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राजनीतिः क्षेत्रीय विकास की रणनीति

उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के हित में भारत-चीन के नेतृत्व में एनडीबी ने हाल में कुछ बड़े फैसले किए हैं। इस साल अगस्त में बैंक ने डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्रा में कर्ज देने का निर्णय किया है। एनडीबी के अध्यक्ष ने हाल में कहा भी था कि निकट भविष्य में इस बैंक की पचास फीसद परियोजनाओं को पैसा स्थानीय मुद्रा में दिया जाएगा। इससे अमेरिका सहित यूरोपीय देशों के समक्ष यह संदेश जाएगा कि विकासशील देश भी अपने आर्थिक हितों के लिए सक्रिय हैं।

Author Updated: October 11, 2019 2:46 AM
2013 में डरबन में पांचवें ब्रिक्स सम्मेलन में वित्त मंत्रियों की रिपोर्ट के बाद एनडीबी के गठन पर काम शुरू हुआ और 2014 में ब्राजील में छठे सम्मेलन में इसकी स्थापना के लिए सदस्य देशों ने करार पर हस्ताक्षर किए थे। इस उद्घोषणा में साफ किया गया कि यह वैश्विक स्तर के बहुपक्षीय और क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाओं के विकासात्मक कार्यों में सहयोगी और अनुपूरक का काम करेगा।

विवोक ओझा

हाल में भारत और ब्रिक्स बैंक, जिसे अब न्यू डवलपमेंट बैंक (एनडीबी) कहते हैं, की संयुक्त कार्यशाला दिल्ली में हुई थी। इसका उद्देश्य भारत के सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को एनडीबी से अधिक से अधिक जुड़ाव का अवसर देना था, ताकि विकास के लिए वित्तीय सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके। यह एक महत्त्वपूर्ण पहल इसलिए मानी जा रही है क्योंकि विकासशील देशों में विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय जरूरतों को पूरा करना जरूरी हो गया है। इसके कुछ ही समय बाद आंध्र प्रदेश की ढांचागत क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए ब्रिक्स बैंक ने चौंसठ करोड़ साठ लाख डॉलर के कर्ज को मंजूरी दी। इससे राज्य में सड़कों का जाल तैयार किया जाएगा। गौरतलब है कि वर्ष 2000 में अपनाए गए आठ सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्यों का आठवां प्रमुख लक्ष्य विकास के लिए वैश्विक साझेदारी था। वर्ष 2002 में मेक्सिको के मोंटेरी में वित्तीय सहयोग बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था। इसके बाद 2008 में कतर की राजधानी दोहा में और फिर 2015 में इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में भी विकास के लिए वित्तीय सहयोग का वैश्विक आह्वान किया गया था।

जब वर्ष 2015 में सत्रह सतत विकास लक्ष्यों वाला एजेंडा-2030 संयुक्त राष्ट्र ने अपनाया तो उसमें भी सत्रहवें लक्ष्य के रूप में लक्ष्य प्राप्ति के लिए सामूहिक साझेदारी को चुना गया था। ब्रिक्स का न्यू डवलपमेंट बैंक यानी एनडीबी विकास के लिए इसी वित्तीय सहयोग की अवधारणा पर स्थापित किया गया था और इसी पर काम भी कर रहा है। वास्तव में वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर विकास की परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए आज कई विकास बैंक और वैश्विक आर्थिक संगठन काम कर रहे हैं। इसी क्रम में उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं यानी ब्रिक्स देशों में विकास को बढ़ावा देने में एनडीबी की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो गई है।

उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के हित में भारत-चीन के नेतृत्व में एनडीबी ने हाल में कुछ बड़े फैसले किए हैं। इस साल अगस्त में बैंक ने डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्रा में कर्ज देने का निर्णय किया है। एनडीबी के अध्यक्ष ने हाल में कहा भी था कि निकट भविष्य में इस बैंक की पचास फीसद परियोजनाओं को पैसा स्थानीय मुद्रा में दिया जाएगा। इससे अमेरिका सहित यूरोपीय देशों के समक्ष यह संदेश जाएगा कि विकासशील देश भी अपने आर्थिक हितों के लिए सक्रिय हैं। इससे इन देशों की विकसित देशों से सौदेबाजी की क्षमता में भी वृद्धि होगी।

