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राजनीतिः तकनीक ने बदल डाली दुनिया

भारत में सोशल नेटवर्क का इस्तेमाल बढ़ा है। वाट्सऐप और वाइबर जैसे ऐप ने लोगों के बात करने का पूरा तरीका ही बदल दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दुनिया में सोशल मीडिया का उपयोग करने वालों की संख्या तेरह फीसद की दर से बढ़ रही है। भारत में यह दर इकतीस फीसद है। जनवरी, 2018 तक भारत में एक व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर बिताया जाने वाला औसत समय दो घंटा छब्बीस मिनट था।

Author नई दिल्ली | Updated: January 28, 2020 3:02 AM
नायाब कृत्रिम रोबोट को सैमसंग ने तैयार किया है।

निरंकार सिंह

नई-नई तकनीकों के आविष्कारों से हमारे रहन-सहन के साथ-साथ कामकाज के तरीके भी बदल रहे हैं। अब आपके सुख-दुख के साथी बनेंगे कृत्रिम मानव रोबोट। ये देखने में बिल्कुल इंसानों की तरह होंगे। नियान नाम के इस रोबोट की खासियत होगी कि यह न सिर्फ इंसानों जैसा दिखता है, बल्कि उनकी तरह बात भी करता है। यह जज्बातों का इजहार भी बखूबी कर सकता है। अकेलेपन के शिकार लोगों के लिए यह ऐसा दोस्त साबित हो सकता है, जिससे सारी बातें कही जा सकें। इसे नई चीजें सीखने में महारत हासिल है।

साथ ही, अनुभव के आधार पर यह नए काम को और बेहतर तरीके से कर सकता है। इस नायाब कृत्रिम रोबोट को सैमसंग ने तैयार किया है। कंपनी ने नियान के छह अवतार लांच किए हैं। इनमें किसी को बैंकर, किसी को योग सिखाने वाले, तो किसी को न्यूज एंकर के रूप में। इन सबके हावभाव, चाल-ढाल और बोल-चाल का लहजा अलग-अलग है। अमेरिका के लॉस वेगास में एक इलेक्ट्रॉनिक शो के दौरान कंपनी की यूनिट स्टार लैब नियान को पहली बार दुनिया के सामने लाई है। यह मानव रोबोट नई भाव-भंगिमाएं प्रदर्शित करता है और हिंदी में भी संवाद कर सकता है।

पिछले एक दशक में लोगों की जीवन शैली में काफी बदलाव आया है। सेहत से जुड़ी जानकारी देने वाली फिटनेस और स्मार्ट वॉच लोगों की जिंदगी में जगह बना चुकी है। सेहतमंद रखने में मदद करने की क्षमता के चलते ये लोगों को पसंद आने लगीं। भविष्य में ऐसे ही और भी गैजेट्स और स्मार्ट बेल्ट बाजार में आने वाले हैं। इंटरनेट की उपलब्धता बढ़ने से गैजेटों का इस्तेमाल भी बढ़ा है। एलेक्सा और गूगल असिस्टेंट ने दफ्तरों में निजी सहायक (पीए) की जगह ले ली है। वॉयस कमांड के जरिए लोग घर के किसी भी कोने से घर के सामान को चला सकते हैं।

अमेरिका में डिजिटल होम पहले से ही इस्तेमाल हो रहे हैं। इस दशक में बिना ड्राइवर वाली कारें भी सड़कों पर उतरी हैं। टेस्ला जैसी कंपनियों की इन कारोें की बाजार में मांग है। इंटरनेट से जुड़ कर गूगल मैप और कृत्रिम मेधा का इस्तेमाल करके ये कारें लोगों को बिना किसी जोखिम के उनकी मंजिल तक पहुंचाती हैं। कई बड़ी कंपनियां इस तरह की कारें बनाने के अभियान पर जुट गई हैं। हो सकता है कि ये कारें भारत के लिए सही न हों। यहां पर इस तरह की कारों के साथ डाटा सुरक्षा से जुड़े मसले हैं। इस दशक में ड्रोन को लेकर महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है। ड्रोन कैमरे से आसमान से जमीन की तस्वीरें लेने में आसानी होती है। हवाई टैक्सी जैसे विकल्प इसके चलते ही संभव हुए हैं। इससे लोगों को यातायात जाम से निजात मिल सकती है। उबर कंपनी ने लॉस एजेंलिस, डलास और मेलबर्न में हवाई टैक्सी शुरू करने का एलान भी किया है। कंपनी ने ड्रोन टैक्सी चलाने की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। इस साल इसका परीक्षण होना है और 2023 में व्यावसायिक स्तर पर इसकी सेवाएं शुरू हो जाएंगी।

