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राज्यसभा के दमखम पर विपक्ष देगा चुनौती

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में सफलता से भाजपा राष्ट्रपति चुनाव को लेकर मजबूत स्थिति में आ गई है। साथ ही, राज्यसभा में अपनी संख्या बढ़ा लेने का मौका उसके पास है।

Author Published on: April 1, 2017 1:50 AM
rajya sabha secretariat indian express

दीपक रस्तोगी

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में सफलता से भाजपा राष्ट्रपति चुनाव को लेकर मजबूत स्थिति में आ गई है। साथ ही, राज्यसभा में अपनी संख्या बढ़ा लेने का मौका उसके पास है। राज्यसभा के भविष्य का गणित क्या भाजपा को राष्ट्रपति चुनाव में मदद करेगा? जवाब है, जुलाई में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव के पहले राज्यसभा के गणित में खास बदलाव नहीं होने जा रहा। लिहाजा, सत्ताधारी पार्टी को संसद के अपने मौजूदा संख्याबल और विधानसभाओं से मिलने वाले मतों पर निर्भर करना होगा। राष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा विपक्षी दलों का साथ देगी। यह स्थिति भांपकर विधानसभाओं की ताकत के लिहाज से, भाजपा नेतृत्व राजग में सहयोगी दलों को साधने में तो जुट गया है, विपक्षी खेमे से भी समर्थन जुटाने की योजना पर काम कर रहा है।

इस साल (2017) राज्यसभा में 10 सीटें खाली हो रही हैं। एक सीट जुलाई में और नौ सीटें अगस्त में। जुलाई में खाली हो रही सीट गोवा से है। गोवा में सरकार बनाने के बाद भाजपा मजबूत स्थिति में है, लेकिन उसे अपना राज्यसभा उम्मीदवार जिताने के लिए विपक्ष से कड़ा संघर्ष करना होगा। अगस्त में नौ में छह सीटें बंगाल से और तीन गुजरात से खाली हो रही हैं। बंगाल और गुजरात से चुनकर आने वाले नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों के शपथ लेने के पहले ही राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। विधानसभाओं में संख्याबल के हिसाब से भारतीय जनता पार्टी गुजरात में अपने उम्मीदवार को आसानी से राज्यसभा ला सकेगी। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पांच सीटें आसानी से जीत सकती है। एक सीट के लिए कड़े संघर्ष की संभावना बनेगी। वाममोर्चा के सीताराम येचुरी का कार्यकाल पूरा हो रहा है। अगर माकपा उन्हें दोबारा बंगाल से नामांकन देती है तो उन्हें जीतने के लिए न सिर्फ कांग्रेस की, बल्कि तृणमूल की भी मदद की जरूरत होगी।

हाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली जबरदस्त सफलता का स्वाद राज्यसभा चुनाव में चखने का मौका अप्रैल 2018 में ही मिल सकेगा। राज्यसभा में मौजूदा संख्याबल के लिहाज से यूपीए के 73 (कांग्रेस के 59) सदस्य हैं और राजग के 74 (भाजपा के 56)। 88 सदस्य क्षेत्रीय पार्टियों – समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, एआइएडीएमके, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, जनता दल (एकीकृत), माकपा आदि के हैं। 12 सदस्य नामांकित किए गए। इनमें से चार सदस्य भाजपा में शामिल हो चुके हैं। नामांकित सदस्य शपथ लेने के छह महीने के भीतर किसी राजनीतिक दल का सदस्य हो सकता है। इस साल जिन नेताओं की राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, उनमें प्रमुख हैं – माकपा महासचिव सीताराम येचुरी (बंगाल से), दिलीप पंड्या और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (गुजरात), गोवा से कांग्रेस के शांताराम नाइक। अगले साल उत्तर प्रदेश से बसपा प्रमुख मायावती और बजरंग दल के नेता विनय कटियार समेत 10 लोगों की सीटें खाली होंगी। अगर समाजवादी पार्टी-कांग्रेस और बसपा एकजुट हो जाएं तो दो सीटें निकाल सकते हैं। भाजपा को आठ सीटें मिलेंगी। बिहार से छह सीटें खाली होंगी। रविशंकर प्रसाद और धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल पूरे हो रहे हैं।

इनमें से बिहार में भाजपा अपने एक उम्मीदवार को ही जिता पाएगी। अगर विपक्षी धड़े में फूट पड़ी तो ही दूसरी सीट का उसे फायदा होगा। महाराष्ट्र में अगले साल छह सीटें खाली होंगी। तीन भाजपा के पास हैं और अन्य तीन शिवसेना के पास। वहां भाजपा अपनी एक सीट बढ़ा पाएगी। मध्य प्रदेश में पांच सीटें खाली हो रही हैं और चार भाजपा के पास हैं। वहां यही स्थिति बरकरार रहेगी। हरियाणा में भाजपा को एक सीट का लाभ मिल सकता है। बहरहाल, 2018 में राज्यसभा की जो स्थिति बनेगी, उस लिहाज से भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को 11 सीटों का लाभ होगा। कांग्रेस नीत यूपीए को इतना ही नुकसान। राज्यसभा के सदस्य राज्यों की विधानसभा सदस्य चुनकर भेजते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस कई राज्यों की सत्ता गंवा चुकी है और भाजपा ने सत्ता पाई है। मई 2016 में तमिलनाडु, बंगाल, केरल, असम और पुदुचेरी के चुनाव हुए। असम में भाजपा की सरकार बनी, लेकिन वहां राज्यसभा के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अभी बाकी है। जून 2019 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह समेत दो राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। अप्रैल 2020 तक तीन और अप्रैल 2022 तक दो सीटें खाली होंगी। ये सीटें अभी कांग्रेस के पास हैं। विधानसभा की मौजूदा संख्याबल के लिहाज से अब भाजपा मजबूत दावेदारी में है।

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