एनडीबी ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के प्रगति के संवाहक के रूप में वैश्विक पहचान कायम कर ली है। जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने ब्रिक्स को ‘ट्रिपल ए’ के साथ वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक रेटिंग दी है। इसके अलावा अगस्त, 2019 में ही एनडीबी ने कहा कि दस फीसद जीडीपी वृद्धि दर के साथ भारत पांच खरब डॉलर अर्थव्यवस्था बन सकता है। एनडीबी की स्थापना के पीछे मकसद विकासशील देशों के लिए बड़ा आर्थिक मंच तैयार करना था। वर्ष 2012 में नई दिल्ली में ब्रिक्स के चौथे शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स देशों ने विकास परियोजनाओं और ढांचागत विकास के लिए एनडीबी जैसे बैंक के गठन की संभावना पर विचार किया था। 2013 में डरबन में पांचवें ब्रिक्स सम्मेलन में वित्त मंत्रियों की रिपोर्ट के बाद एनडीबी के गठन पर काम शुरू हुआ और 2014 में ब्राजील में छठे सम्मेलन में इसकी स्थापना के लिए सदस्य देशों ने करार पर हस्ताक्षर किए थे। इस प्रकार ब्राजील उद्घोषणा के साथ ही औपचारिक और आधिकारिक स्तर पर इस बैंक के गठन की घोषणा हुई। इस उद्घोषणा में साफ किया गया कि यह वैश्विक स्तर के बहुपक्षीय और क्षेत्रीय वित्तीय संस्थाओं के विकासात्मक कार्यों में सहयोगी और अनुपूरक का काम करेगा। इस प्रकार यह विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं को प्रतिद्वंदी मानने वाला बैंक नहीं है। सात जुलाई, 2015 को रूस में ब्रिक्स के सम्मेलन में एनडीबी एक वैधानिक इकाई के रूप में अस्तित्व में आ गया था। इसका मुख्यालय चीन के औद्योगिक शहर शंघाई में रखा गया है। आज यह सौ अरब डॉलर पूंजी वाला बैंक हैं।

न्यू डवलपमेंट बैंक एक आज एक अंतराष्ट्रीय संगठन का रूप ले चुका है। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की हिस्सेदारी है। हालांकि इस बैंक की बड़ी विशेषता यह है कि इसका दायरा ब्रिक्स देशों तक ही सीमित नहीं रखा गया है। इसके संविधान में दूसरे देशों को सदस्य बनाने का भी रास्ता खुला रखा गया है। इसलिए एनडीबी के आर्टिकल आॅफ एग्रीमेंट में साफ कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश एनडीबी के सदस्य बन सकते हैं। बस शर्त यह होगी कि ब्रिक्स देशों की इस बैंक में हिस्सेदारी, मताधिकार के पचपन फीसद से कम किसी भी हाल में नहीं होगी।

इस बैंक में सभी पांचों देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका की शेयरधारिता और मताधिकार बीस फीसद है। बैंक की चौथी वार्षिक बैठक इस साल एक अप्रैल को केपटाउन में हुई थी। इसमें कहा गया कि बैंक का मुख्य उद्देश्य सतत विकास को और विकास की सतत अवसंरचना को बढ़ावा देना है। इस बैठक में यह ऐलान किया गया था कि क्रय शक्ति समता की दृष्टि से वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी वर्ष 2010 के तीस फीसद से बढ़ कर अब छत्तीस फीसद हो गई है। बैठक में एनडीबी की उपलब्धियां बताते हुए कहा गया कि 2017 के अंत तक विविध तेरह परियोजनाओं के लिए 3.4 अरब डॉलर के कर्ज दिए जा चुके हैं। इसके अगले साल यानी 2018 में सत्रह परियोजनाओं को साढ़े चार अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज दिया गया। एनडीबी अब तक कुल तीस विकास परियोजनाओं को कर्ज मंजूर कर चुका है जिसकी रकम आठ अरब डॉलर से ज्यादा बैठती है।

एनडीबी ने जो कर्ज दिए हैं उनमें साठ फीसद कर्ज नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं के लिए हैं और इसमें परिवहन, स्वच्छ ऊर्जा, जल और स्वच्छता प्रबंधन और शहरी विकास को जोड़ दिया जाए तो यह अस्सी फीसद से अधिक हो जाता है। इस प्रकार यह बैंक सतत विकास और एजेंडा-2030 के हिसाब से सत्रह सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में सक्रिय हो कर काम कर रहा है। 2018 में इस बैंक को ‘एए प्लस’ की रेटिंग भी मिल चुकी है। इस रेटिंग से बैंक की पहुंच वैश्विक पूंजी बाज़ार तक अनुकूल शर्तों के साथ हो गई है। सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बढ़ाते हुए एनडीबी ने 2019 में अपने द्वारा दिए जाने वाले कर्ज की मात्रा दोगुनी यानी सोलह अरब डॉलर करने की घोषणा भी की है।

बैंक ने चीनी इंटरबैंक बॉन्ड मार्केट से तीन अरब डॉलर मूल्य वाले बांड जारी किए है। बैंक अब दक्षिण अफ्रीका, भारत और रूस में स्थानीय मुद्रा बांड जारी करने की योजना भी बना रहा है। बैंक इक्विटी निवेश भी शुरू करने और परियोजना कोष को कार्यशील बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इस तरह के वैश्विक-क्षेत्रीय बैंक आर्तिक संकट से जूझ रहे देशों को मदद के लिहाज से भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। आज दुनिया के ज्यादातर देश मंदी का सामना कर रहे हैं। भारत में आर्थिक मंदी से निपटने के लिए निवेश और खपत बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में एनडीबी जैसे बैंक विकासशील देशों की चुनौतियों से निपटने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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