ऑनलाइन नक्शा अब हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। ओला, उबर जैसी सेवाएं गूगल मैप के जरिए काम करती हैं। इसकी मदद से बाहर से खाना तक मंगा सकना संभव हो गया है। यातायात और खाने की इन सेवाओं ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया है। मोबाइल के जरिए पैसे का लेनदेन एक समय पर बहुत ही सीमित था। लेकिन अब गूगल पे, पेटीएम और फोन पे जैसे कई ऐप आ गए हैं और जिंदगी को आसान बना दिया है। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि इससे जोखिम बढ़े हैं। भारत में इस तरह के ऐप का इस्तेमाल बढ़ने में नोटबंदी ने भी भूमिका निभाई है। लेकिन स्मार्टफोन का बढ़ता इस्तेमाल भी इसका एक अहम कारण है। पिछले एक दशक में ऑनलाइन खरीदारी बहुत तेजी से बढ़ी है।

भारत में लोगों ने किराने के सामान से लेकर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान और घर के सामान से लेकर सोना तक ऑनलाइन खरीदना शुरू कर दिया है। ऑनलाइन खरीदारी में छूट-रियायत, आसानी और समय बचने से लोगों में इसे लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में ऑनलाइन कारोबार आज एक सौ बीस अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां कृत्रिम मेधा (एआइ) आधारित ऑपरेटिव सिस्टम के लिए काम कर रही हैं। एआइ की मदद से हमारी जिंदगी में रोबोटों का इस्तेमाल दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। इसका इस्तेमाल खिलौनों में भी किया जा रहा है। रेलवे की टिकट बुकिंग, फिटनेस गजेट में भी इनका इस्तेमाल हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शेयर बाजार और कारोबार प्रबंधन में भी इनका इस्तेमाल हो सकता है। भारत में सोशल नेटवर्क का इस्तेमाल बढ़ा है। वाट्सऐप और वाइबर जैसे ऐप ने लोगों के बात करने का पूरा तरीका ही बदल दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दुनिया भर में सोशल मीडिया का उपयोग करने वालों की संख्या तेरह फीसद की दर से बढ़ रही है। भारत में ये दर इकतीस फीसद है। जनवरी, 2018 तक भारत में एक व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया पर बिताया जाने वाला औसत समय दो घंटा छब्बीस मिनट था। सोशल मीडिया इस्तेमाल के मामले में तीन घंटे सत्तावन मिनट के साथ फिलीपीन सबसे ऊपर है। जापान में ये औसत समय अड़तालीस मिनट है। ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, हैलो और शेयर चैट भी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में घुल मिल गए हैं।

पिछले दशक में टीवी का इस्तेमाल भी पूरी तरह बदल चुका है। एलसीडी, एलईडी टीवी एक स्मार्ट टीवी की तरह काम करने लगे हैं। अमेजन प्राइम, नेटफ्लिक्स और हॉट स्टार टीवी देखने के पैटर्न में बहुत बड़ा बदलाव लेकर आए हैं। क्लाउड स्टोरेज बहुत आम बन गई है। एक ड्राइव, ड्रॉप बॉक्स, गूगल फोटो स्मार्टफोन में होना आम बात है। हमारी तस्वीरें अपने आप गूगल फोटोज में सेव हो जाती हैं। कई उद्योग क्लाउड कंप्यूटरिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने इस दशक में कई सफलताएं पाई हैं। पहले ही प्रयास में मंगलयान सफल हुआ और चंद्रयान-2 भी छोड़ा गया। बड़ी संख्या में अंतरिक्ष में उपग्रह भेजे गए। अगले दशक में गगनयान और सूर्ययान की बारी है।

उद्योग जगत में रोबोट तकनीक का प्रयोग काफी बढ़ा है। सुरक्षा, बचाव और उत्पादन में बड़े पैमाने पर इनका उपयोग हो रहा है। रोबोट सोफिया ने बाजार में आते ही सनसनी पैदा कर दी थी। वह पर्सनल असिस्टेंट की तरह काम कर सकती थी और इंसान की तरह हावभाव दे सकती थी। औद्योगिक इस्तेमाल में लाए जा रहे रोबोट घरेलू इस्तेमाल के लिए भी काम आ रहे हैं। 3डी प्रिंटिंग इस दशक की एक महत्त्वपूर्ण खोज है। साउथ कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में एक ऐसी तकनीक विकसित की गई की है जो खतरे का पता लगा सकती है और मौसम के अनुसार काम कर सकती है।

ब्लॉक चेन और बिट कॉइन का इस्तेमाल बढ़ा है। तकनीकी कंपनियां आभासी मुद्रा का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में हैं। इससे दुनिया में बिट कॉइन की मांग बढ़ी है। बिट कॉइन को भारत में संचालन की इजाजत नहीं है। पिछले एक दशक में एलईडी का उपयोग काफी बढ़ा है। सीसीटीवी कैमरा निगरानी का एक बड़ा माध्यम बन गए हैं। किंडल और ई-बुक्स ने पढ़ने का तरीका बदल दिया है। आॅडियो बुक्स और पॉडकास्ट भी जानकारी पाने का महत्त्वपूर्ण साधन बन गए हैं। पिछला दशक विभिन्न तकनीकी प्रगतियों के लिए अहम रहा है। लेकिन इस विकास को बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा को मजबूत किया जाना चाहिए, वरना ये हमें खतरे में डाल सकता है।

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