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तंबाकू निषेध और चुनौतियां

तंबाकू सेवन और धूम्रपान से देशभर में हर घंटे करीब डेढ़ सौ लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। वहीं दुनिया में प्रति छह सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। विकासशील देशों में हर साल आठ हजार बच्चों की मौत अभिभावकों के धूम्रपान करने की वजह से होती है। दुनिया के किसी अन्य देश के मुकाबले भारत में तंबाकू से होने वाली बीमारियों से मरने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

Author May 31, 2019 1:19 AM
एक अध्ययन के अनुसार इनक्यानवे फीसद मुंह के कैंसर तंबाकू से ही होते हैं।

धूम्रपान विश्व की बड़ी समस्या बन कर उभरा है। धूम्रपान करने वालों की संख्या करोड़ों में है जो किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। तंबाकू सेवन किस कदर घातक हो सकता है, इसका अंदाजा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की उस रिपोर्ट से लगाया जा सकता है जिसमें बताया गया है कि पिछली यानी बासवीं सदी में तंबाकू सेवन से मरने वालों की संख्या दस करोड़ से ज्यादा थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर हालात नहीं बदले तो इक्कीसवीं सदी में इससे मरने वालों का आंकड़ा एक अरब के करीब पहुंच सकता है। भारत भी इसके असर से अछूता नहीं है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया भर में धूम्रपान करने वालों की बारह फीसद आबादी भारत में हैं। हालांकि, भारत में भी सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर पाबंदी है, लेकिन लचर कानून-व्यवस्था और लोगों में जागरूकता की कमी के कारण इस पर कोई अमल नहीं हो पा रहा है।

भारत में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम को मंजूरी दी जा चुकी है। इसका मकसद तंबाकू नियंत्रण कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और तंबाकू के हानिकारक प्रभावों के बारे में लोगों तक जागरूकता फैलाना है। देश में हर साल दस लाख लोगों की मौत तंबाकू का सेवन करने से होती है। सोलह की उम्र से कम चौबीस फीसद बच्चे किसी न किसी पड़ाव पर तंबाकू का सेवन कर चुके होते हैं, जबकि चौदह फीसद अब भी तंबाकू उत्पादों का प्रयोग कर रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे, 2016 मुताबिक भारत के 44.4 फीसद पुरुष किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। करीब सात फीसद महिलाएं भी हर दिन तंबाकू का इस्तेमाल करती हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक कई देशों में तंबाकू सेवन के मामले में लड़कियों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। महिलाओं और लड़कियों में तंबाकू के प्रति बढ़ रहे शौक से गंभीर समस्या सामने आने के संकेत मिल रहे हैं। बुल्गारिया, चिली, कोलंबिया, चेक गणराज्य, मेक्सिको और न्यूजीलैंड सहित दुनिया के डेढ़ सौ से ज्यादा देशों में किए गए सर्वे के मुताबिक लड़कियों में तंबाकू सेवन की प्रवृत्ति लड़कों के मुकाबले ज्यादा बढ़ रही है।
बाजार में नशा कई रूपों में उपलब्ध है। जैसे- बीड़ी, सिगरेट, गुटका, खैनी, अफीम, गांजा, चरस, हेरोइन व अन्य नशीली दवाएं आदि। सबसे ज्यादा चिंता की बात तो यह है कि तंबाकू की गिरफ्त में देश के युवा और बच्चे तेजी से आ रहे हैं जो किसी भी देश का भविष्य होते हैं। युवाओं के इस चंगुल में फंसने के कई कारण हैं, जैसे- यार-दोस्तों की संगत, आधुनिक दिखने की चाह, फैशनेबल होने का दिखावा, बेरोजगारी या प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल रहने पर होने वाले तनाव को कम करने की कोशिश या और दूसरे कारण। लेकिन धीरे-धीरे वे इसके आदी हो जाते हैं और इसके बिना रह नहीं पाते हैं। जबकि वे भलीभांति जानते हैं कि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। फिर भी इसे लेना अपनी शान समझते हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार एक सिगरेट जिंदगी के ग्यारह मिनट व पूरा पैकेट तीन घंटे चालीस मिनट तक छीन लेता है। तंबाकू सेवन और धूम्रपान से देशभर में हर घंटे करीब डेढ़ सौ लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। वहीं दुनिया में प्रति छह सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है। विकासशील देशों में हर साल आठ हजार बच्चों की मौत अभिभावकों के धूम्रपान करने की वजह से होती है। दुनिया के किसी अन्य देश के मुकाबले में भारत में तंबाकू से होने वाली बीमारियों से मरने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक तंबाकू या सिगरेट का सेवन करने वालों को मुंह का कैंसर की होने की आशंका सामान्य व्यक्ति के मुकाबले पचास गुना ज्यादा होती है। तंबाकू में पच्चीस ऐसे तत्त्व होते हैं जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार इनक्यानवे फीसद मुंह के कैंसर तंबाकू से ही होते हैं। डब्ल्यूएचओ की घोषणा के आधार पर इस समय दुनिया में हर साल पचास लाख से अधिक व्यक्ति धूम्रपान के कारण अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। यदि इस समस्या को नियंत्रित करने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया तो वर्ष 2030 में धूम्रपान से मरने वाले व्यक्तियों की संख्या अस्सी लाख सालाना से अधिक हो जाएगी। धूम्रपान करने वालों की औसत आयु पंद्रह वर्ष कम हो रही है। आज दुनिया में कैंसर मौत का दूसरा बड़ा कारण है और धूम्रपान इस बीमारी को जन्म देने वाला एक महत्त्वपूर्ण कारक है। अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि फेंफड़े के कैंसर से ग्रस्त होने और सिगरेट का सेवन करने वाले पुरुषों में मृत्यु की संभावना सिगरेट का सेवन न करने वाले पुरुषों से तेईस गुना अधिक होती है, जबकि इस कैंसर से ग्रस्त होने की संभावना सिगरेट का सेवन करने वाली महिलाओं में सिगरेट का प्रयोग न करने वाली महिलाओं से तेरह गुना अधिक होती है। तंबाकू (सिगरेट) शरीर की कोशिकाओं को नष्ट करता है और कैंसर का कारण बनता है।

