर रैली में उसी समय से माहौल भी बनाने में जुटे थे। मगर, समय का फेर देखिए, आज वही तोगड़िया केंद्र में मोदी सरकार के भी खिलाफ खड़े हैं। आरोप वही है जो वाजपेयी पर लगाते थे कि वे राम मंदिर और हिंदुत्व के एजेंडे से भटक गए है। आज दक्षिणपंथी सरकार के दौर में तोगड़िया खुद के एनकाउंटर की साजिश की बात कर रहे हैं। उनके इस बयान के सियासी गलियारे में अलग-अलग निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।
मैं चाहूं तो बन जाऊं प्रधानमंत्रीः राम मंदिर के एजेंडे को लेकर भाजपा की लुका-छिपी का खेल तोगड़िया को खलता था। इस नाते वे एक राजनीतिक दल के गठन की भी तैयारी कर रहे थे। 2004 में टीवी पत्रकार रजत शर्मा के शो आप की अदालत में एक आरोप पर उन्होंने कहा था-अगर मेरे रिमोट कंट्रोल से सारी चीजें चलतीं हैं तो मुझे देश का प्रधानमंत्री होना चाहिए, यह सौभाग्य की बात है कि मैने कभी प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहा। इस पर रजत शर्मा ने पूछा-क्या आप इलेक्शन लड़कर सरकार बनाएंगे। इस पर बोले कि हां जरूर बनाएंगे। आप देखिएगा आगे हिंदुओं की ही सरकार बनेगी। रजत ने पूछा-क्या आप पोलिटिकल पार्टी लांच करने वाले हैं। इस पर तोगड़िया ने बोले कि हमारी बनाई हुई पार्टी भी खड़ी हो जाएगी, यह सब हमें तय करना है। देखें( आप की अदालत शो का 36 वां मिनट)

कितना जाानते हैं आप तोगड़िया के बारे मेंः तोगड़िया पेशे से कैंसर सर्जन हैं, मगर विश्व हिंदू परिषद के नेता के तौर पर फुलटाइमर सक्रिय हैं। सौराष्ट्र के पटेल किसान परिवार में जन्मे तोगड़िया एक बार सोमनाथ मंदिर गए, जब मंदिर का पुनरोद्धार नहीं हुआ था। वहां विध्वंस के अवशेष देख उन्होंने देश में हिंदुत्व की लड़ाई लड़ने की सोची। 16 साल की उम्र में संघ के स्वयंसेवक बन गए। एमबीबीएस करने के बाद मास्टर ऑफ सर्जरी की भी पढ़ाई पूरी की। 1983 में 26 साल की उम्र में विहिप से जुड़े। राम मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने पर उन्हें महासचिव की बड़ी जिम्मेदारी मिली। तोगड़िया ने देश भर के तमाम डॉक्टरों को विहिप से जोड़ा है। खुद एक हफ्ते कैंसर रोगियों का इलाज करते हैं। विश्व हिंदू परिषद के करीब 50 लाख से ज्यादा सदस्य बताए जाते हैं।

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