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राजनीतिः मोदी की कायल है दुनिया

मोदी न केवल राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, बल्कि एक कवि-हृदय साहित्यकार भी हैं। अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने दर्जनभर पुस्तकें लिखी हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने गुजराती भाषा में सड़सठ कविताएं लिखी थीं। उनकी इन कविताओं के माध्यम से उनके दर्शन, उनके विचार और उनकी दृष्टि का सहजता के साथ अंदाजा लगाया जा सकता है।

मोदी न केवल राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, बल्कि एक कवि-हृदय साहित्यकार भी हैं।

प्रभात झा

जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह के बाद चौथे सबसे अधिक समयावधि तक और सबसे ज्यादा समय तक गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिनका जन्म आजादी के बाद हुआ है। जबसे उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला है, देश को विकास के शिखर पर ले जाने के लिए अग्रसर हैं। उन्होंने स्वयं कहा है कि ‘मैं देश का प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि देश का प्रधान सेवक हूं’।

नरेंद्र मोदी का बचपन गुजरात के मेहसाणा जिले के वड़नगर की गलियों में बीता था। सत्रह वर्ष की आयु में सामान्यत: बच्चे अपने भविष्य के बारे में और बचपन के इस आखिरी पड़ाव का आनंद लेने के बारे में सोचते हैं, लेकिन मोदी के लिए यह अवस्था पूर्णत: अलग थी। उस आयु में उन्होंने एक असाधारण निर्णय लिया, जिसने उनका जीवन बदल दिया। उन्होंने देश भ्रमण का फैसला किया। भारत के विशाल भू-भाग में यात्राएं कीं और देश की विभिन्न संस्कृतियों को जाना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यकर्ता के रूप में उन्हें संगठन कौशल और सेवा धर्म के मर्म और महत्त्व को समझने का अवसर मिला। शिक्षा और अध्ययन को उन्होंने सदैव महत्त्वपूर्ण माना। मोदी ने 7 अक्तूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 26 मई 2014 को उनके नेतृत्व में पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिला और वे देश के पंद्रहवें प्रधानमंत्री बने। 2019 के आम चुनाव में उन्हें फिर जन समर्थन मिला और 30 मई 2019 को दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

एक प्रधानमंत्री के रूप में मोदी का राष्ट्र दर्शन और सामाजिक सरोकार अद्वितीय है। उनका चिंतन राष्ट्र चिंतन है। मई 2014 से लेकर अब तक के अपने कार्यकाल में उन्होंने जन सेवा और राष्ट्र धर्म के मानक स्थापित किए हैं। 14 अप्रैल को उन्होंने कोरोना विषाणु को लेकर राष्ट्र को संबोधित करते हुए यजुर्वेद के एक श्लोक का उल्लेख किया था- ‘वयं राष्ट्रे जागृत्य’, अर्थात हम सभी अपने राष्ट्र को शाश्वत और जागृत रखेंगे। आज यह पूरे राष्ट्र का संकल्प बन चुका है। आज कोरोना महामारी के दौर में अपेक्षाकृत कम चिकित्सा सुविधा होने के बावजूद उनके नेतृत्व में भारत विश्व में कहीं बेहतर ढंग से इस महामारी से लड़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी मानवता की सेवा में अब तक एक सौ तीन करोड़ रुपए अपने कोष से दे चुके हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान मिले सभी उपहारों की नीलामी से मिले 89.96 करोड़ रुपए कन्या केलवनी कोष में दे दिए थे। 2014 में प्रधानमंत्री का पदभार संभालने से पहले उन्होंने गुजरात सरकार के कर्मचारियों की बेटियों की पढ़ाई के लिए अपनी बचत से इक्कीस लाख रुपए दिए थे। 2015 में मिले उपहारों की नीलामी से मिले 8.35 करोड़ रुपए ‘नमामि गंगे अभियान’ को दे दिए थे। पिछले साल कुंभ मेले में स्वच्छता कर्मचारियों के कल्याण के लिए बनाए गए कोष में इक्कीस लाख रुपए दिए थे। दक्षिण कोरिया में सियोल पीस प्राइज में मिली 1.3 करोड़ की राशि स्वच्छ गंगा मिशन को समर्पित कर दी। स्मृति चिष्टनों की नीलामी से आए 3.40 करोड़ रुपए भी नमामि गंगे योजना के लिए दे दिए। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए जब पीएम केयर्स फंड की स्थापना की गई थी, तब उसमें सवा दो लाख रुपए का योगदान दिया था। पीएम केयर्स फंड का उपयोग कोरोना से और भविष्य में इस प्रकार की गंभीर चुनौतियों का शीघ्रता और तत्परता से निपटने के लिए चिकित्सीय ढांचागत सुविधाओं के निर्माण में किया जा रहा है।

