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राजनीतिः बेरोजगारी बनाम भर्ती घोटाले

बिहार में तीसरे दर्जे की सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया में घपले के आरोप में एक आइएएस अधिकारी की गिरफ्तारी ने हंगामा मचा रखा है।

Author Updated: March 4, 2017 2:53 AM
देश में एक तरफ बेरोजगारी बढ़ रही है तो दूसरी तरफ भर्ती प्रक्रिया में तमाम गड़बड़ियां हो रही हैं। इ

देश में एक तरफ बेरोजगारी बढ़ रही है तो दूसरी तरफ भर्ती प्रक्रिया में तमाम गड़बड़ियां हो रही हैं। इससे देश का युवा वर्ग खासा नाराज है। हालत यह है कि आरक्षित पदों पर भी अब पैसे लेकर भर्ती करने की शिकायतें मिल रही हैं। भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा का प्रश्न-पत्र लीक होना पूरे देश में महामारी की तरह फैल रहा है।

बिहार में तीसरे दर्जे की सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया में घपले के आरोप में एक आइएएस अधिकारी की गिरफ्तारी ने हंगामा मचा रखा है। बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष सुधीर कुमार गिरफ्तार हो चुके हैं। एक और आइएएस सीके अनिल, जो आयोग के ओएसडी हैं, को भी पुलिस गिरफ्तार करने की प्रक्रिया में है। बिहार आइएएस एसोसिएशन और उधर विपक्ष ने हंगामा मचा रखा है। विपक्ष का आरोप है कि कई आरोपियों को पुलिस जानबूझ कर बचा रही है। इसमें बिहार सरकार के नौ मंत्री और सत्ताधारी दल से संबंधित सत्ताईस विधायक हैं। मगर मामला महज गिरफ्तारी से नहीं सुलझेगा।

यह देश की लचर होती व्यवस्था का एक नमूना है, जिसमें बढ़ती बेरोजगारी के बीच पैसे देकर नौकरियां हासिल करने का खुला खेल चल रहा है। सब कुछ जानकारी में होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती। आइएएस लॉबी इस बात से तिलमिलाई है कि आखिर व्यवस्था में वह सर्वोच्च है, देश वे चलाते हैं, नीति वे बनाते हैं, फिर उन्हें कोई हाथ कैसे डाल सकता है।
भर्ती में घोटाले को लेकर यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी देश के कई राज्यों में नियुक्तियों से संबंधित घोटाले हुए हैं। मगर व्यवस्था उसी तरीके से काम कर रही है। एक कार्रवाई के बाद भी व्यवस्था में सड़न बरकरार रहती है, भर्ती के लिए पैसे लिए जाते हैं, प्रश्न-पत्र लीक होते हैं। कई घटनाओं के सामने आने के बाद भी भर्ती में धांधलियां रोकने के लिए साफ-सुथरी व्यवस्था को सरकारों और भर्ती के लिए जिम्मेवार आयोगों ने विकसित नहीं किया। राज्य लोकसेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग घोटालों के प्रमुख केंद्र बने रहे। भर्तियों के दौरान पैसे लेकर नियुक्ति के कई मामले सामने आए।

2002 में पंजाब में एक बड़ा नियुक्ति घोटाला सामने आया था। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई में पंजाब लोकसेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष रवि सिद्धू को भर्ती के लिए पैसे लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। रवि सिद्धू की गिरफ्तारी के बाद पंजाब में लोकसेवा आयोग की भर्ती में हुए कई बड़े घोटालों का पदार्फाश हुआ। विजिलेंस ब्यूरो की जांच में पता चला कि पंजाब लोकसेवा आयोग द्वारा भरे जाने वाले हर पद की बोली लगती थी। इसमें खुद रवि सिद्धू शामिल थे। रवि सिद्धू को इस कैश फॉर जॉब स्कैम में निचली अदालत से सात साल की सजा भी हो गई। पंजाब के पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी कई बार भर्ती के दौरान घोटाले के आरोप लगे। हरियाणा लोकसभा आयोग पर तो कई गंभीर आरोप लग चुके हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला समेत कई लोगों को दिल्ली की एक अदालत ने सजा सुनाई। शिक्षक भर्ती घोटाले में पचास से ज्यादा लोगों को सजा हुई। इस भर्ती घोटाले के खुलासे के दौरान पता चला कि भर्ती के लिए चयनित उम्मीदवारों की दो सूचियां बनाई गई थीं। यही नहीं, हरियाणा के एक पूर्व संसदीय सचिव और एक पूर्व मंत्री पर नौकरी के एवज पैसे लेने के आरोप लगे। दोनों को इसी मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में जेल भी जाना पड़ा।

