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राजनीति

इंटरनेट की दुनिया में हिंदी

तीसरी तकनीकी क्रांति (1980) के बाद इंटरनेट सूचनाओं के आदान-प्रदान का सबसे सुलभ साधन बन चुका है। इसने मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में...

परीक्षा हो या न हो

परीक्षाएं स्कूल-व्यवस्था की खोज का परिणाम हैं। स्वदेशी स्कूलों को मिटा कर जब मैकाले मॉडल की शिक्षा लागू की गई, तो परीक्षा भी स्कूलों,...

ताकि प्राथमिक शिक्षा में सुधार आए

देश की प्राथमिक शिक्षा में सुधार हो, सरकारें इस मुद्दे पर दशकों से विचार कर रही हैं। लेकिन यह सुधार कैसे होगा, इस पर...

धर्म के खोटे सिक्के

भारत को पूरे विश्व में विभिन्न धर्मों, आस्थाओं, नाना प्रकार के विश्वास और अध्यात्मवाद के लिए जाना जाता है। इस देश की धरती ने...

बैंकों की बिगड़ती सेहत

सरकारी बैंकों को खतरे से उबारने के लिए सरकार ने एक बार फिर अपना खजाना खोल दिया है। अगले चार वर्षों में वह इन...

जीएसटी की कसौटी पर

संसद का सत्र लोक-अपेक्षाओं को पूर्ण करने का एक मंच होता है। संवैधानिक उद््देश्यों की प्राप्ति के लिए ही सरकार संविधान में संशोधन, परिवर्धन...

कितना कारगर होगा नगा समझौता

नगा विद्रोही संगठन नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल आॅफ नगालिम (एनएससीएन) के इसाक-मुइवा गुट के साथ शांति प्रक्रिया आखिरकार अंतिम चरण में पहुंच गई है और...

विकास के कोलाहल में

देश में सामाजिक-आर्थिक और जातीय जनगणना (एसइसीसी) के अलग-अलग पहलुओं पर बहस चल रही है। कुछ जानकार इस तथ्य की तरफ इशारा कर रहे...

हादसों की रफ्तार बनाम सुरक्षा की पटरी

भारतीय रेल परिवहन तंत्र विश्व का सबसे बड़ा व्यावसायिक प्रतिष्ठान है, पर विडंबना है कि यह किसी भी स्तर पर विश्वस्तरीय मानकों को पूरा...

किसानों की खुदकुशी के सबब

जरा गौर कीजिए कि इसी देश में करीब अठारह-बीस करोड़ भूमिहीन दलित, अति पिछड़े मजूर हैं। उनके जीवन में यह मौका ही नहीं आता...

नगा समझौते की अड़चनें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद नगा नेता ने भारत सरकार और नगाओं के बीच एक नए रिश्ते...

दिल्ली में सरकारों का छाया-युद्ध

अगर विज्ञापनों के बूते संभव होता तो दिल्ली से अब तक भ्रष्टाचार का नामो-निशान मिट चुका होता और इस महानगर की स्त्रियां पूरी तरह...

दहशत का दुर्गद्वार

पुण्य प्रसून वाजपेयी अजमल कसाब फरीदकोट के ओकारा गांव का था। नवेद फैसलाबाद की शहरी कॉलोनी गुलाम मोहम्मद अबद का है। कसाब गरीब परिवार...

जनगणना से मिलते संकेत

अरविंद मोहन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जिस तरह जनगणना के जातिवार आंकड़ों के बारे में तत्काल सफाई दी और उसे लगभग ठंडे बस्ते में...

श्रम और दक्षता का संतुलन

मणींद्र नाथ ठाकुर यह नई खोजों का समय है। भविष्य में वही समाज या देश आगे बढ़ेगा, जो नई वैज्ञानिक और सामाजिक खोजों में...

आयकर की चोरी पर नजर

आरके सिन्हा क्यों हमारे देश की आम जनता आयकर जमा कराना अपना कर्तव्य नहीं समझती? यहां ‘कर चोरों’ की तादाद अनगिनत होगी। बहरहाल, अब...

बाढ़ पर लगाम की जरूरत

निरंकार सिंह गुजरात, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, ओड़ीशा सहित देश के कुछ हिस्से जहां भारी वर्षा और बाढ़ से तस्त्र हैं, वहीं कुछ राज्य...

गाय का अर्थशास्त्र

आखिरकार मोदी सरकार को गोमांस के निर्यात पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। पिछले साल भर में भारत से गोमांस का निर्यात पंद्रह प्रतिशत बढ़ा है।...