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राजनीतिः रोजगार का चिंताजनक परिदृश्य

देश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करना होगा। निवेश में वृद्धि करनी होगी। नई मांग का निर्माण करना होगा। न केवल देश में मेक इन इंडिया की सफलता के लिए कौशल प्रशिक्षित युवाओं की कमी को पूरा करना होगा, बल्कि दुनिया के बाजार में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की मांग को पूरा करने के लिए कौशल प्रशिक्षण के रणनीतिक प्रयास जरूरी होंगे।

Author June 19, 2018 4:24 AM
हमें देश और दुनिया में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की बढ़ती हुई मांग पर ध्यान देना होगा।

जयंतीलाल भंडारी

हाल ही में प्रकाशित सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में देश में 1.2 करोड़ नए रोजगारों का सृजन हुआ है। लेकिन सच तो यह है कि देश में रोजगार की चिंता तेजी से बढ़ रही है। उल्लेखनीय है कि भारतीय रेलवे के द्वारा पिछले दिनों ग्रुप सी और ग्रुप डी के तहत विभिन्न नब्बे हजार नौकरियों के लिए आवेदन मंगाए गए थे। इन पदों के लिए ढाई करोड़ से ज्यादा बेरोजगारों ने आवेदन किया है। हालांकि इन पदों के लिए शैक्षिक योग्यता हाइस्कूल और आइटीआइ रखी गई है लेकिन इन पदों के लिए बीटेक, एमटेक और पीएचडी धारी युवाओं ने भी आवेदन किया है। ऐसे में, इन दिनों पूरे देश और पूरी दुनिया में रोजगार की चिंताओं पर विश्व बैंक द्वारा हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट को गंभीरतापूर्वक पढ़ा जा रहा है। दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था पर केंद्रित ‘रोजगार-विहीन विकास रिपोर्ट 2018’ में कहा गया है कि भारत में तेजी से रोजगार के दरवाजे पर दस्तक देने वाले युवाओं की संख्या को देखते हुए हर साल 81 लाख नई नौकरियां और नए रोजगार अवसर पैदा करने की जरूरत है। रोजगार के इतने अवसर और नौकरियां जुटाने के लिए भारत को अठारह फीसद विकास दर की जरूरत होगी। ऐसे में भारत में रोजगार दर बढ़ाने के लिए सार्वजनिक और निजी निवेश में भारी वृद्धि करनी होगी। विनिर्माण क्षेत्र को गतिशील करना होगा। निर्यात बढ़ाने होंगे। श्रम कौशल बढ़ाना होगा।

बेरोजगारी से संबंधित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षणों में यह तथ्य उभर कर सामने आ रहा है कि देश की जनसंख्या के करीब दस फीसद लोग पूर्ण या मौसमी बेरोजगार तथा शिक्षित या अशिक्षित बेरोजगार के रूप में दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत 2018 में दुनिया का सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाला देश दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संस्था आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओइसीडी) ने अपनी अध्ययन-रिपोर्ट में कहा है कि हालांकि भारत का जीडीपी दुनिया के अधिकतर देशों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन भारत में रोजगार-वृद्धि दर में गिरावट चिंता का विषय है। भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के श्रम ब्यूरो के सर्वे में मालूम हुआ है कि देश में बेरोजगारी-दर पिछले पांच वर्ष के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से संबद्ध शोध परियोजना ‘केएलईएमएस इंडिया’ के द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 से 2016 के बीच रोजगार में कमी आई है। खासतौर से कृषि, वानिकी, मत्स्यपालन, खनन, खाद्य उत्पादों, कपड़ा, चमड़ा और कागज उद्योग के तहत रोजगार में गिरावट आई है। इसी तरह सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के रोजगार संबंधी डाटाबेस के अनुसार, भारत में पिछले कुछ वर्षों से रोजगार सृजन की गति कम हो गई है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने भारत में रोजगार की स्थिति पर चिंता जताते हुए भारत को इसकी आर्थिक-सामाजिक चुनौतियों के प्रति आगाह किया है।

निश्चित रूप से देश में सरकारी और निजी, दोनों क्षेत्रों में नौकरियों की संख्या तेजी से नहीं बढ़ रही है। जैसे ही किसी नौकरी का विज्ञापन प्रकाशित होता है, बड़ी संख्या में युवक उसके लिए आवेदन करते हुए दिखाई देते हैं। बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ी पीड़ा का कारण यह भी है कि उन्हें विभिन्न परीक्षाओं के आवेदन भरने के लिए बड़ी फीस भी देनी होती है। इन परीक्षाओं का परिणाम कब आएगा और नियुक्ति कब दी जाएगी, इसके बारे में भी अनिश्चितता बनी रही है। युवाओं की चिंताओं को देश में रोबोट की बढ़ती हुई संख्या भी नई चुनौती का रूप देती जा रही है। इन दिनों लेखक मार्टिन फोर्ड की किताब ‘रोबोट्स का उदय: टेक्नोलॉजी और रोजगार-विहीन भविष्य के खतरे’ बड़ी गंभीरता के साथ पढ़ी जा रही है। इस चर्चित किताब में मार्टिन फोर्ड ने कहा है कि टेक्नोलॉजी के प्रतीक रोबोट आगे जाकर सामान्य तरह के रोजगार हथिया लेंगे।

