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बेबाक बोलः इम्तिहान

जम्मू के कठुआ से लेकर उत्तर प्रदेश के उन्नाव तक जो हुआ उससे दुखद कुछ नहीं हो सकता। लेकिन इन्हीं बर्बरताओं के बीच पता चलता है कि भारत जैसे देश का लोकतांत्रिक ताना-बाना बचा हुआ है। शुरुआत हुई बलात्कार जैसी बर्बरता को धार्मिक रंग देने की लेकिन आम लोगों की आवाजों ने उन लोगों को बिल में दुबका दिया जो बलात्कार और हत्या के आरोपियों का पक्ष ले रहे थे। शासन पक्ष कह रहा था कि विधायक को गिरफ्तार करने के लिए कोई सबूत नहीं है। वहीं सीबीआइ ने आदेश मिलते ही कुछ ही घंटों के अंदर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। ऐसा समय इम्तिहान की तरह होता है कि एक सभ्य देश के रूप में कितने जागरूक हैं हम। यहां बात सत्ता पक्ष की नहीं जनता की करेंगे, जो साबित कर देती है कि उससे बड़ा कोई विपक्ष नहीं। आज पूरे देश की जनता बलात्कार के विरोध में उठ खड़ी हुई है जिससे सत्ता पक्ष को भी अपने सुर बदलने पड़ रहे हैं। जम्मू से उन्नाव तक पसरे गुस्से और दर्द पर इस बार का बेबाक बोल।
गिरफ्तार हुए आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर। (एक्सप्रेस फोटोः विशाल श्रीवास्तव)

अनगिनत सदियों के तारीक बहीमाना तिलिस्म/रेशम-ओ-अतलस-ओ-कमख्वाब में बुनवाए हुए/जा-ब-जा बिकते हुए कूचा-ओ-बाजार में जिस्म/खाक में लिथड़े हुए खून में नहलाए हुए/जिस्म निकले हुए अमराज के तन्नूरों से/पीप बहती हुई गलते हुए नासूरों से’। फैज अहमद फैज समय के जख्मों से टकरा रहे हैं। एक समय आता है जब आप अपने घर के खिड़की-दरवाजे बंद कर भी अपने ख्वाबगाह को दरख्शां (रोशन) नहीं कर सकते। बाहर की चीखें आपके कमरे की रोशनी को अंधेरे से भर देंगी। वस्ल (मिलन) की राहत पर खून में नहाए हुए जिस्म भारी पड़ने लगेंगे। हम उसी अंधेरे में हैं।  पिछले हफ्ते बिश्नोई समुदाय के बारे में लिखा था जो पेड़-पौधों और जानवरों के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं। हम बात कर रहे थे उन महिलाओं की जो काले हिरण के भूखे बच्चे को स्तनपान कराने में नहीं हिचकतीं। हिरण के आखेट में एक सिने सितारे को सजा मिल चुकी थी। वहीं कठुआ में मानवता के शिकारी एक बच्ची का आखेट कर चुके थे। एक लड़की जानवरों के लिए चारा लाने गई और दोपाया जानवरों की हवस का निवाला बन गई। उत्तर प्रदेश के उन्नाव ने पूरे देश को संदेश दिया कि इस देश में बेटी का बाप होने का क्या मतलब है। हर कदम पर बेटी बचाओ, सांस टूटने तक।

