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Rajasthan Election 2018: गहलोत या सचिन, किसे सीएम बनाएंगे राहुल? सरकार बनाने के लिए कांग्रेस ने दिया निर्दलियों को न्योता

राजस्थान में सचिन पायलट और अशोक गहलोत दोनों ही नेता खुले तौर पर सीएम पद के लिए अपनी-अपनी दावेदारी ठोकने से बच रहे हैं। लेकिन अब देखना ये है कि सीएम पद के लिए गहलोत और पायलट में से कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व किसको चुनता है। इसी बीच सरकार बनाने के लिए अशोक गहलोत ने राजस्थान में निर्दलीय नेताओं का समर्थन भी मांग लिया है।

Author Updated: December 11, 2018 3:41 PM

पांचों राज्यों में वोटों की काउंटिंग हो रही है। राजस्थान में शुरुआती बढ़त से कांग्रेस का पलड़ा भारी है। उम्मीद है कि निर्दलीयों की मदद से कांग्रेस राजस्थान की सत्ता हासिल कर सकती है। हालांकि, पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह रहेगी कि राजस्थान का ‘राज’ किसे सौंपे? राहुल गांधी के सामने युवा नेता के रूप में सचिन पायलट हैं तो अनुभवी नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत का कद भी कम नहीं है। अगर राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनती है तो दोनों नेताओं में कौन मुखिया बन सकता है, पढ़िए इस रिपोर्ट में

युवा जोश या अनुभव को वरीयता 

अशोक गहलोत कांग्रेस के काफी अनुभवी नेता हैं और पार्टी पर उनकी पकड़ काफी मजबूत है। 2008 में वे मुख्यमंत्री भी बने थे, लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव की हार ने उनका कद थोड़ा कमजोर किया है। सचिन पायलट 2009 की यूपीए सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके हैं। युवा चेहरा होने के साथ-साथ वे जोशीले और युवा नेतृत्व के रूप में काफी पसंद किए जाते हैं।

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किसका नेटवर्क कितना मजबूत

अशोक गहलोत जोधपुर संसदीय क्षेत्र से चार बार सांसद बने और केंद्र में कैबिनेट मंत्री भी बनाए गए। 1999 में पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरे और दो बार प्रदेश के मुखिया रहे। वहीं, सचिन पायलट ने 2009 में पहली बार दौसा लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ा और 76 हजार से ज्यादा वोटों से भाजपा प्रत्याशी को हराया। हालांकि, 2014 में वे अजमेर सीट से चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने राजस्थान के उपचुनावों में कांग्रेस को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

राहुल का सच्चा सिपाही कौन?

राजस्थान विधानसभा के चुनावी रण में गहलोत ने कांग्रेस के लिए जमकर प्रचार किया। पायलट ने प्रदेश में कमजोर हो रही कांग्रेस की जड़ों को फिर से मजबूत किया। गहलोत केंद्रीय नेतृत्व के चहेते हैं तो सचिन पायलट भी छोटी उम्र में ही केंद्रीय मंत्री जैसे बड़े पद भी संभाल चुके हैं। माना जा रहा है कि राजस्थान में किंग मेकर निर्धारित करने में पायलट की भूमिका अहम रहेगी।

जनता से जुड़ाव

जोधपुर में जन्म लेने वाले अशोक गहलोत ने अपना राजनीतिक सफर भी राजस्थान में ही तय किया है। ऐसे में उनकी जन्मभूमि के साथ-साथ कर्मभूमि भी राजस्थान ही रहा। वहीं, सचिन पायलट मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से हैं। राजनीति पिता से विरासत में मिली और महज 26 साल की उम्र में सांसद भी बने। जन्मभूमि उनकी भले उत्तरप्रदेश रहा हो, लेकिन अपनी कर्मभूमि राजस्थान में वे अच्छे-खासे सक्रिय हैं

 

दोनों नेताओं ने आलाकमान पर छोड़ा फैसला 

सचिन पायलट ने रुझानों पर कहा, ‘‘अभी जो शुरुआती रुझान आए हैं, उससे स्पष्ट है कि राजस्थान में पूर्ण बहुमत के साथ कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है। तीनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार बनना तय है। पांच साल तक कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है। बीजेपी की लगातार हार मिल रही है। किसको क्या पद मिलेगा, कांग्रेस आलाकमान, राहुल जी और विधायक मिलकर चर्चा करेंगे। वहीं, अशोक गहलोत ने भी निर्दलीय नेताओं से समर्थन मांगा। उन्होंने कहा, ‘‘जनता का फैसला कांग्रेस के पक्ष में है। हमने निर्दलीयों को न्योता दे दिया है। स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भी निर्दलीय सहयोग करते हैं तो उनका स्वागत है।’’

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