बिहार आइएएस एसोसिएशन को कानून पर विश्वास रखना चाहिए। वह बिहार कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष सुधीर कुमार की गिरफ्तारी का जबर्दस्त विरोध कर रहा है। एसोसिएशन की बैठक में घोटाले की जांच कर रहे विशेष जांच दल पर लगातार सवाल उठाए गए हैं। एसोसिएशन के सदस्यों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपना विरोध दर्ज कराया है। एसोसिएशन अब राष्ट्रपति से मिलने की तैयारी कर रहा है। लेकिन एसोसिएशन पारदर्शी जांच की मांग पर जोर देने के बजाय आइएएस अधिकारी की गिरफ्तारी का विरोध कर रहा है। सवाल है कि अगर विशेष जांच दल को प्रथम दृष्टया किसी आइएएस अधिकारी के खिलाफ कुछ साक्ष्य मिला है, तो क्या उसकी गिरफ्तारी न करे? आइएसएस अगर भ्रष्टाचार में लिप्त है, तो उसे कौन-सा कानून गिरफ्तारी से रोकता है? बिहार आइएएस एसोसिएशन को यह बात भी नहीं भूलनी चाहिए कि हरियाणा में शिक्षक भर्ती घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के साथ एक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी को भी अदालत ने दोषी माना था।

अगर बिहार कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष की गिरफ्तारी में विशेष जांच दल बदले की भावना से काम कर रहा है, तो इसकी जानकारी विस्तृत तरीके से एसोसिएशन दे। अगर भर्ती घोटाले की जांच कर रहा विशेष जांच दल सिर्फ आइएएस को गिरफ्तार कर अन्य प्रभावशाली लोगों को बचा रहा है, तो उसका खुलासा एसोसिएशन करे। क्योंकि बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के अंदर विपक्ष ने आरोप लगाया है कि भर्ती घोटाले में नौ मंत्री और सत्ताईस विधायक शामिल हैं। लेकिन आइएसएस सुधीर कुमार को अकेले गिरफ्तार कर विशेष जांच दल अन्य लोगों को बचा रहा है।

बिहार आइएएस एसोसिएशन भर्ती घोटाले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग कर रहा है। यही बिहार के विपक्षी दल भी चाहते हैं। एसोसिएशन का मानना है कि बिहार की आइपीएस लॉबी आइएएस लॉबी के खिलाफ बदले की भावना से काम कर रही है। वैसे आइएएस और आइपीएस के बीच टकराव लगभग हर राज्य में है। हो सकता है कि बिहार में आइपीएस अधिकारियों का एक गुट अपनी खुंदक निकाल रहा हो। लेकिन सीबीआइ जांच से मामले का हल निकल जाएगा, कहना मुश्किल है। क्योंकि अब तो सीबीआइ की जांच पर भी सवाल उठने लगे हैं। वहां भी मामलों की जांच प्रतिनियुक्ति पर गए आइपीएस करते हैं, बस संस्था पर नियंत्रण बदल जाता है। सीबीआइ के दो पूर्व निदेशक खुद ही अलग-अलग घोटालों में जांच के घेरे में आ गए हैं। ऐसे में राज्य पुलिस, विजिलेंस और सीबीआइ की जांच में अब कोई खास अंतर नहीं रहा है। प्रभावी लोग किसी भी जांच से बचने का तरीका हर जांच एजेंसी के सामने ढूंढ़ लेते हैं।

देश में एक तरफ बेरोजगारी बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ भर्ती प्रक्रिया में तमाम गड़बड़ियां हो रही हैं। इससे देश का युवा वर्ग खासा नाराज है। हालत यह है कि आरक्षित पदों पर भी अब पैसे लेकर भर्ती करने की शिकायतें मिल रही हैं। भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा का प्रश्न-पत्र लीक होना पूरे देश में महामारी की तरह फैल रहा है। हाल ही में सेना की भर्ती से संबंधित पेपर लीक का खुलासा हुआ है। इस संबंध में महाराष्ट्र और गोवा से कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग, जो किसी समय ईमानदारी से भर्ती के लिए जाना जाता था, पिछले पांच सालों में गंभीर सवालों के घेरे में आ चुका है। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की तमाम भर्तियों पर सवाल उठे हैं। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन पर भर्ती में हेराफेरी को लेकर गंभीर आरोप लगे। हाईकोर्ट ने 2015 में आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति रद्द कर दी। अनिल यादव के कार्यकाल में हजारों भर्तियां हुर्इं और हर भर्ती में गड़बड़ी के आरोप लगे।

इन परिस्थितियों में सरकार बढ़ती बेरोजगारी के बीच नौकरियों में भर्ती को पारदर्शी बनाए। कई राज्यों में सालों तक खाली पदों के लिए आवेदन नहीं मंगाए जाते हैं। फिर कई सालों पर इकट्ठे हजारों पदों के लिए आवेदन मंगवा कर घोटाले को अंजाम दिया जाता है। लोकसेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग संघ लोकसेवा आयोग की तर्ज पर नियमित रूप से हर साल खाली पदों के लिए आवेदन मंगवाए और नियमित समय सीमा के अंदर उन्हें भरने की प्रक्रिया पूरी करे। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के उपाए भी करे।

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