आरोपों के मुताबिक, जम्मू के कठुआ में आठ साल की लड़की का बलात्कार के बाद कत्ल कर शव ठिकाने लगाने के पहले बच्ची के बलात्कार और हत्या की जांच में शामिल अधिकारी ने कहा कि थोड़ा इंतजार करो, मैं भी बलात्कार करूंगा। आरोपपत्र कहता है कि पुलिस टीम ने मामले से बचाने के लिए बलात्कार के आरोपी नाबालिग की मां से डेढ़ लाख रुपए वसूले थे। कश्मीर से लेकर उन्नाव तक, बताया जा रहा कि ‘वैदिक हिंसा, हिंसा न भवति’। जो पुलिस करे, विधायक करे और सत्ता पक्ष से जुड़े कथित संत करें वो बलात्कार नहीं होता है। आरोप है कि जब देश की बेटियों को बचाने का भरोसा देने की कार्रवाई का वक्त था तब उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री और मुमुक्षु आश्रम के प्रमुख स्वामी चिन्मयानंद पर दर्ज बलात्कार का मुकदमा वापस लेने का फैसला किया। गायत्री प्रजापति पर नैतिकता का हल्ला बोल मचाने वाले राज्यपाल बेटी और बेटी के बाप की दुर्दशा पर कुछ नहीं बोल रहे थे।
आपने रोमियो विरोधी दस्ता बनाया था। आपका यह दस्ता तो प्रेमी जोड़ों के साथ सड़क चलते भाई-बहनों पर भी टूट पड़ा था। प्रतीक भी लिया था रोमियो का जो निजता का, पसंद का, अपनी तरह से जीवन चुनने की बात करता है। रोमियो तभी है जब कोई जूलियट है। जूलियट जो कहे कि उसे रोमियो पसंद है। हमने तब भी स्त्री सुरक्षा के नाम पर ऐसी बेतुकी मुहिम का विरोध किया था। यह प्रतीक ही था प्रेम को धूमिल करने का।

उसके बाद तीन तलाक पर मुसलिम महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए तो देश का बच्चा-बच्चा जुट गया था। दावा किया गया कि मुसलिम महिलाएं इंसाफ के लिए योगी को पत्र लिख रही हैं, संदेशे भेज रही हैं। उनके डर से मुसलमान पुरुषों ने तीन तलाक देना बंद कर दिया। लेकिन जब एक लड़की आपके दर पर बलात्कार के आरोप के साथ इंसाफ मांगने आती है, तो उसकी सुनवाई सुन्न पड़ जाती है। हां, आरोप यह है कि आरोप लगाने के एवज में उसके पिता की इतनी पिटाई हुई कि हिरासत के दौरान उनकी मौत हो गई। अदालती दखल और जनाक्रोश के बाद ही विधायक पर मामला दर्ज हुआ और वे सीबीआइ की हिरासत में लिए गए।

एक फिल्म में दीपिका पादुकोण की उघरी कमर पर हल्ला मचाने वाले, राष्टÑमाता पद्मिनी के हक में जयकारे लगाने वाले एक आठ साल की बच्ची की बलात्कार से रौंदी हुई लाश देखकर उद्वेलित क्यों नहीं हुए। कहां चली गर्इं स्त्री के सम्मान में जौहर करने वालीं स्त्रियां। टीवी चैनलों पर तलवार निकालने वाले और मूंछों को ताव देने वाले करणी सेना के बहादुर चुप्पी साधे क्यों बैठे हैं। इतिहास के मिथकों से प्रेम करने वालों, स्त्री की देह से रिसता यथार्थ का खून तुम्हें क्यों नहीं दिख रहा। क्या सबने अपनी संवेदनशीलता का जौहर करा लिया है।
राष्टÑमंडल खेलों में मंच पर खड़ी उस भारतीय महिला खिलाड़ी का चेहरा याद आ रहा है। मंच के सबसे ऊंचे हिस्से पर खड़े होने के बाद भारतीय राष्टÑगान की धुन उसके चेहरे पर गर्व का भाव ला रही थी। ये सब जब सोना, चांदी और कांसा लेकर लौटेंगी तो उन पर फूल बरसेंगे और हर पार्टी के नेता उन्हें धनराशि देने का एलान करेंगे। और ये बेटियां शायद आपको अपने मन की बात न कह पाएं कि हम इसलिए सोना लाए कि गर्भ में हत्या से बच निकले, स्कूल में बलात्कार के बाद हत्या होने से बच निकले, बीचएयू और जेएनयू के बाहर डंडे खाने और कपड़े फड़वाने से बच निकले। सरकारों को तो हमें इसलिए सोना देना चाहिए कि हम राजनेताओं और कथित संतों के हाथों से भी बच निकले। भारत जैसे देश में बेटियां बच जाएं यही उनके लिए ओलंपिक में सोना जीत लेना है। इसी जिजीविषा के बल पर हम बिना पौष्टिक भोजन खाए, बिना माकूल प्रशिक्षण लिए सोना जीत लाते हैं क्योंकि हमारे यहां बचे रहने का संघर्ष तो कोख से शुरू होता है।

