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अंतरिक्ष पर्यटन के खुलते रास्ते

अब इस यात्रा का आनंद लेने वाले अमीरों की दुनिया में कमी नहीं है। पर प्रश्न है कि आखिर निजी कंपनियां इस काम में इतनी रुचि क्यों ले रही हैं। इसका जवाब है, अंतरिक्ष पर्यटन से होने वाली कमाई। स्विट्जरलैंड के एक बैंक यूबीएस का अनुमान है कि 2030 तक अंतरिक्ष पर्यटन का बाजार तीन अरब डॉलर यानी दो खरब रुपए से भी ज्यादा का हो जाएगा।

सांकेतिक फोटो।

अभिषेक कुमार सिंह

मानव सभ्यता के दो बड़े सपने- अंतरिक्ष को छूना और चंद्रमा पर पदार्पण- पिछली सदी के साठ के दशक में पूरे हो गए थे। रूसी अंतरिक्ष विज्ञानी यूरी गागरिन पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने 1961 में धरती से ऊपर अंतरिक्ष कही जाने वाली सरहद को छुआ था। अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों ने अपोलो-11 यान के जरिए चंद्रमा पर 1969 में पदार्पण कर इतिहास रच दिया था। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन- आईएसएस के निर्माण, अमेरिकी अंतरिक्ष यानों (कोलंबिया, चैलेंजर आदि) की यात्राएं और मंगल पर मानव रहित यानों के पहुंचने जैसी कई नई विस्मयकारी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इन सभी घटनाओं में आम जनता का सीधा जुड़ाव नहीं रहा। मगर इक्कीसवीं सदी की शुरुआत के साथ यह सपना भी पूरा होने लगा। अब अगर किसी के पास थोड़ा पैसा हो, तो वह निजी तौर पर अंतरिक्ष में भ्रमण का अपना शौक पूरा कर सकता है।

हाल में, 20 जुलाई 2021 को, दुनिया के मशहूर कारोबारी और अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस अपनी अंतरिक्ष कंपनी ब्लू ओरिजन के यान से अंतरिक्ष को छूकर लौट आए। वह अपने साथ बयासी वर्षीय एक शख्स और अठारह वर्षीय एक युवा को भी इस यात्रा पर ले गए। इससे उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि अंतरिक्ष की सैर करना अब सच में बच्चों का खेल है। करीब डेढ़ हफ्ते के अंदर अंतरिक्ष को निजी तौर पर छूकर कामयाबी से लौट आने की यह दूसरी घटना थी।

इससे पहले 11 जुलाई, 2021 को एयरलाइंस कारोबार चलाने वाले दुनिया के एक प्रमुख व्यवसायी रिचर्ड ब्रैनसन ने अंतरिक्ष पर्यटन साकार करने में जुटी अपनी कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक के यान वीएमएम ईव से उड़ान भरी थी। यह यान उन्हें कंपनी के पांच कर्मचारियों (जिनमें से एक भारतीय मूल की महिला शिरीषा बांदला भी शामिल थीं) के साथ न्यू मैक्सिको, अमेरिका के ऊपर आकाश में करीब अस्सी किलोमीटर ऊंचाई तक ले गया था। इसके बाद उनकी धरती पर आम विमान की तरह ही सफल वापसी भी हुई। चौंतीस साल की एयरोनॉटिकल इंजीनियर शिरीषा, कल्पना चावला के बाद भारत में जन्मी दूसरी ऐसी महिला हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष छुआ है।

दावा है कि जेफ बेजोस सच में अंतरिक्ष छूकर आए हैं, क्योंकि उनसे पहले ब्रैनसन का यान जिस ऊंचाई तक गया, उसे अंतरिक्ष कहने को लेकर विवाद है। अस्सी किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण खत्म हो जाता है, भारहीनता का अनुभव होता है और इस ऊंचाई पर सामान्य विमान उड़ान नहीं भर पाते हैं। यही वजह है कि रिचर्ड ब्रैनसन की यात्रा पर जेफ बेजोस ने उन्हें बधाई देने के साथ यह तंज भी कसा था कि असली अंतरिक्ष यात्रा पर वे स्वयं जाएंगे। असल में जेफ बेजोस ने योजना बनाई थी कि उनका यान पृथ्वी की सतह के सौ किलोमीटर ऊपर उस केरमन लाइन को पार करे, जिसे अंतरिक्ष की प्रारंभिक परिधि के रूप में ज्यादा मान्यता हासिल है।

बहरहाल, अब एक अन्य चर्चित कारोबारी एलन मस्क भी सितंबर से अंतरिक्ष पर्यटन के निजी अभियान शुरू करने की तैयारियों में लगे हुए हैं। इन सारे अभियानों के मद्देनजर कहा जा सकता है कि अगले ही कुछ समय में हम सैकड़ों लोगों को अंतरिक्ष की सैर पर जाते देख सकेंगे। इस बारे में एक दावा ब्रैनसन की कंपनी वर्जिन गैलेक्टिक का है। इस कंपनी का कहना है कि अगले दो अन्य परीक्षणों के बाद 2022 से वह उन छह सौ अमीरों की अंतरिक्ष यात्रा का अभियान शुरू कर देगी, जिन्होंने प्रति सीट ढाई लाख अमेरिकी डॉलर चुका कर अपनी बुकिंग पहले से करवा रखी है। दुनिया में अरबपति अमीरों की ऐसी लंबी सूची तैयार बताई जा रही है, जो आने वाले वक्त में अंतरिक्ष कही जाने वाली सरहद को छूकर लौटना चाहते हैं।

