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रिश्तों का नया दौर और चुनौतियां

भारत के लिए बांग्लादेश इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि आज यह मुल्क तेजी से आर्थिक विकास करने वाला अहम पड़ोसी है। यह आर्थिक विकास भारत के लिए भी लाभदायक है। बांग्लादेश के आर्थिक विकास के कारण भारत में बांग्लादेश से आने वाले अवैध प्रवासियों की संख्या में कमी आई है। ये घुसपैठिए भारत और बांग्लादेश के संबंधों को खराब करने में बड़ा कारण रहे हैं।

बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के नायक शेख मुजीबुर्रहमान की जन्म शताब्दी पर प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया है। फाइल फोटो।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस हफ्ते होने वाली बांग्लादेश की यात्रा काफी अहम मानी जा रही है। बांग्लादेश की स्वतंत्रता के नायक शेख मुजीबुर्रहमान की जन्म शताब्दी पर प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया है। बांग्लादेश की आजादी के भी पचास साल पूरे हो रहे हैं। प्रधानमंत्री का बांग्लादेश दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और बांग्लादेश के अहम पड़ोसी देश म्यांमा में डेढ़ महीने पहले तख्तापलट हुआ और इन दिनों वहां सैन्य शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों का दौर जारी है। म्यांमा के इस आंतरिक घटनाक्रम से भारत और बांग्लादेश दोनों प्रभावित हैं।

भारत का पूर्वी पड़ोसी बांग्लादेश भारत अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण भी काफी अहम है। भारत के लिए बांग्लादेश उन मुल्कों में से है जो कई महत्त्वपूर्ण मौकों और मुद्दों पर भारत के साथ खड़ा रहा है। हालांकि बीते कुछ सालों में बीच-बीच में दोनों देशों के बीच तनाव भी देखने को मिलता रहा है। इसके कई कारण हैं। चीन का बांग्लादेश में प्रभाव लगातार बढ रहा है। वहीं भारत की आंतरिक राजनीति ने भी बांग्लादेश की घरेलू राजनीति को प्रभावित किया है।

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजीयन (एनआरसी) ने बांग्लादेश की परेशानियां बढ़ाई हैं। इसका प्रभाव वहां की घरेलू राजनीति पर पड़ा है। यही कारण है कि समय-समय पर बांग्लादेश भारत के साथ नाराजगी भी जताता रहा है। दरअसल इसका लाभ बांग्लादेश में मौजूद कट्टरपंथी संगठनों ने उठाने की कोशिश की और इस कारण शेख हसीना को घरेलू राजनीति में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शेख हसीना के खिलाफ जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन शुरू से मोर्चा खोले बैठे हैं।

इसमें कोई शक नहीं शेख हसीना भारत समर्थक रही हैं। वे बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में भारत की भूमिका को कभी भुला नहीं सकतीं। जमात-ए-इस्लामी और खालिदा जिया जैसे भारत विरोधियों पर सख्ती का एक कारण यह भी रहा है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि पिछले कुछ समय में शेख हसीना के आसपास चीन समर्थक समूह मजबूत होता चला गया है और बांग्लादेश के साथ चीन के रिश्तों का नया दौर शुरू हो गया। इसी के साथ चीन ने बांग्लादेश में अपना निवेश कार्यक्रम तेज करते हुए कई परियोजनाओं को शुरू कर दिया है। जाहिर है, चीन बांग्लादेश में अपने दीर्घ हितों को साधने में जुट गया है। यह भारत के लिए खतरे की घंटी है।

जब भारत में सीएए और एनआरसी को लेकर आंदोलन शुरू हुआ था तो शेख हसीना की परेशानी बढ़ने लगी थी। चीन और पाकिस्तान जैसे देशों ने इसका भी लाभ उठाने की कोशिश की। शेख हसीना ने भी क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की बात की। यही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान से संबंधों को बेहतर करने के संकेत देते हुए बीते दिसंबर में ढाका स्थिति पाकिस्तानी दूतावास के उच्चायुक्त को अपने आधिकारिक निवास पर बुलाया था। तब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने शेख हसीना को संदेश दिया था कि वे बांग्लादेश के विकास से प्रभावित हैं और अपने दूतावास के अधिकारियों को बांग्लादेश की विकास गाथा से नसीहत लेने को कहा है।

दिलचस्प बात है कि जब 2016 में 1971 के युद्ध अपराध के कई दोषियों को बांग्लादेश में फांसी चढ़ाया गया था, तब पाकिस्तान ने जोरदार विरोध किया था। लेकिन पाकिस्तान बदलती हुई परिस्थितियों को भी समझ रहा था। उसे लगा कि सीएए और एनआरसी जैसे मुद्दे से बांग्लादेश भारत से नाराज है, इसलिए मौके का लाभ उठाया जाए। हालांकि बांग्लादेश ने यह स्पष्ट किया है कि 1971 से पहले बंगालियों पर पाकिस्तानी हुक्मरानों के हुए जुल्म को वे भूल नहीं सकते हैं। आज भी बांग्लादेश से संबंध सुधारने में पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी बाधा 1971 से पहले का इतिहास है। उस दौर में बंगाली मुसलमानों पर पाकिस्तानी सेना ने भारी जुल्म ढहाए थे।