इस स्त्री विरोधी समय के लिए किस दल पर और कैसे उंगली उठाएं। कल तक आप जिस स्त्री को सलाम करते थे पार्टी बदलते ही उसे ‘नाचनेवाली’ कह देते हैं। आपका समाजवाद तो इतना उदार हृदय हो जाता है कि बलात्कार को महज लड़कों की गलती मानते हैं और कहते हैं कि लड़के तो लड़के होते हैं उनसे गलतियां हो ही जाती हैं। मुख्यमंत्री आवास से बाहर निकलते हुए और मुस्कुराते हुए बलात्कार के आरोपी विधायक की मुस्कान सूचना के सभी मंचों पर ‘संक्रामक’ थी। वीडियो देखिए, थानेदार बलात्कार पीड़िता और उसके पिता के दर्द का मजाक उड़ा रहा है, डॉक्टर मजाक उड़ा रहा है और इन सबमें पूरी न्यायिक प्रक्रिया मजाक बनकर रह गई है। नागरिक सुरक्षा की सारी मशीनरी सत्ता संग हंस रही थी।
विपक्ष का आरोप है कि यह जंगलराज है। जरा ठहरें। जंगलराज का भी एक नियम होता है। एक शेर, दूसरे शेर और शेरनी के बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचाता है। हिरण दूसरे हिरण का शिकार नहीं करता। मछलियों में भी बड़ी मछली ही छोटी मछली को खाती है, अपने बराबर वालों को नहीं। एक इंसान जिसने अपने घर में बेटी को पैदा किया है वह दूसरे की बेटी का शिकार कर रहा है। एक मां जिसने अपनी कोख से बेटी जनी है वह कठुआ में बलात्कार के आरोपियों के पक्ष में नारे लगा रही है, इसलिए कि जिस आठ साल की लड़की के साथ बलात्कार हुआ है वह उसकी कोख से नहीं है।

इंसान के इस भेड़िये रूप का क्या करें। बेटी को बचाएं या बाप को बचाएं। उत्तर प्रदेश से लेकर कश्मीर तक बेटियों का हाल देखने के बाद लोग अगर ये पूछें कि क्यों पैदा करें हम बेटियां तो क्या जवाब देंगे। स्कूल जाती, कॉलेज जाती, दफ्तर जाती, मंदिर जाती, खेत जाती बेटियों के साथ बलात्कार और हत्या ही नियति है तो क्यों न उन्हें कोख में ही मार दें। शिमला के जंगलों में पड़ी बच्ची की लाश आज भी पूछ रही है कि मेरा क्या कसूर था मुझे क्यों न बचाया? अपराधियों को ठोक दो का संदेश देने वाली सरकार के दरवाजे से बलात्कार का आरोपी मुस्कुराता हुआ निकलेगा तो क्या संदेश जाएगा।

बर्बर इंसानों के खिलाफ कश्मीर से लेकर उन्नाव तक बलात्कार विरोधी प्रदर्शन की अपील की है। लेकिन कुछ महिलाएं पूछ रही हैं कि कितने प्रदर्शन करोगे, कितने जुलूस निकालोगे। हम बेटी क्या इसलिए पैदा करें कि कभी उसे स्कूल के शौचालय तो कभी किसी मंदिर के प्रांगण में मार दिया जाए। हम विरोध में बच्चा पैदा करना ही बंद क्यों न कर दें जब तक कि समाज और सरकार उसकी सुरक्षा की गारंटी न दे। इस दुख और गुस्से को सुनने और समझने में देर कर रहे हैं।
जख्मी होती उम्मीदों के इस दौर की फैज से शुरुआत के बाद हम अंत गालिब की उम्मीद से करते हैं, ‘देखिए पाते हैं उश्शाक बुतों से क्या फैज/इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है’।

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