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राजनीति

संविधान, संसद और न्यायपालिका

 प्रेमलता संविधान में 121(124)वां संशोधन हो गया। कुछ महीनों में इसके कानून बन जाने की संभावना भी है। विषय न्यायधीशों की नियुक्ति को लेकर...

अपना अपना इम्तहान

अरविंद मोहन यह अलग बात है कि विपक्ष ने साध्वी निरंजन ज्योति की घटिया बयानबाजी और इराक में उनतालीस भारतीयों के जीवित होने को...

परदेस में पहचान का प्रश्न

अभिषेक कुमार आजादी के बाद पहला मौका था जब दुनिया भर में बसे आप्रवासी भारतीय अपने मूल देश के प्रधानमंत्री के आगमन की खबर...

आत्मरक्षा का अधिकार

केपी सिंह रोहतक में हरियाणा रोडवेज की बस में पूजा और आरती नाम की दो बहनों द्वारा तीन मनचलों की धुनाई का वीडियो सोशल...

शिक्षा के क्षेत्र में डराते संकेत

संजीव कुमार अधिक समय नहीं हुआ, भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी का बयान आया था कि रोमिला थापर और बिपन चंद्र जैसे नेहरूवादी इतिहासकारों की...

जन धन के दावे और हकीकत

विजय विद्रोही इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां भी जाते हैं जन धन योजना का जिक्र करने से नहीं चूकते। वे गर्व से बताते...

उच्च शिक्षा की ढलान

शंकर शरण एक उच्चस्तरीय समिति दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यचालन पर विचार कर रही है। पर केवल एक विश्वविद्यालय के लिए क्यों? देश के सभी...

भारतीय राष्ट्रवाद की भूमिका

शिवदयाल भारत ही नहीं, पूरे विश्व में राष्ट्रीयताओं का मुद््दा बहुत जटिल हो गया है, बल्कि इसके अत्यंत खतरनाक आयाम सामने आ रहे हैं।...

सार्क का दायरा और चीन की चुनौती

पुष्परंजन अलग-अलग दो दृश्यों की हम बात करते हैं। पहला दृश्य छब्बीस नवंबर को काठमांडो के राष्ट्रीय सभागृह का है, जहां पर दक्षेस बैठक...

अवाम से क्यों दूर हुआ वाम

अरुण माहेश्वरी सन 1989 के बाद चौथाई सदी का समय बीत चुका है। माना जा सकता है कि इस बीच सोवियत समाजवाद के भव्य...

तीसरे मोर्चे की मुश्किल डगर

धर्मेंद्रपाल सिंह भारतीय राजनीति में यह साल बड़े बदलाव के रूप में दर्ज होगा। 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार मिली।...

अधर में महिला आरक्षण

संजीव चंदन अचानक कोई निर्णय नहीं लिया गया तो इस बार शीत-सत्र में भी भाजपा सरकार महिला आरक्षण विधेयक संसद मे पेश नहीं करने...

और कितने भस्मासुर

विकास नारायण राय उन्नीस नवंबर की रात रामपाल की गिरफ्तारी से अनिश्चित त्रासद संभावनाओं वाले आश्रम प्रकरण के पटाक्षेप पर सभी को संतोष व्यक्त...

बुझाए न बुझे

लाल्टू एक वक्तथा, बहुत पहले नहीं- बस सौ साल पहले, जब भारत में अधिकतर शादियां बीस की उम्र के पहले हो जाती थीं। गांवों...

अनिवार्य मतदान से फायदा या नुकसान

गिरिराज किशोर फेसबुक पर मैंने ग्यारह नवंबर को एक पोस्ट मतदान अनिवार्य बनाने के विरोध में डाली थी। उसके पक्ष या विपक्ष में किसी...

आतंकवाद का अर्धसत्य

अनिल चमड़िया राष्ट्रपति के कुछ कहने का क्या कानूनी महत्त्व होता है? क्या सूचनाओं और प्रशासनिक कार्रवाइयों को लेकर राष्ट्रपति की टिप्पणियों से राज्यतंत्र...

लूट की एक और सुरंग

विकास नारायण राय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के उत्तर में, महाराणा प्रताप अंतरराज्यीय बस अड्डे से पचास किलोमीटर पर, हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना...

नसबंदी कांड की कड़ियां

कनक तिवारी जनसत्ता 17 नवंबर, 2014: बिलासपुर नसबंदी कांड राज्यतंत्र की क्रूरता का बेहद घिनौना उदाहरण है। केंद्र प्रवर्तित और राज्य पोषित नसबंदी कार्यक्रम को...