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राजनीतिः अंतरिक्ष में जीवन की खोज

जीवन पृथ्वी के अलावा कहीं और भी संभव है? इस पर कई दशकों से वैज्ञानिकों के बीच गहमागहमी चल रही है। अब पता चला है कि पृथ्वी जैसे दस और ग्रह भी हैं जहां जीवन हो सकता है।

(Nasa)

पिछले साल नासा की केपलर अंतरिक्ष दूरबीन ने सौर मंडल से बाहर एक नया ग्रह खोजा था, जो हमारी धरती के जैसा है। अपने सितारे का चक्कर काट रहा नया ग्रह जीवन की सभी परिस्थितियों व संभावनाओं को समेटे हुए है। अभी यह पता नहीं है कि वहां एलियन रह रहे हैं या नहीं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि वहां पेड़-पौधों को भेज दिया
जाए तो वे जीवित रहेंगे।

जीवन पृथ्वी के अलावा कहीं और भी संभव है? इस पर कई दशकों से वैज्ञानिकों के बीच गहमागहमी चल रही है। अब पता चला है कि पृथ्वी जैसे दस और ग्रह भी हैं जहां जीवन हो सकता है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार केपलर अंतरिक्ष टेलीस्कोप ने हमारे सौर मंडल से बाहर मौजूद 219 नए ग्रहों का पता लगाया है। केपलर मिशन ने 219 संभावित ग्रहों का एक सर्वे जारी किया है। ये सभी ग्रह हमारे सौर मंडल से बाहर हैं, जिनके बारे में आकाशगंगा को स्कैन करने के लिए 2009 में शुरू की गई अंतरिक्ष वेधशाला द्वारा पता लगाया गया था। इनमें से दस पृथ्वी के आकार के हैं। ये दसों ग्रह अपने सूर्य की परिक्रमा उतनी ही दूरी से कर रहे हैं जितनी दूरी से पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा कर रही है। इस कारण इन ग्रहों पर पानी और जीवन के अनुकूल अन्य स्थितियां हो सकती हैं।

केपलर ने 4034 संभावित ग्रहों की खोज की है जिनमें से 2335 ग्रहों को एक्सोप्लेनेट बताया है। इन दस नए ग्रहों के सामने आने के बाद आकाशगंगा के आसपास रहने योग्य क्षेत्र (हैबिटेबल जोन) में मौजूद ग्रहों की संख्या पचास हो गई है। केपलर टेलिस्कोप को ग्रहों की मौजूदगी का तब पता चला जब एक तारे की चमक में मामूली बूंदें (मिनस्क्यूल ड्रॉप्स) देखी गर्इं। ये ड्रॉप्स तब आते हैं जब एक ग्रह तारे को पार करता है, इसे ट्रांजिट कहा जाता है। ग्रहों की यह नई सूची संभावित ग्रहों का अभी तक किया गया ज्यादा पूर्ण और विस्तृत सर्वे है। टेलिस्कोप ने सिग्नस तारामंडल में डेढ़ लाख तारोें का अध्ययन किया है। वर्ष 2009 में केपलर अंतरिक्ष यान लांच किया गया था। इसका मकसद हमारी आकाशगंगा के करीबी क्षेत्र में मौजूद एक्सोप्लेनेट का पता लगाना था।

पिछले साल नासा की केपलर अंतरिक्ष दूरबीन ने सौर मंडल से बाहर एक नया ग्रह खोजा था, जो हमारी धरती के जैसा है। अपने सितारे का चक्कर काट रहा नया ग्रह जीवन की सभी परिस्थितियों व संभावनाओं को समेटे हुए है। अभी यह पता नहीं है कि वहां एलियन रह रहे हैं या नहीं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि वहां पेड़-पौधों को भेज दिया जाए तो वे वहां जीवित रहेंगे। नासा ने इस ग्रह को केपलर-452 बी नाम दिया है। यह ग्रह जी-2 जैसे सितारे की परिक्रमा कर रहा है। जी-2 तारा हमारे सूर्य का चचेरा भाई है, हालांकि वह उम्र में हमारे सूर्य से 1.5 अरब वर्ष बड़ा है। नई दुनिया में धरती के जैसे जीने की पर्याप्त परिस्थिति मौजूद है। नया ग्रह हमारी धरती से आकार में साठ प्रतिशत बड़ा है और हमसे करीब 1400 प्रकाश वर्ष दूर साग्नस तारामंडल में स्थित है। नए ग्रह की खोज के साथ ही ग्रहों की संख्या 1030 हो गई है।

नासा ने अभी तक बारह निवास-योग्य ग्रहों की खोज की है और दूसरी धरती की खोज इस दिशा में एक मील का पत्थर है। नासा के साइंस मिशन निदेशालय के सहायक प्रशासक जॉन ग्रुसफेल्ड ने कहा कि इस उत्साहवर्धक परिणाम ने हमें ‘अर्थ 2.0’ की खोज के करीब पहुंचा दिया है। केपलर-452 बी हमारी धरती से बड़ा है लेकिन 385 दिनों की इसकी कक्षा हमारी धरती की कक्षा से केवल पांच प्रतिशत ज्यादा है। नया ग्रह ऐसे क्षेत्र में है, जिसे निवास-योग्य या गोल्डीलॉक्स जोन के रूप में जाना जाता है। तारे के आसपास का यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां परिक्रमा करने वाले ग्रह की सतह पर तरल पानी काफी मात्रा में मौजूद रह सकता है।

