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राजनीति: अदृश्य पदार्थ की गुत्थी

वैज्ञानिकों का मानना रहा है कि यह अदृश्य पदार्थ ही ब्रह्मांड को बांधे रखने का काम करता है, जबकि अदृश्य ऊर्जा ब्रह्मांड का लगातार विस्तार कर रही है जिसकी वजह से हर आकाशगंगा का एक-दूसरे से फासला बढ़ता जा रहा है। इसी ब्रह्मांड में ब्लैक होल भी हैं जो अपने दायरे में आने वाली हर चीज को निगल रहे हैं, यहां तक कि प्रकाश को भी।

ब्रह्मांड की फाइल फोटो।

हम संसार के हर पदार्थ (मैटर) को देख सकते हैं, छू सकते और महसूस कर सकते हैं। लेकिन ब्रह्मांड में ऐसा अदृश्य पदार्थ भी है, जिसे हम छू नहीं सकते, देख नहीं सकते। इसे डार्क मैटर कहते हैं। इस अदृश्य पदार्थ के रहस्य को समझने में वैज्ञानिक दशकों से काम कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि तीन चौथाई ब्रह्मांड इसी पदार्थ से बना है जो कहीं दिखाई नहीं पड़ता। ब्रह्मांड की अनंत आकाशगंगाओं के नब्बे फीसद से ज्यादा पदार्थों को हम अभी तक देख नहीं सके हैं। खगोलशास्त्री भी ब्रह्मांड का सिर्फ छठा हिस्सा ही देख सके हैं। वैज्ञानिक भाषा में समझें तो डार्क मैटर ऐसे पदार्थ या तत्व हैं जो न तो प्रकाश छोड़ते हैं, न सोखते हैं और न ही उसे परावर्तित करते हैं। यही कारण है कि हम इस अदृश्य पदार्थ को देख नहीं पाते।

माना जाता है कि पहले आकाशगंगाओं का भी अस्तित्व नहीं था। तेरह अरब साल पहले ब्रह्मांड में आकाशगंगाएं नहीं थीं। वैज्ञानिकों को इस तथ्य का पता भी बहुत बाद में चला कि हमारी आकाशगंगा विशालकाय है। हम कोई भी चीज सूर्य के प्रकाश से ही देखते हैं। जब आकाशगंगा थी ही नहीं तो सूर्य भी नहीं रहा होगा।

यानी आज जो दिखता है, वह पहले नहीं दिखा होगा। लेकिन जैसे ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई तो उस समय अचानक इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन की बाढ़-सी आ गई। ऐसा अनुमान है कि इन इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन के कंपन्नों से ही आकाशगंगाओं की रचना हुई। लेकिन यह पता नहीं लग पाया है कि कंपन्न आखिर क्यों और कैसे हुए होंगे।

हमारा ब्रह्मांड पदार्थ और ऊर्जा के संयोग से बना है। अगर पदार्थ और ऊर्जा की संपूर्ण मात्रा के हिसाब से देखें तो हमारा ब्रह्मांड इसका महज 1.3 फीसद है। अमेरिका के कुछ अंतरिक्ष भौतिक विज्ञानियों ने ब्रह्मांड में मौजूद पदार्थ की अब तक की सबसे सटीक गणना की है।

ब्रह्मांड में कितना पदार्थ है, इसका रहस्य सुलझाने की कोशिशें बहुत लंबे समय से चल रही हैं। पदार्थ के अलावा जो बाकी हिस्सा है, वही अदृश्य ऊर्जा है, जो एक रहस्यमयी बल है और समय के साथ ब्रह्मांड के विस्तार को गति देने के लिए जिम्मेदार भी। वैज्ञानिकों ने 1990 के दशक में इस अदृश्य ऊर्जा के बारे में सुदूर सुपरनोवा विस्फोट को देख कर अनुमान लगाया था कि इसका भी अस्तित्व है।

पदार्थ के ज्यादातर यानी लगभग अस्सी फीसद हिस्से को डार्क मैटर कहा जाता है। इसकी प्रकृति कैसी है, इस बारे में कोई जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। हालांकि माना जाता है कि इसमें कुछ ऐसे परमाणु से भी छोटे कण हो सकते हैं जो हमारे लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकते हैं।

अंतरिक्ष में कई ऐसी रहस्यमय चीजें हैं जिसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। डार्क मैटर भी इन्हीं में से है। यह खगोल विज्ञान के सबसे रहस्यमय शब्दों में से है। वैज्ञानिक इसके बारे में प्रमाणित रूप से कुछ नहीं कह सकते, फिर भी वे मानते हैं कि इसका अस्तित्व जरूर है।

डार्क मैटर शब्द का जिक्र सबसे 1932 में हुआ था। तब यह कहा गया था कि किसी आकाशगंगा में खुद को बांधे रखने के लिए जितना पदार्थ चाहिए, उसका केवल एक ही प्रतिशत उसके तारों का होता है, इसलिए बाकी डार्क मैटर होना चाहिए। लेकिन इस विषय में आगे ज्यादा कुछ काम नहीं हो सका।