आज भारत सदियों के बदलते इतिहास का साक्षी बन रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ। अदालती आदेश पर सरकार ने मंदिर निर्माण ट्रस्ट का गठन किया। पांच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने न केवल राष्ट्र को, बल्कि पूरे विश्व को संदेश दिया कि जन आस्था के सम्मान और राष्ट्र धर्म के निर्वाह में वे किसी की परवाह नहीं करते। उन्होंने विश्वास जताया कि अयोध्या में बनने वाला राममंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत का द्योतक होगा। राम मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा, शाश्वत आस्था का प्रतीक बनेगा, राष्ट्रीय भावना का प्रतीक बनेगा।

मोदी की लोकप्रियता ने जहां जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ दिया, वहीं आर्थिक सुधारों में वे पीवी नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी की सफलता से आगे निकल चुके हैं। उनके नेतृत्व में भारत ने सबसे बड़ा सत्ता परिवर्तन देखा, जिसने कांग्रेस की छह दशकों की श्रेष्ठता को अप्रासंगिक बना दिया। मोदी के परिवर्तनकारी नेतृत्व में आधुनिक, डिजिटल, भ्रष्टाचार-मुक्त, जवाबदेह और विश्वसनीय सरकार का आविर्भाव हुआ है, जहां अप्रासंगिक पुरातन प्रणालियों और नियमों को समाप्त कर दिया गया है। स्वच्छ भारत अभियान, कल्याणकारी योजनाओं, सड़कों और बंदरगाहों के निर्माण के लक्ष्य निश्चित किए गए। सैकड़ों योजनाओं और अभियानों के माध्यम से एक नए भारत का निर्माण हो रहा है। सबके साथ और विश्वास से सबका विकास हो रहा है।

मोदी न केवल राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, बल्कि एक कवि-हृदय साहित्यकार भी हैं। अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उन्होंने दर्जनभर पुस्तकें लिखी हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने गुजराती भाषा में सड़सठ कविताएं लिखी थीं। उनकी इन कविताओं के माध्यम से उनके दर्शन, उनके विचार और उनकी दृष्टि का सहजता के साथ अंदाजा लगाया जा सकता है। हिंदी में उनका एक कविता संग्रह है- ‘साक्षी भाव’, जिसमें जगतजननी मां से संवाद रूप में व्यक्त उनके मनोभावों का संकलन है, जिसमें उनकी अंतर्दृष्टि, संवेदना, कर्मठता, राष्ट्र दर्शन और सामाजिक सरोकार झलकते हैं। उनकी श्रेष्ठतम रचनाओं में ‘पुष्पांजलि ज्योतिपुंज’ है, जिसमें लिखा है कि संसार में उन्हीं मनुष्यों का जन्म धन्य है, जो परोपकार और सेवा के लिए अपने जीवन का कुछ भाग अथवा संपूर्ण जीवन समर्पित कर पाते हैं। इस पुस्तक में उन्होंने व्यक्ति के जन्म से लेकर समाज के प्रति दायित्व उसके का बोध कराया है।

‘सोशल हॉमोर्नी’ नामक पुस्तक में प्रधानमंत्री मोदी ने समाज और सामाजिक समरसता के प्रति भावनाओं के प्रबल प्रवाह को शब्दों के माध्यम से व्यक्त किया है। इस पुस्तक में समाज के प्रति उनकी अद्वितीय दृष्टि और दृष्टिकोण की स्पष्टता है। ‘एग्जाम वॉरियर्स’ नामक पुस्तक में अपने बचपन के कई उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को परीक्षा के तनाव से निकलने की युक्ति बताई है। ‘कनवीनिएंट एक्शन’ में वे जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और समाज को सचेत करते हैं और साथ ही इससे निपटने के लिए वैश्विक अभियान में शामिल होने की प्रेरणा भी देते हैं।
कोरोना महामारी काल में न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व ने उनकी भक्ति और शक्ति देखी है। महामारी से कराह रहे विश्व के देशों ने मोदी के नेतृत्व की न केवल सराहना की है, समर्थन भी किया है, अनुकरण भी किया है। भारत के अब तक के सबसे लोकप्रिय एवं यशस्वी प्रधानमंत्री, इतिहास पुरुष नरेंद्र मोदी ने एक ऐसे भविष्य के भारत की नींव रखी है, जो विश्व में अपनी सनातन श्रेष्ठता को तो पुन: प्राप्त करेगा ही, विश्व का सफल नेतृत्व भी करेगा।
(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद हैं)

 

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