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राजनीतिः अपराधों के राजमार्ग

देश के हाइवे अब डरावने होते जा रहे हैं। इन पर लाशें मिल रही हैं। हाइवे से अपने गंतव्य स्थलों पर जाने वाले मुसाफिर बड़ी तादाद में हादसों के शिकार हो रहे हैं।

Author September 10, 2016 2:15 AM

हाइवे पर सफर करना लगातार डरावना होता जा रहा है। इन पर भीषण हादसों से लेकर हत्याएं और लूटपाट आम बात हो चली है। समूचे हाइवे के चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती मुमकिन नहीं है। लेकिन उन जगहों की पहचान की जा सकती है जहां ज्यादा अपराध होते हैं या जहां इसकी आशंका अधिक है।   

देश के हाइवे अब डरावने होते जा रहे हैं। इन पर लाशें मिल रही हैं। हाइवे से अपने गंतव्य स्थलों पर जाने वाले मुसाफिर बड़ी तादाद में हादसों के शिकार हो रहे हैं। इन पर रोज डकैती, लूटपाट और रेप के केस हो रहे हैं। हाल ही में नोएडा से शाहजहांपुर जा रहे एक परिवार के साथ गाजियाबाद-कानपुर नेशनल हाइवे-91 पर बदमाशों ने खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था। बदमाशों ने तीन घंटे तक परिवार को बंधक बनाए रखा और लूटपाट के बाद मां और बेटी से गैंगरेप किया।

और अब हाइवे पर लाशें मिलने से दहशत है। बीते अगस्त महीने के अंतिम हफ्ते में दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस हाइवे पर एक हफ्ते के भीतर छह लाशें मिलीं। इनकी हालत देख कर समझ आ रहा था कि इन्हें बड़ी बेरहमी से कत्ल करने के बाद हाइवे पर फेंक दिया गया। अभागे मृतकों में दो नौजवान और दो औरतें थीं। इसी तरह राजधानी से सटे हरियाणा के सोनीपत शहर से गुजरने वाले नेशनल हाइवे नंबर 1पर लगातार लाशें मिलने से पुलिस की नींद हराम हो चुकी है। कहने वाले तो यहां तक कहते हैं कि नेशनल हाइवे नंबर-1लाशों को फेंकने का अड््डा बनता जा रहा है।
दरअसल, हाइवे पर मिलने वाली लाशों की शिनाख्त करना भी पुलिस के लिए खासा कठिन होता है। जाहिर है, इस कारण से हत्यारे कानून की गिरफ्त से बचे रहते हैं। होता यह है कि हत्याएं कहीं और की जाती हैं और बाद में शवों को ठिकाने लगाने के लिए हाइवे पर फेंक दिया जाता है। कई बार शव बक्से में डाले होते हैं। कुल मिलाकर हाइवे अपराधियों के लिए मुफीद स्थान बनते जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश और बिहार से गुजरने वाले हाइवे देश के सबसे बदनाम माने जा सकते हैं। हाइवे पर सफर करना लगातार डरावना होता जा रहा है। इन पर भीषण हादसों से लेकर हत्याएं और लूटपाट आम बात हो चली है। अलबत्ता गोवा, आतंकवाद से प्रभावित जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत के हाइवे कमोबेश सुरक्षित हैं। हालांकि पहली नजर में सुनने में अजीब लगता है कि कश्मीर के हाइवे सुरक्षित कैसे हो गए! राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़ों पर गौर करें तो समझ आ जाएगा कि उत्तर प्रदेश और बिहार के हाइवे कितने असुरक्षित हो चुके हैं। इनके बाद क्रमश: ओड़िशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश का नंबर आता है। दरअसल, उत्तर प्रदेश और बिहार को देश के ‘क्राइम स्टेट’ का दर्जा मिल सकता है। इसे इन राज्यों से गुजरने वाले हाइवे पर होने वाली दर्जनों आपराधिक घटनाओं में भी देखा जा सकता है।

