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किसी दल ने नहीं दिखाया वादे पूरे करने का रास्ता

पंजाब के करीब दो करोड़ मतदाता शनिवार को 15वीं विधानसभा में बैठने वाले विधायकों का चयन करने के लिए मतदान करेंगे।

Author February 4, 2017 2:50 AM
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और आप नेता भगवंत मान। (फोटो- PTI)

संजीव शर्मा
पंजाब के करीब दो करोड़ मतदाता शनिवार को 15वीं विधानसभा में बैठने वाले विधायकों का चयन करने के लिए मतदान करेंगे। यह पहला मौका था जब न केवल समय से पहले उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा गया बल्कि चुनावी घोषणापत्र जारी करने के मामले में भी एक-दूसरे को पछाड़ने की होड़ लगी रही। आम आदमी पार्टी ऐसी पहली पार्टी है जिसने कर्मचारियों, दलितों, किसानों, युवाओं के लिए अलग-अलग करीब आधा दर्जन घोषणापत्र जारी किए। पूरे प्रचार के दौरान सभी का केंद्र बिंदु राज्य के युवा और दलित मतदाता ही रहे। साल 2012 के विधानसभा चुनाव में जहां सभी राजनीतिक दलों ने कैंसर को बडेÞ मुद्दे के रूप में उभारा था वहीं इस बार के चुनाव में यह मुद्दा चुनावी घोषणापत्रों से बाहर हो गया है। पंजाब को सर्वाधिक मुख्यमंत्री देने वाली मालवा पट्टी में राज्य विधानसभा की 69 सीटें आती हैं। इसी पट्टी में कैंसर की सर्वाधिक मार पड़ी है।

एक सर्वेक्षण के मुताबिक, पंजाब में बेरोजगार युवाओं की संख्या करीब 55 लाख है। कांग्रेस ने तो इस मामले में सभी को पछाड़ते हुए युवाओं के लिए ‘जिस दिन सौंह चुक्की, इक्क घर नूं नौकरी पक्की’ का नारा भी दिया है। शिअद ने राज्य में हर साल 20 लाख नौकरियां देने का वादा किया है। लेकिन दोनों ही दलों ने अभी तक इस बात का खुलासा नहीं किया है कि पंजाब में नौकरियां कैसे पैदा होंगी। पंजाब में पिछले एक दशक में 22,000 उद्योग या तो बंद हो चुके हैं या फिर पलायन कर चुके हैं। नए उद्योग कैसे लगेंगे, पूंजी निवेश कैसे होगा, इसका रास्ता किसी भी दल ने नहीं दिखाया है।

आॅल इंडिया इंस्टिट्यूट आॅफ मेडिकल सांइस (एम्स) की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में हर साल करीब 7500 करोड़ रुपए का नशे का कारोबार होता है और रोजाना 20 करोड़ रुपए ड्रग्स पर खर्च हो रहे हैं। चुनाव प्रचार शुरू होने से लेकर अंत तक सभी दलों ने नशे के कारोबार के लिए एक-दूसरे पर उंगली उठाते हुए जमकर कीचड़ उछाला। पिछले दस साल के दौरान पंजाब का कोई भी ऐसा दल नहीं बचा है जिसके शीर्ष नेताओं की तस्वीरें ड्रग्स माफिया के साथ सार्वजनिक नहीं हुई हों।

पंजाब में किसानों की तरफ इस समय करीब 69 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। साल 2014 में 449 किसान आत्महत्याएं कर चुके हैं। पिछले साल भी 77 किसान अपनी जान दे चुके हैं। सभी दलों ने किसानों की कर्ज माफी का वादा किया है, लेकिन यह कर्ज कैसे माफ होगा, इसके लिए पैसा किस मद से निकलेगा यह किसी ने नहीं बताया है। किसी दल ने भी चुनाव से पहले सबसे गर्म मुद्दा रहे एसवाइएल को नहीं छेड़ा, न किसी ने आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों के दर्द को जानने का प्रयास किया।

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