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गांव-गिरांवः विकास का दायरा

हालांकि, देश में ग्रामीण विकास की अनेक योजनाएं संचालित हो रही हंै, लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं है। अनुमान है कि इस बार केंद्र सरकार गांव केंद्रित बजट लाएगी।

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केंद्र सरकार अगर ग्रामीण क्षेत्र में विकास को गति दे तो सही मायने में देश का समग्र आर्थिक विकास संभव है। शहरीकरण की अंधी दौड़ और रोजगार के लिए युवाओं का शहरों की ओर पलायन से के कारण तमाम समस्याएं उभर रही हंै। खासतौर से, शहरों पर आबादी का दबाव बढ़ रहा है। यातायात प्रभावित हो रहा है। आधारभूत सुविधाएं कम पड़ती जा रही है। गांवों के पांरपरिक उद्योग नष्ट हो रहे हैं। ग्रामीण युवाओं के परंपरागत हुनर का उपयोग नहीं हो रहा है और सामाजिक ताने-बाने में बिखराव आने लगा है। असंतोष और कुंठा के चलते अपराध बढ़ रहे हैं। गांवों में सुविधाओं के अभाव में शहर में आकर अधिकांश युवा तो मजदूर बन कर रह जाते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर खास ध्यान दिया जाना जरूरी है।
हालांकि, देश में ग्रामीण विकास की अनेक योजनाएं संचालित हो रहीहैं, लेकिन नतीजा कुछ खास नहीं है। अनुमान है कि इस बार केंद्र सरकार गांव केंद्रित बजट लाएगी। मोदी सरकार बनने के बाद गांवों को गोद लेने की जो परंपरा चली है उसके नतीजे आने में समय लगेगा। मनरेगा राशि का योजनाबद्ध उपयोग हो तो गांवों की कायापलट होने में देर नहीं लगेगी।
जिस तरह के आने वाले बजट के संकेत मिल रहे हैं, आगामी बजट में केंद्र सरकार का जोर ग्रामीण क्षेत्र में विकास की गति को बढ़ाने पर रहेगा। सरकार का जोर गांवों को सड़क से जोड़ने, संचार सुविधाएं पहुंचाने, बिजली, पानी सहित ढांचागत विकास की ओर हो सकता है। केंद्र ने पिछले साल 79 हजार 526 करोड़ रुपए का प्रावधान ग्रामीण विकास के बजट में किया था। जिस तरह के बजट पूर्व संकेत मिल रहे हैं, उससे साफ लग रहा है कि सरकार आने वाले वित्तवर्ष में ग्रामीण विकास के बजट में पंद्रह से बीस प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती है। यह पैसा ढांचागत सुधार के साथ ही समग्र ग्रामीण विकास पर व्यय होगा। सरकार की मंशा है कि गांवों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना आवश्यक है। इसके लिए सबसे जरूरी बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, चिकित्सा जैसी सुविधाओं का होना है। संकेत है कि आने वाले बजट में गांवों में मकान, रोजगार, स्वरोजगार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, भूमि सुधार कार्यक्रम, खेती और पशुपालन के लिए आधारभूत सुविधाओं संबंधी कुछ बदलाव घोषित किए जा सकते हैं। इन बदलावों के संकेत पिछले दिनों प्रधानमंत्री ने दिए हैं। सरकार की मंशा ग्रामीण क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा देने की भी दिख रही है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति को तेजी मिलेगी।
एक बात साफ होने लगी है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को बढ़ाना है तो खेती की और खास ध्यान देना होगा। पिछले दो सालों से जिस तरह से मानसून धोखा दे रहा है उससे खेती और किसान प्रभावित हो रहे हंै। जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार सरकारों ने कुछ कोशिशें कीं तो हैं, लेकिन वे नाकाफी हैं। राजस्थान में जल स्वावलंबन अभियान इसका जीता-जागता उदाहरण है। गांवोें में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होने लगें तो युवाआें के पलायन को रोका जा सकता है। ग्रामीण युवा शक्ति का उपयोग गांव में ही उत्पादक कार्यों में किया जा सकता है। गांवों को सड़क मार्गों से जोड़ने और यातायात सुविधाओं के विस्तार, बिजली की नियमित आपूर्ति, पीने को स्वच्छ पानी, प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा, प्राथमिक से उच्चतर शिक्षा की गांव और गांव से निकटतम स्थान में समुचित व्यवस्था, ग्रामीण उद्योगों के लिए प्रशिक्षण और विपणन सहयोग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों तो ग्रामीण युवा शक्ति का बेहतर उपयोग हो सकता है।
सरकार को ग्रामीण विकास के लिए दो दिशाओं में ध्यान देना होगा। खेती को आसान बनाने और उससे संबंधित सुविधाओं-साधनों को विस्तारित करने की जरूरत है। गांवों से आसान पहुंच की दूरी में उद्योग, लघुउद्योग विकसित करने होंगे। ग्रामीण उत्पादों के विपणन के लिए बाजार उपलब्ध कराना होगा। इसके लिए सरकार का अपना तंत्र पहले से है। केवल इस तंत्र को सक्रिय और जवाबदेह बनाने की जरूरत है। इससे सरकार को आधारभूत सुविधाओं के अलावा अन्य राशि व्यय भी नहीं करनी पड़ेगी और उपलब्ध तंत्र की जवाबदेही तय होने से उन्हें परिणाम देना होगा। बैंकों की ऋण योजनाएं भी पहले ही से हैं। अनेक योजनाएं चल रही हंै। कृषि सहायक, पशुपालन सहायक, आंगनबाड़ी,पोषाहार, एएनएम, शिक्षा सहायक जैसी न जाने कितने तंत्र गांवों में हैं, केवल इसका समुचित उपयोग ही गांवों की तकदीर बदल सकता है। ०

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