बेशक, हाइवे पर होने वाले अपराध पुलिस के लिए नया सिरदर्द बन रहे हैं। समूचे हाइवे के चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती मुमकिन नहीं है। पर उन जगहों की पहचान की जा सकती है जहां ज्यादा अपराध होते हैं या जहां इसकी आशंका अधिक है। भारत में करीब एक लाख किलोमीटर लंबा नेशनल हाइवे का जाल बिछा हुआ है। आप समझ सकते हैं कि यह कितना व्यापक है। सबसे बड़ा हाइवे का नेटवर्क उत्तर प्रदेश में है। राज्य में 8,483 किलोमीटर लंबा हाइवे है। बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 4,967 किलोमीटर है। बाकी राज्यों में भी हाइवे की लंबाई खासी है। तो कैसे थमें इन पर होने वाले अपराध और हादसे? इसका यही उपाय समझ आता है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ हो। वे अपराध को अंजाम देने से पहले दस बार सोचें। इसी तरह से हाइवे पर तयशुदा रफ्तार से ज्यादा गति से अपने वाहन चलाने वालों पर भी कैमरों की नजर हो। हाइवे पर यातायात नियमों का पालन न करने वालों के लिए कठोर दंड हो। उनके लाइसेंस रद््द कर दिए जाएं। यकीन मानिए कि कठोर कार्रवाई किए बगैर तो हाइवे सुरक्षित नहीं होने वाले।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर विगत पांच जून को एक हादसे में सत्रह लोगों की जान चली गई। यह सारा मामला लापरवाही का लगता है। हादसा उस समय हुआ जब एक लग्जरी बस दो कारों से जा टकराई और सड़क से बीस फुट नीचे जा गिरी। हादसा तड़के करीब साढ़े पांच बजे हुआ। दरअसल, एक स्विफ्ट कार टायर पंचर की वजह से हाइवे पर रुकी हुई थी। ड्राइवर को टायर बदलते देख एक इनोवा कार फर्स्ट लेन में मदद के लिए रुकी। तभी सतारा से आ रही एक बस ने दोनों कारों को टक्कर मार दी। इसके बाद यह बस अनियंत्रित होकर हाइवे से नीचे जा गिरी। सवाल उठता है कि बस ड्राइवर ने दोनों कारों को टक्कर मारी कैसे? साफ है कि बस का चालक या तो नशे में था या फिर उसे बस चलाना नहीं आता था। वरना हाइवे के एक तरफ खड़े वाहनों को टक्कर मारने का मतलब क्या है? हादसा नवी मुंबई के इलाके में एक्सप्रेस-वे के आखिरी छोर पर हुआ।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में साल 2013 में 39,828 लोग हाइवे पर हुए विभिन्न हादसों में मारे गए। अगले बरस यानी 2014 में यह आंकड़ा 40,049 तक पहुंच गया। अब मंत्रालय देश के विशाल नेशनल हाइवे पर पड़ने वाले उन ब्लैक स्पॉट (जिधर साल में दस या उससे ज्यादा हादसे होते हैं) की निशानदेही कर रहा है। इसके लिए 11 हजार करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं। अभी तक मंत्रालय को देश में 726 ब्लैक स्पॉट मिले हैं। इनमें से तमिलनाडु में 100, उत्तर प्रदेश में 99 और कर्नाटक में 86 ब्लैक स्पॉट हैं। ये हादसों के लिहाज से बहुत संवेदनशील हैं।

इसके साथ ही दिल्ली-कोलकाता हाइवे (नेशनल हाइवे-2) को भी हादसों के लिहाज से खतरनाक माना जाता है। इस पर दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल आते हैं। यह 1465 किलोमीटर लंबा है। इसमें 59 ब्लैक स्पॉट मिले हैं। दिल्ली-मुंबई हाइवे पर सफर करना भी खतरनाक माना गया है। इसे नेशनल हाइवे-8 कहा जाता है। इसमें दिल्ली, गुड़गांव, जयपुर, अजमेर, उदयपुर, अमदाबाद, वडोदरा, सूरत और मुंबई आते हैं। यह 1428 किलोमीटर लंबा है। इसमें हादसों के लिहाज से पैंतालीस ब्लैक स्पॉट मिले हैं। सड़क निर्माण से जुड़े विशेषज्ञ इन ब्लैक स्पॉट से मुक्तिदिलाने के उपाय कर रहे हैं।