हमारी धरती सूर्य से जितनी दूरी पर है, खोजा गया ग्रह अपने तारे से उससे पांच प्रतिशत अधिक दूरी पर स्थित है। केपलर-452, छह अरब वर्ष पुराना है अर्थात हमारे सूर्य से यह 1.5 अरब वर्ष पुराना है। नए ग्रह के तारे का तापमान सूर्य के समान है और बीस प्रतिशत ज्यादा चमकीला है। इतना ही नहीं, तारे का व्यास सूर्य के मुकाबले दस प्रतिशत बड़ा है। सबसे मजेदार यह है कि खोजे गए ग्रह ने अपने तारे के निवास-योग्य क्षेत्र में छह अरब वर्ष अर्थात हमारी धरती से ज्यादा समय गुजारा है। इससे वहां जीवन के विकास के पर्याप्त अवसर, सभी आवश्यक अवयव और परिस्थितियां मौजूद हो सकती हैं। बहरहाल, अभी इसकी छानबीन आगामी कुछ वर्षों में होगी। नासा के अनुसार नया ग्रह केप्लर 452बी पृथ्वी से इतना दूर है कि वहां पहुंचने में मानवयुक्त अंतरिक्ष यान को करीब 25 करोड़ 8 लाख साल लगेंगे, वह भी तब, जब अंतरिक्ष यान की गति करीब साठ हजार किलोमीटर प्रति घंटे की होगी। यह गति नासा के उस यान की थी जो हाल ही में प्लूटो पर गया था। मतलब अभी इंसान को दूसरी धरती को आबाद करने में काफी मशक्कत करनी होगी।

प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग कहते रहे हैं कि मानव सभ्यता को बचाने के लिए हमें अंतरिक्ष में जीवन की संभावनाओं की तलाश करनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने रूसी अरबपति यूरी मिल्नर की सहायता से 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर की लागत वाले एक दस वर्षीय अभियान की शुरुआत की है। इसे ‘बे्रकथ्रू मिशन’ नाम दिया गया है। दस वर्षों तक चलने वाले इस अभियान में पृथ्वी के करीब स्थित लाखों तारों से आने वाले सिग्नलों को सुना जाएगा। इस अभियान की कुल लागत लगभग छह अरब रुपए आएगी। इस तरह के पुराने अभियानों की तुलना में इस बार दस गुना ज्यादा आकाश को कवर किए जाने की योजना है। साथ ही पांच गुना अधिक रेडियो स्पेक्ट्रम को स्कैन किया जाएगा और यह काम सौ गुना ज्यादा तेजी से करने की योजना है। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि ‘ब्रेकथ्रू मिशन’ इस समूह के मिशन का पहला हिस्सा है। इस मिशन के दूसरे हिस्से ‘बे्रकथ्रू मैसेज’ के द्वारा एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का आयोजन किया जाएगा जिसके तहत एक ग्लोबल मैसेज तैयार किया जाएगा जो किसी समय पृथ्वेतर सभ्यता को संप्रेषित किया जाएगा।

प्रोफेसर हाकिंग के नए प्रोजेक्ट में पृथ्वी के इर्दगिर्द स्थित तारों के पास जीवन की संभावना की तलाश के लिए रेडियो तरंगों को भेजा जाएगा। इसके लिए दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली रेडियो टेलीस्कोप, ग्रीन बैंक टेलीस्कोप और पार्क्स टेलीस्कोप की मदद ली जाएगी। एक तीसरा टेलीस्कोप दूसरी दुनिया के संकेतों का पता लगाएगा। यह प्रोजेक्ट पहले की तुलना में दस गुना अधिक अंतरिक्ष क्षेत्र को कवर करेगा और पचास गुना अधिक संवेदनशील होेगा। हालांकि 1960 से ही दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय सामूहिक प्रयासों के जरिए सर्च फॉर एक्ट्राटेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस (सेटी) कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष के अन्य ग्रहों पर जीवन की तलाश में लगे हैं। इसकी शुरुआत प्रोजेक्ट ओज्मा (1960) से हुई। शुरुआती दौर में इस कार्यक्रम के तहत कुछ समय के लिए रेडियो टेलीस्कोप के जरिए रेडियो तरंगों को भेजा जाता था।

1984 में शोध को व्यापक दृष्टि देने के लिए अमेरिका में सेटी इंस्टीट्यूट स्थापित किया गया। इसमें रेडियो टेलीस्कोप के जरिए एलियंस सिग्नल को सुनने के लिए स्थायी व्यवस्था की गई। इस प्रोजेक्ट की आलोचना भी होती है कि तीस साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आज तक कोई संकेत या सिग्नल नहीं मिले हैं। अलबत्ता कुछ वैज्ञानिकों ने अगले बीस वर्षों में सफलता मिलने का अनुमान व्यक्त किया है। खगोल वैज्ञानिकों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम के अनुसार इंसान ब्रह्मांड में मौजूद ऐसे कई ग्रहों पर जिंदगी जी सकता है जो पृथ्वी से ही मिलते-जुलते हैं। नए ग्रहों की खोज से वैज्ञानिकों के हौसले काफी बढ़ गए हैं। अब अंतरिक्ष में अन्य ग्रहों पर भी जीवन की तलाश के अभियान में तेजी आएगी।

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