हालांकि यह उपलब्धि काफी पहले हासिल की जा चुकी है। अंतर सिर्फ यह है कि अभी तक ऐसी सभी यात्राएं सरकारी अंतरिक्ष एजेंसियों के माध्यम से संपन्न हुई हैं। बीस साल पहले अमेरिकी पूंजीपति डेनिस टीटो को रूस ने अपने सोयूज रॉकेट से 30 अप्रैल, 2001 को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भेजा था। इस तरह डेनिस टीटो दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति बने थे, जिन्होंने पैसे खर्च करके अंतरिक्ष की यात्रा की थी। उनके बाद कई अन्य लोगों ने अंतरिक्ष की सैर के अपने सपने को ढेर सारी रकम खर्च कर साकार किया था।

इस सूची में दक्षिण अफ्रीका के मार्क शटलवर्थ (25 अप्रैल 2002), अमेरिका के ग्रेग ओल्सन (1 अक्तूबर, 2005), ईरान की अनुशेह अंसारी (18 सितंबर, 2006) और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट चार्ल्स सिमोन (7 अप्रैल, 2007) के नाम शामिल हैं, जिन्होंने धरती का वायुमंडल पार कर अंतरिक्ष के नजारे लिए थे और वहां पहुंच कर अपनी सुंदर पृथ्वी को निहारा था। हालांकि ये पहले के सारे अभियान सरकारी अंतरिक्ष एजेंसियों के सहारे हुए थे। यह भी उल्लेखनीय है कि सरकारी एजेंसियों की मदद से जो लोग अंतरिक्ष में गए, वे किसी न किसी रूप में विमानन क्षमता से लैस थे। अंतरिक्ष पर्यटन की असली शुरुआत तब मानी जा सकती है, जब निजी तौर पर ऐसे आम लोग पैसे खर्च करके जब चाहें निजी कंपनियों की मदद से अंतरिक्ष की सैर को जा सकें।

अंतरिक्ष पर्यटन की कल्पना को निजी तौर पर साकार करने का काम मोटे तौर पर 1995 में शुरू हुआ था, जब कुछ उद्योगपतियों ने इस बारे में एक प्रतियोगिता आरंभ की थी। दस लाख डॉलर की इनामी राशि वाले ‘अंसारी एक्स प्राइज’ को जीतने के लिए दुनिया भर की छब्बीस टीमों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। इन टीमों को दुबारा इस्तेमाल होने वाला एक ऐसा यान बनाना था, जिसमें तीन यात्रियों को धरती से एक सौ दस किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष की सैर पर ले जाया जा सके। यह प्रतियोगिता ‘मोजावे एयरोस्पेस वेंचर्स’ ने जीती थी।

इस टीम ने ‘स्पेसशिप वन’ और इसे अंतरिक्ष में पहुंचाने वाला रॉकेट ‘वाइट नाइट’ बनाया। प्रतियोगिता की सारी शर्तें पूरी करते हुए स्पेसशिप-वन को 4 अक्तूबर, 2004 को अंसारी एक्स प्राइज का विजेता घोषित किया गया। इसके बाद वर्ष 2015 में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष यानों के दौर के बाद अपने एक यान ‘ओरियान’ का प्रक्षेपण एलन मस्क की निजी स्पेस कंपनी ‘स्पेसएक्स’ की मदद से किया था। दिसंबर, 2015 में ‘स्पेसएक्स’ ने अमेरिका के कैप कनेवरल एयरफोर्स स्टेशन से फाल्कन-9 नाम के रॉकेट से ग्यारह उपग्रह एक साथ छोड़े थे। फाल्कन-9 ने न केवल सभी उपग्रहों को पृथ्वी से दो सौ किलोमीटर ऊपर उनकी कक्षा में सही-सलामत छोड़ा, बल्कि धरती पर सुरक्षित वापसी भी की।

इसी कंपनी ने 10 अप्रैल, 2016 में फाल्कन-9 को एक बार फिर ड्रैगन कार्गो यान को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन तक पहुंचाने के लिए छोड़ा। फाल्कन-9 इस बार भी सफल रहा। उसने ड्रैगन कार्गो यान को अंतरिक्ष में पहुंचाने के बाद अटलांटिक महासागर पर बने लैंडिंग प्लेटफार्म पर सुरक्षित वापसी की। उल्लेखनीय है कि फाल्कन-9 ने जमीन पर सीधी (वर्टिकल) लैंडिंग की, यानी इसे उतरने के लिए किसी रनवे की जरूरत नहीं। इसे किसी भी तल पर उतारा जा सकेगा। इससे यह भी साबित हुआ कि फाल्कन-9 का बार-बार इस्तेमाल हो सकता है।

अब इस यात्रा का आनंद लेने वाले अमीरों की दुनिया में कमी नहीं है। पर प्रश्न है कि आखिर निजी कंपनियां इस काम में इतनी रुचि क्यों ले रही हैं। इसका जवाब है अंतरिक्ष पर्यटन से होने वाली कमाई। स्विट्जरलैंड के एक बैंक यूबीएस का अनुमान है कि 2030 तक अंतरिक्ष पर्यटन का बाजार तीन अरब डॉलर यानी दो खरब रुपए से भी ज्यादा का हो जाएगा।

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