बहरहाल, दुनियाभर में तंबाकू सेवन का बढ़ता चलन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो रहा है। धूम्रपान के हानिकारक प्रभावों से केवल लोगों के स्वास्थ्य को खतरा नहीं है, बल्कि इससे भारी आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। विशेषकर यह निर्धन लोगों की निर्धनता में वृद्धि का भी बड़ा कारण है। अधिकांश देशों में धूम्रपान का सेवन धनी लोगों की अपेक्षा निर्धन लोगों में अधिक है और कुछ अवसरों पर यह भी देखने को मिलता है कि कम आय वाले लोग धूम्रपान का सेवन ज्यादा करते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दुनियाभर में तंबाकू पैदा करने के लिए करीब तियालीस लाख हेक्टेयर (एक करोड़ एकड़) जमीन इस्तेमाल हो रही है। यह स्विट्जरलैंड के क्षेत्रफल के बराबर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया के एक सौ पच्चीस देशों में तंबाकू की खेती होती है। हर साल करीब साढ़े पांच खरब सिगरेटों का उत्पादन होता है और एक अरब से ज़्यादा लोग इसका सेवन करते हैं। एक मोटे अनुमान के मुताबिक भारत में सिगरेट का उत्पादन दस अरब सालाना का है। भारत में करीब तिहत्तर लाख किलो तंबाकू की पैदावार होती है। भारत तंबाकू निर्यात के मामले में ब्राजील, चीन, अमेरिका, मलावी और इटली के बाद छठे स्थान पर है। यह भी सच है कि तंबाकू विरोधी अभियानों पर दुनिया के देश जितना खर्च करते हैं, उससे कई गुना ज्यादा तंबाकू पर टैक्स लगा कर कमाते हैं। इससे लाखों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। हालांकि अध्ययन यह भी बताते हैं कि सिगरेट का सेवन करने वाला हर व्यक्ति नशेड़ी नहीं बन जाता, लेकिन सिगरेट का सेवन करने वाले अधिकांश लोग बड़ी जल्दी नशे के आदी होने लगते हैं। वास्तव में सिगरेट नशेड़ी बनने के प्रवेश द्वार की भूमिका निभाती है। जाहिर है, सिगरेट का सस्ता होना, उस तक आसान पहुंच, कम आय वाले वर्ग एवं युवाओं में सिगरेट पीने के रुझान में वृद्धि ऐसे महत्त्वपूर्ण कारण हैं जो नशे की लत को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस आम जनमत को धूम्रपान के विनाशकारी प्रभावों से अधिक जागरूक बना कर लोगों को धूम्रपान के सेवन से बचाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण अवसर है। इस मौके पर तंबाकू से बचाव का संकल्प समाज को करना होगा।

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