ब्रह्मांड कैसे बना, इस बारे में अंतिम रूप से प्रमाणित तथ्य वैज्ञानिकों के पास नहीं हैं। भौतिक विज्ञानी बिग बैंग यानी महाविस्फोट को ब्रह्मांड का शुरुआती चरण मानते हैं। बिग बैंग के मुताबिक करीब एक सौ चालीस करोड़ साल पहले एक सूक्ष्म बिंदु में महाविस्फोट हुआ था, जिसे बिग बैंग कहा गया।

इस महाविस्फोट से बिंदु टुकड़े-टुकड़े होकर इधर-उधर छिटकने लगा। इसी से ब्रह्मांड की शुरुआत हुई। इसी से आकाशगंगाएं, तारे, ब्लैक होल, ग्रह आदि बने। लेकिन ब्रह्मांड के फैलने का सिलसिला अब भी लगातार जारी है। लगता था कि एक समय इसका फैलना बंद हो जाएगा और यह वापस एक बिंदु में समा जाएगा। लेकिन 1998 में हब्बल दूरबीन से पता चला कि ब्रह्मांड के फैलने की रफ्तार भी निरंतर बढ़ रही है।

यानी कोई बाहरी ताकत जरूर है जिसके कारण ऐसा हो रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा अदृश्य ऊर्जा यानी डार्क एनर्जी के कारण हो रहा है। यह ऊर्जा हमारे आसपास हर जगह मौजूद है, लेकिन दिखाई नहीं देती। इसे न तो मापा जा सकता है, न ही इसकी जांच कर सकते हैं, सिर्फ महसूस की जा सकती है। यह खाली जगहों पर पाई जाती है।

इस बात से तो सभी खगोल विज्ञानी सहमत हैं कि ब्रह्मांड फैल रहा है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि इसका प्रसार होता ही रहेगा। इसका ऊर्जा घनत्व इतना है कि यह प्रसार कभी न कभी रुकेगा और जब ऐसा होगा तब यह सिकुड़ना शुरू हो जाएगा।

आश्चर्य की बात तो यह है कि आज का ब्रह्मांड पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से फैल रहा है। इसलिए यह भी निश्चित है कि जितनी तेजी से यह फैल रहा है, उतनी तेजी से सिकुड़ेगा भी। इसी बात की व्याख्या करने में कई तरह के सिद्धांत सामने आए और इसके साथ डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की अवधारणा भी।

ब्रह्मांड लगातार क्यों फैल रहा है, इस रहस्य को सुलझा पाने में अभी तक के सभी खगोलीय सिद्धांत अपर्याप्त साबित हुए हैं। यहां तक कि आइंस्टीन का सिद्धांत भी इसे व्यावहारिक रूप से सिद्ध नहीं कर सका है। अगर डार्क मैटर का अस्तित्व सिद्ध हो जाता है तो अंतरिक्ष के कई रहस्य से पर्दा उठ जाएगा।

वैज्ञानिकों का मानना रहा है कि यह अदृश्य पदार्थ ही ब्रह्मांड को बांधे रखने का काम करता है, जबकि अदृश्य ऊर्जा ब्रह्मांड का लगातार विस्तार कर रही है जिसकी वजह से हर आकाशगंगा का एक-दूसरे से फासला बढ़ता जा रहा है। इसी ब्रह्मांड में ब्लैक होल भी हैं जो अपने दायरे में आने वाली हर चीज को निगल रहे हैं, यहां तक कि प्रकाश को भी।

अगर ब्लैक होल का दायरा बढ़ेगा तो ब्रह्मांड पर भी खतरा आएगा। प्रश्न यह उठता है कि अगर इस अदृश्य पदार्थ का अस्तित्व है तो फिर यह दिखाई क्यों नहीं पड़ता। कोई भी पदार्थ तभी दिखाई देता है, जब उस पर प्रकाश पड़ता है, इसमें परावर्तन की क्रिया होती है।

दरअसल, अंतरिक्ष पिंडों को वैज्ञानिक प्रकाश के माध्यम से समझते या देखते हैं। लेकिन डार्क मैटर के साथ समस्या यह है कि वह न तो प्रकाश अवशोषित करता है, न ही उत्सर्जित और परावर्तित करता है। इसमें अपवर्तन की क्रिया भी नहीं होती। अर्थात यह सामान्य पदार्थ की तरह बर्ताव ही नहीं करता है। इसलिए वैज्ञानिकों को इसे समझने में बड़ी कठिनाई आ रही है।

हर आकाशगंगा, तारे या धूल के बादल आदि जो कुछ अंतरिक्ष में दिखाई देते हैं, उससे पांच गुना मात्रा में डार्क मैटर पदार्थ मौजूद है जो दिखाई नहीं देता। यह पदार्थ हमारी आकाशगंगा मिल्की वे का भी बहुत अहम हिस्सा है। इसलिए यह वैज्ञानिकों की रुचि का बड़ा कारण बन गया है।

डार्क मैटर की इस विश्वव्यापी खोज में विशाल उपकरणों को जमीन की गहराइयों में स्थापित किया गया है जहां परमाणुओं के केंद्र से टकराने पर उन्हें पकड़ा जा सके। अभी तक ये पदार्थ पकड़ में नहीं आ सके हैं। लेकिन जिस दिन यह पकड़ में आ जाएगा उस दिन अंतरिक्ष के बहुत सारे रहस्य खुल जाएंगे।

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