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प्रणब मुखर्जी नहीं, उनके चश्मे की सिक्योरिटी को मुस्तैद किए गए थे 10 लंगूर

नवंबर 2014 में प्रणव दा की सिक्योरिटी में 10 लंगूर लगाए गए थे। इसलिए नहीं कि वह तब राष्ट्रपति थे, बल्कि उनका चश्मा सुरक्षित रहे। दरअसल, प्रणव दा तब उत्तर प्रदेश...

Author Published on: July 25, 2017 2:06 PM
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ।

राष्ट्रपति की सुरक्षा में टाइट सिक्योरिटी रहती है। राष्ट्रपति की सुरक्षा में जो जवान लगाए जाते हैं, उन्हें खास किस्म की ट्रेनिंग दी जाती है। लेकिन अगर किसी राष्ट्रपति की सुरक्षा में इंसान के बजाय लंगूर मुस्तैद किए जाएं तो। जी हां, प्रणव मुखर्जी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ था।

नवंबर 2014 में प्रणव दा की सिक्योरिटी में 10 लंगूर लगाए गए थे। इसलिए नहीं कि वह तब राष्ट्रपति थे, बल्कि उनका चश्मा सुरक्षित रहे। दरअसल, प्रणव दा तब उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृंदावन जाना चाहते थे। वहां उनकी बांके बिहारी मंदिर देखने की तमन्ना थी।

राष्ट्रपति के इस दौरे के लिए सुरक्षा के बंदोबस्त किए गए। राष्ट्रपति के सुरक्षा दस्ते के अलावा राज्य पुलिस भी तैनात की गई। लेकिन एक बड़ी चिंता थी। जानते हैं, क्या ? वह था प्रणव मुखर्जी का चश्मा। चूंकि मथुरा-वृंदावन में बंदर खूब घूमते हैं। वे लोगों की टोपी, चश्मा और बाकी सामान लेकर भाग जाते हैं। प्रणव दा को भी इसी बात का डर था।

दौरा भी करना था, लेकिन बंदरों के आतंक से प्रणव दुविधा में थे। इसके बाद विकल्प निकाला गया कि प्रणव दा की सुरक्षा में लंगूर तैनात किए जाएंगे। चूंकि बंदर लंगूर से डरते हैं, इसलिए ऐसा किया गया। मथुरा के एसएसपी मंजिल सैनी ने पोल्टू दा के चश्मे की सुरक्षा के लिए दस्ते में 10 लंगूर शामिल किए। यही नहीं, उन्होंने मंदिर के आसपास लंगूर तैनात करने को कहा।

प्रणव दा तब वृंदावन के चंद्रोदय मंदिर के गर्भगृह के शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे थे। मथुरा वृंदावन में जहां से राष्ट्रपति गुजरे थे, वहां की छतों पर लंगूर तैनात किए गए थे। इसके लिए मॉक ड्रिल भी हुई थी।

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