यकीनन कुछ समय पहले तक कहानियों और फिल्मों में विभिन्न प्रकार के यंत्रीकृत मानव यानी रोबोट के जो दृश्य उभरा करते थे, वे अब साकार होते हुए दिखाई दे रहे हैं। स्थिति यह है कि रोबोट के कारण इक्कीसवीं सदी में वैश्वीकरण और यंत्रीकरण के विस्तार के साथ शताब्दियों से चली आ रही मनुष्य की बल और बुद्धि की श्रेष्ठता खत्म हो जाने का खतरा मंडराने लगा है। कई देशों में रोबोट जीवन और उद्योग-कारोबार का महत्त्वपूर्ण भाग बनते हुए दिखाई दे रहे हैं। कई जगह रोबोट रेस्तरां में खाना बनाने, खाना परोसने, खाने की प्लेट उठाने और प्लेट साफ करने का काम कर रहे हैं। कुछ रोबोट रिक्शा चलाते हैं और वजन उठा कर चलते भी हैं। उल्लेखनीय है कि इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा कार्यरत रोबोट जापान में हैं। जापान में इनकी संख्या करीब 3.50 लाख है, अमेरिका में 168,623 और जर्मनी में 1.75 लाख तथा चीन में एक लाख से अधिक है। रोबोट की संख्या भारत में सोलह हजार से अधिक है। वैश्विक अध्ययन-रिपोर्टें बता रही हैं कि पूरी दुनिया में रोबोट रोजगार पर असर डाल रहे हैं।

ऐसे में एशियाई विकास बैंक ने अपनी रोबोटिक्स व कृत्रिम मेधा (एआई) रिपोर्ट-2018 में कहा है कि रोबोटिक्स जैसी नई प्रौद्योगिकियों के आने से भारत सहित विकासशील देशों के श्रमिकों के रोजगार की रक्षा के लिए उचित नीति बनाया जाना जरूरी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘अब उन लोगों के समर्थन की नीतियां बनानी होंगी जो प्रौद्योगिकीय विकास में पीछे हैं और चूंकि कुछ लोग कंप्यूटर-प्रशिक्षित नहीं हैं इसलिए उनके रोजगार जा सकते हैं।’ ऐसे में नीति निर्माताओं को पर्याप्त प्रशिक्षण, शिक्षा व कौशल प्रदान करते हुए रोजगार खोने के संकट पर ध्यान देना होगा।

इस परिप्रेक्ष्य में पिछले दिनों इलेक्ट्रॉनिक व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों के संगठन ‘नैस्काम’ के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), वर्चुअल रियलिटी, रोबोटिक प्रोसेस आॅटोमेशन इंटरनेट आॅफ थिंग्स, बिग डाटा एनालिसिस, क्लाउड कंप्यूटिंग, सोशल मीडिया-मोबाइल जैसे आठ नए तकनीकी क्षेत्रों में पचपन नई भूमिकाओं में वर्ष 2020 तक नब्बे लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का जो अनुबंध किया है, उसे कारगर तरीके से कार्यान्वित करना होगा। अनुबंध के तहत दी गई समय-सीमा का ध्यान रखते हुए नैस्कॉम संगठन के द्वारा लक्ष्य के अनुरूप पहले चरण में चालीस लाख तथा दूसरे चरण में पचास लाख युवाओं को तकनीकी क्षेत्र में उद्यमिता और नौकरी की नई जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षित करना होगा। जरूरी होगा कि नैस्कॉम के द्वारा कौशल प्रशिक्षण के लिए विश्व के सबसे बेहतर कोशल प्रशिक्षकों और विषय-वस्तु मुहैया कराने वाली और वैश्विक स्तर की विभिन्न संस्थाओं से सहयोग लिया जाए।

हमें देश और दुनिया में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की बढ़ती हुई मांग पर ध्यान देना होगा। विश्व बैंक की रोजगार से संबंधित रिपोर्ट में भी कहा गया है कि अधिकतर विकसित और विकासशील देशों में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की मांग बढ़ रही है। देश में भी मेक इन इंडिया की सफलता के लिए कौशल प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत है। निश्चित रूप से देश में रोजगार अवसर बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करना होगा। निवेश में वृद्धि करनी होगी। नई मांग का निर्माण करना होगा। न केवल देश में मेक इन इंडिया की सफलता के लिए कौशल प्रशिक्षित युवाओं की कमी को पूरा करना होगा, बल्कि दुनिया के बाजार में भारत के कौशल प्रशिक्षित युवाओं की मांग को पूरा करने के लिए कौशल प्रशिक्षण के रणनीतिक प्रयास जरूरी होंगे।

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