कुछ और जगहों पर भी हाइवे बेहद खतरनाक हो चुके हैं। मसलन, अगर आप दिल्ली से मुरादाबाद, बरेली या लखनऊ जा रहे हैं तो सतर्क हो जाइए। गढ़मुक्तेश्वर में हाइवे पर सफर जोखिम भरा है। सिंभावली से लेकर ब्रजघाट पुल तक पंद्रह किलोमीटर के हिस्से में बहुत हादसे होते हैं, जिनमें लोगों की जानें जा रही हैं। इनमें कितने घायल और जीवन भर के लिए अपंग हो जाते हैं, उनकी तो कोई गिनती करने वाला भी नहीं है।
उत्तर प्रदेश में मां-बेटी के साथ बलात्कार की घटना के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर यह तय किया गया है कि उप्र पुलिस, राज्य भर में अपराध के हिसाब से खतरनाक हाइवे की पहचान करेगी। साथ ही वहां सुरक्षा मुहैया कराने के लिए खास इंतजाम करेगी। पुलिस हाइवे पर उन हिस्सों की पहचान करेगी, जो अपराध के लिए बदनाम रहे हैं या जिन इलाकों में अपराधी गिरोह ज्यादा सक्रिय हैं। बाकी राज्यों को भी इसी तरह से सोचना होगा। बदनाम इलाकों में फौरन गश्त बढ़ानी होगी। सारे राज्य मिल कर हाइवे पेट्रोल पुलिस के नाम से अलग दस्ता बना सकते हैं। इनके पास गाड़ियां, अत्याधुनिक उपकरण और हाइवे पर अपराध से निपटने के लिए खास तरह की ट्रेनिंग होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश में हाइवे के लिए खास पुलिस दस्ते बनाने की बात कुछ समय से चल रही थी, लेकिन इस पर होने वाले खर्च और श्रम-शक्ति को लेकर बात अटकी हुई थी।

देश में राजमार्गों की लंबाई को दो लाख किलोमीटर तक पहुंचाने की योजना है। दो लाख किलोमीटर लंबे हाइवे का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद देश का अस्सी फीसद यातायात इन पर चलेगा। देश में फिलहाल अठारह किमी सड़कें रोज बनती हैं। फिलहाल देश भर का चालीस फीसद से ज्यादा ट्रैफिक नेशनल हाइवे का इस्तेमाल करता है, इसलिए सड़कों पर काफी भीड़ होती है। आप इसे देखना चाहते हैं तो नेशनल हाइवे-24 पर दिल्ली से गाजियाबाद ही चले जाइए। जन्नत की हकीकत समझ आ जाएगी। लिहाजा, हाइवे की लंबाई बढ़ाने पर काफी तेजी से काम हो रहा है। इसके अलावा दस हजार किलोमीटर हाइवे को चौड़ा कर दो से चार लेन का किया जा रहा है। बेशक हाइवे चार लेन के होंगे, तो हादसों की आशंका कम होगी। भारी और बेतरतीब ट्रैफिक के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी और फिर आप अपने गंतव्य पर जल्दी पहुंचेंगे। अब जरा लखनऊ से कानपुर के बीच के सफर की बात कर लेते हैं। दोनों शहरों के बीच की दूरी सिर्फ नब्बे किलोमीटर है, मगर भारी ट्रैफिक के चलते गंतव्य तक पहुंचने में दो घंटे से ज्यादा लग जाते हैं। इसलिए राष्ट्रीय राजमार्ग-25 पर आठ लेन का कंट्रोल एक्सप्रेस-वे बन रहा है। इस पर दस हजार करोड़ से ज्यादा का खर्च आएगा।

बेशक देश के हाइवे लोगों की एक जगह से दूसरी जगहों पर आवाजाही के लिए बनाए जाते हैं। हाइवे का अर्थ है उन सड़कों से, जिनसे वाहन बिना ठहराव के अपनी मंजिल की तरफ जाता है। लेकिन अगर इन पर वाहनों की तादाद तेजी से बढ़ जाए और ये अपराधियों के स्वर्ग बनने लगें तो विकास का पहिया उलटा घूमने लगता है। इसलिए देश के हाईवे को हर लिहाज से सुरक्षित बनाना होगा।

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