बांग्लादेश में 2019 में चुनाव हुए थे और शेख हसीना को फिर से सत्ता में पहुंची थीं। भारत के लिए शेख हसीना का जीतना राहत की बात थी, क्योंकि बांग्लादेश के चुनाव में भारत विरोधी तत्वों को बांग्लादेश की जनता ने नकार दिया था। लेकिन इसी दौर में यह खबर आई कि सिल्हट एअरपोर्ट टर्मिनल विस्तार का काम चीनी कंपनी बेजिंग अरबन कंस्ट्रक्शन ग्रुप को दे दिया गया है। वहीं, बांग्लादेश तीस्ता नदी के प्रबंधन को लेकर चीन से एक अरब डालर का कर्ज लेने को लिए बातचीत कर रहा है।

बांग्लादेश से नजदीकियां बढ़ाने के लिए चीन कई और कदम उठाए हैं। चीन ने बांग्लादेश से आयात होने वाली ज्यादातर वस्तुओं को शून्य कर समूह (जीरो टैरिफ क्लब) में डाल दिया है। इससे बांग्लादेश में किए गए निवेश का उसे अच्छा लाभ मिलेगा। चाइना टैरिफ कमिशन ने पिछले साल जून में बांग्लादेश से आने वाले सनतानवे फीसद उत्पादों पर शुल्क खत्म कर दिया था।

शेख हसीना का बांग्लादेश में सत्ता में बना रहना भारत के लिए हमेशा सुखदायी रहा है। बांग्लादेश की सत्ता में उनकी वापसी 2008 में हुई थी। यह वह समय था जब बांग्लादेश में भारत विरोधी गतिविधियां चरम पर थीं। कई कट्टरपंथी संगठन देश के भीतर भारत विरोधी गतिविधियां चला रहे थे। लेकिन शेख हसीना ने सत्ता में आने के बाद कट्टरपंथी धार्मिक संगठनों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया और भारत विरोधी जमात-ए-इस्लामी के कई नेताओं को फांसी तक पहुंचाया। जमात-ए-इस्लामी के कई नेता 1971 के बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष में युद्ध अपराध के लिए दोषी थे।

लेकिन खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के साथ इनका गठजोड़ था, इसलिए इनका कुछ नहीं बिगड़ पाया था। जमात-ए-इस्लामी और बीएनपी के गठजोड़ ने बांग्लादेश में भारतीय निवेश का हमेशा विरोध किया। इस संगठन के लोग चीन और पाकिस्तान के नजदीकी थे। शेख हसीना ने जब इन पर सख्त कार्रवाई शुरू की तो इससे पाकिस्तान खासा नाराज हो गया था।

भारत के लिए बांग्लादेश इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि आज यह मुल्क तेजी से आर्थिक विकास करने वाला अहम पड़ोसी है। यह आर्थिक विकास भारत के लिए भी लाभदायक है। बांग्लादेश के आर्थिक विकास के कारण भारत में बांग्लादेश से आने वाले अवैध प्रवासियों की संख्या में कमी आई है। ये घुसपैठिए भारत और बांग्लादेश के संबंधों को खराब करने में बड़ा कारण रहे हैं। आर्थिक विकास में बांग्लादेश पाकिस्तान को अब काफी पीछे छोड़ चुका है।

इसके आर्थिक विकास के आंकड़े दक्षिण एशियाई देशों को चौंका रहे हैं। एक वक्त था, बांग्लादेश का बजट सौ प्रतिशत कर्ज और अनुदान का होता था। आज बांग्लादेश का बजट आत्मनिर्भर है। जिस मुल्क में कभी अकाल पड़ता था, वह आज खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है। सिलेसिलाए कपड़ों के निर्यात में दुनिया में वह बड़ा मुकाम हासिल कर चुका है। बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय लगभग 1900 डालर है। ऐसे में आज भारत के लिए बांग्लादेश में निवेश के अच्छे अवसर है। इस अवसर का लाभ अगर भारत के बजाय चीन उठाता है तो यह भारतीय कूटनीति की विफलता होगी।

भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी बांग्लादेश के सहयोग के बिना सफल नहीं हो सकती है। क्षेत्रीय विकास के लिए बांग्लादेश-भूटान-इंडिया-नेपाल (बीबीआइएन) फोरम बना हुआ है। लेकिन इस फोरम की सफलता बांग्लादेश के बिना संभव नहीं है। बांग्लादेश-चीन-इंडिया-म्यांमार (बीसीआईएम) फोरम में भी बांग्लादेश की अहम भूमिका है। बिम्सटेक फोरम में भी वह सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

जिस तरह से चीन के लिए पाकिस्तान महत्त्वपूर्ण है, उसी तरह से बांग्लादेश भी महत्त्वपूर्ण है। बांग्लादेश के रास्ते वह बंगाल की खाड़ी में अपनी ताकत बढ़ाने में जुटा है। उसकी नजर बांग्लादेश के चटगांव सहित कुछ और बंदरगाहों पर भी है। सड़क मार्ग द्वारा चीन को सीधे चटगांव से जोड़ भारत की पूर्वी सीमा पर चीन ग्वादर के तर्ज पर चटगांव को विकसित करना चाहता है। ऐसे में भारतीय कूटनीति को बांग्लादेश को एकदम नए नजरिए से देखना होगा।

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