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राजनीति

अबलावाद को नया बढ़ावा

मृणाल पाण्डे गए हफ्ते रेडियो पर प्रसारित अपनी वार्ता में प्रधानमंत्री ने कुछ इस आशय की बात कही कि बेटियों, बहनों आदि की सुरक्षा...

छोटे छोटे आपातकाल

राकेश तिवारी मोदी सरकार ने पिछले एक वर्ष में अकादमिक और सांस्कृतिक संस्थानों में जिन लोगों को शीर्ष पदों पर बैठाया है उनमें से...

मैग्नाकार्टा का गुणगान किसलिए

बनवारी इस जून के मध्य में भारत के अंगरेजी अखबारों में ऐसे अनेक लेख छपे, जिनमें मैग्नाकार्टा का गुणगान किया गया था। मैग्नाकार्टा उस...

जार की जुबान हिटलर का भूत

शरद यादव माननीय अध्यक्ष महोदय, लोकसभा। महानुभाव, मैं जबलपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से लोकनायक जयप्रकाश के अनुयायी व जनता प्रत्याशी के रूप में लोकसभा...

असंतोष के परिसर

सुभाष गाताडे आइआइटी-मद्रास के प्रबंधन ने अंतत: छात्रों के समूह ‘आंबेडकर पेरियार स्टडी सर्कल’ की मान्यता बहाल कर दी। अब भले ही विवाद पर...

न्यूनतम सरकार अधिकतम शोषण

केसी त्यागी श्रमिकों के शोषण का लंबा इतिहास रहा है। इसके विरुद्ध श्रमिकों ने समय-समय पर आवाज उठाई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रम कानून बने।...

सियासी मैदान में योग

मणींद्र नाथ ठाकुर जिस जनतंत्र में इंसान की गिनती ही महत्त्वपूर्ण है वहां ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, संस्कृति सबकुछ चुनावी गणित का हिस्सा हो जाता...

यूरोप का भौगोलिक विस्तार

आज के विश्व को समझने के लिए उसके आर्थिक स्वरूप के पार झांकना आवश्यक है। सामान्यत: हमारी सारी बहस अमेरिका-यूरोप के आर्थिक वर्चस्व पर...

संस्कृति की वर्चस्ववादी समझ

भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआइआइ) के नए अध्यक्ष और उसकी सोसाइटी के चार भाजपाई-संघी सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में इस लेख के...

काला धन, कानून और राजनीति

रवि शंकर काले धन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाए गए अघोषित विदेशी आय और संपत्ति (नया कर) विधेयक को संसद के दोनों...

योजनाबद्ध विकास की विदाई

अरविंद मोहन संसद के बीते सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने एक नहीं, अनेक अवसरों पर यह शिकायत की कि...

प्रचार का गोरखधंधा

विनीत कुमार अपने बेहद लोकप्रिय उत्पाद मैगी के प्रतिबंधित किए जाने और चौतरफा हो रही बदनामी से उबरने के लिए नेस्ले कंपनी अब अमेरिका...

बिहार में नए समीकरण

धर्मेंद्रपाल सिंह बिहार विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के भविष्य से जुड़ा है। नवंबर 2013 से लगातार चुनावी जीत की लहर पर सवार प्रधानमंत्री...

शांति के पक्ष में

India-China-Pakistan: क्या आपने कभी भारत-चीन विवाद पर चीन का पक्ष जानने की कोशिश की है? पाकिस्तान आखिर क्या कहता है- क्यों उसे भारत से...

सभ्यता की अधोगामी दिशा

आज विश्व में सभी देश अपनी अर्थव्यवस्था को औद्योगिक अर्थव्यवस्था में बदलने में जुटे हैं। यह सिलसिला यूरोप में 1800 ईस्वी के आसपास आरंभ...

नेहरू का अकेलापन

नेहरू की मृत्यु के इक्यावन साल पूरे हो गए। लेकिन इस साल सत्ताईस मई यों ही निकल गई। गांधी की जगह नेहरू को गोली...

बिहार की बिसात पर

कुमार प्रशांत बिहार की राजनीतिक उथल-पुथल ने कितनी ही बार देश की राजनीति की कुंडली लिखी और बदली है! लेकिन ऐसे हर मौके पर...

नेट निरपेक्षता का सवाल

अजेय कुमार इंटरनेट का जन्म सत्तर के दशक के शुरू में सबसे पहले अमेरिकी सरकार द्वारा बनाए गए एक रक्षा मंत्रालय संबंधी नेटवर्क से...