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राजनीति

तंगी में तरक्की की तरकीब

विनोद कुमार मोदी बड़े गर्व से कहते हैं कि वे कभी चाय बेचा करते थे। इससे शायद किसी का नुकसान नहीं था। लेकिन प्रधानमंत्री...

हम कहां जा रहे हैं

हिंदी पट्टी का एक शब्द और क्रिया रही है हांका। यह जंगल, जीवन और जानवर से जुड़ा एक सामूहिक उपक्रम रहा है। जंगली जानवर...

हवा में खोते लोग

मुझे दोनों ही बार खुद के गलत निकलने का अफसोस है! ऐसा इसलिए नहीं कि मैं हमेशा सही निकलता हूं, बल्कि इसलिए कि देश...

बैंकों की दशा सुधारने की कवायद

धर्मेंद्रपाल सिंह देश की अर्थव्यवस्था से आजकल अजीब इशारे मिले हैं। बीते अक्तूबर में औद्योगिक उत्पादन 4.2 फीसद गिरा। जुलाई से सितंबर की तिमाही...

विपक्षी एकता के सिद्धांत

अरुण कुमार त्रिपाठी भारतीय जनता पार्टी की अप्रत्याशित भारी जीत और नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव के बीच समाजवादी कुछ ज्यादा ही मिलने लगे...

क्या हम धर्म के बिना नहीं रह सकते

राजकिशोर कुछ चीजों को अपना काम करके हट जाना चाहिए। प्रकृति भी यही चाहती है। इसीलिए सुमित्रानंदन पंत ने आह्वान किया था: द्रुत झरो...

जो गड्ढे सत्ता खोद रही है

ध्रुव शुक्ल भारत के धर्म विमर्श में घर वापसी का रास्ता धर्मों के त्याग में बताया गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भी यही निष्कर्ष निकाला...

बीमा विदेशीकरण की बेचैनी क्यों

अरविंद मोहन संसद का सत्र खत्म होते ही कई मामलों में अध्यादेश लाना केंद्र सरकार की बेचैनी को तो बताता ही है, हम सबसे...

आत्महत्या, कानून और समाज

केपी सिंह आत्महत्या, या आत्महत्या का प्रयास करना भारतीय दंड संहिता की धारा 309 के अंतर्गत अपराध है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद...

पुलिस सुधार की कवायद

विकास नारायण राय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की पुलिस-व्यवस्था के साथ भी नारेबाजी वाला सलूक कर रहे हैं। कुछ वैसे ही जैसे महंगाई, रोजगार,...

सेक्युलर भारत को डराते संकेत

सुभाष गाताडे संविधान सभा के किसी सदस्य ने यह सुझाव पेश किया था कि उसके प्राक्कथन में ‘ईश्वर की दुहाई’ दी जाए, तब संविधान...

झारखंड के आईने में

विनोद कुमार पिछले तीन दशकों से, खासकर मंडलवादी राजनीति के उभार के बाद चुनावी विश्लेषणों-आकलनों का एक आसान तरीका हमने बना लिया था कि...

धर्मांतरण और कानून

विजय विद्रोही उत्तर प्रदेश में संघ परिवार की तरफ से अचानक धर्मांतरण (जिसे वे घर वापसी कहते हैं) के कार्यक्रमों में तेजी आई है।...

सामाजिक न्याय की मछलियां

दिलीप मंडल मछलियां पानी में होती हैं, तो वे जिंदा रहती हैं और उनमें काफी ताकत होती है। लेकिन वही मछलियां जब पानी के...

हिंदू राष्ट्रवाद कितना व्यावहारिक

शीतला सिंह शीतला सिंहराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कोलकाता की एक सभा में विपक्ष को चुनौती दी कि वह धर्म परिवर्तन...

चुनावी नतीजे और संघ का एजेंडा

अभिषेक श्रीवास्तव ‘कश्मीर के महाराजा क्षत्रियों के सूर्यवंश से आते हैं, जो राजपूतों का सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित वंश है। यही वह वंश था...

इन नतीजों के मायने

पुष्परंजन सआदत हसन मंटो अगर जीवित होते, और कभी कांके आए होते, तो शायद ‘टोबा टेक सिंह’ के बाद राज्यों के विभाजन और उसके...

सफेद खून, काली करतूत

अख़लाक़ अहमद उस्मानी खोला अल्ताफ का वह स्कूल का महज दूसरा दिन था। पांच बरस की खोला को छुट््टी की तलब थी, ताकि वह...