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अक्षय ऊर्जा की जरूरत

अक्षय ऊर्जा असीमित और प्रदूषण रहित ऊर्जा है, जिसका नवीकरण होता रहता है।

रवि शंकर

अक्षय ऊर्जा असीमित और प्रदूषण रहित ऊर्जा है, जिसका नवीकरण होता रहता है। ऊर्जा संरक्षण की आदतों को अपनाने के साथ ही ऐसे अक्षय ऊर्जा संसाधनों की ओर कदम बढ़ाना आज समय की सबसे बड़ी मांग है। वैश्विक ताप तथा जलवायु परिवर्तन से बचाव की दृष्टि भी अक्षय ऊर्जा संसाधनों को प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है।

ऊर्जा किसी भी देश के विकास का इंजन होती है। किसी देश में प्रति व्यक्ति होने वाली ऊर्जा की खपत वहां के जीवन स्तर का भी सूचक है। यही नहीं, आर्थिक विकास का भी ऊर्जा उपयोग के साथ मजबूत संबंध होता है। इसलिए भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बहुत जरूरी है। इसमें दो राय नहीं कि तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या के भरण-पोषण और सुख-सुविधाओं के लिए संसाधनों की तेजी से खपत हो रही है। लेकिन इससे पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याओं का जन्म हो रहा है।

ऐसे में सवाल है कि बढ़ती जनसंख्या और ऊर्जा आपूर्ति के बीच कैसे संतुलन बनाया जाए? सवाल यह भी है कि पर्यावण और भविष्य की पीढ़ी के मद्देनजर भारत की आगे की रणनीति क्या होनी चाहिए। दुनिया भर में पिछले कुछ दशकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है और उसी के अनुरूप ऊर्जा की खपत भी निरंतर बढ़ रही है, लेकिन दूसरी ओर जिस तेजी से ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, उससे भविष्य में परंपरागत ऊर्जा संसाधनों के नष्ट होने की आशंका बढ़ने लगी है।

अगर ऐसा होता है तो मानव के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लग जाएगा। यही कारण है कि भविष्य में उपयोग हेतु ऊर्जा के स्रोतों को बचाने के लिए विश्वभर में ऊर्जा संरक्षण की ओर विशेष ध्यान देने, इसके प्रतिस्थापन के लिए अन्य संसाधनों को विकसित करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2040 तक दुनिया की ऊर्जा खपत लगभग पचास प्रतिशत बढ़ जाएगी।

हालांकि दैनिक जीवन में उपयोग के लिए जीवाश्म र्इंधन, कच्चे तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस आदि ऊर्जा स्रोतों द्वारा पर्याप्त ऊर्जा उत्पन्न की जा रही है, लेकिन लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए भविष्य में इन ऊर्जा संसाधनों की अत्यधिक कमी होने या इनके समाप्त होने का भय पैदा हो गया है। यही कारण है कि भारत सहित दुनिया भर में अब अक्षय ऊर्जा संसाधनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। हमारे यहां उपलब्ध कुल ऊर्जा में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब छब्बीस फीसद है, जबकि हाइड्रोपावर की करीब बारह फीसद है।

इस तरह देखा जाए तो देश की कुल ऊर्जा उत्पादन क्षमता में स्वच्छ स्रोतों की हिस्सेदारी अड़तीस फीसद से ज्यादा है। आज दुनिया में अक्षय ऊर्जा के मामले में भारत पांचवें स्थान पर है। इसके बावजूद हम अपनी ऊर्जा संबंधी जरूरतों के लिए काफी हद तक कोयले और जीवाश्म र्इंधन पर निर्भर हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने 2022 तक पौने दो लाख मेगावाट हरित ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। एक लाख मेगावाट तो अकेले सौर ऊर्जा से ही बनाने का लक्ष्य है।

अनुमान है कि वर्ष 2050 में गैर परंपरागत स्रोत ही ऊर्जा उत्पादन का सबसे बड़ा और अहम जरिया होगा। आज भी करीब सत्तर करोड़ भारतीयों के पास एलपीजी की उपलब्धता नहीं है। पीएनजी का दायरा भी सीमित है। करीब चालीस करोड़ लोगों को बिजली उपलब्ध नहीं है। जहां बिजली है भी, वहां हर वक्त उपलब्ध नहीं रहती। सरकार ने वर्ष 2029 तक सबको चौबीस घंटे बिजली उपलब्ध कराने का वादा किया है, लेकिन इसके लिए गैर-परंपरागत ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाते हुए कम कीमत पर लोगों को इसके उपकरण उपलब्ध कराने होंगे। न सिर्फ विद्युत वितरण प्रणाली में सुधार लाना होगा, बल्कि लोकलुभावन राजनीति से बचते हुए मुफ्त बिजली देने से भी बचना होगा। आम नागरिकों को भी ऊर्जा संरक्षण के प्रति गंभीर होना पड़ेगा।

बहरहाल, पर्यावरण संरक्षण पर प्रकाशित बहुचर्चित पुस्तक ‘प्रदूषण मुक्त सांसें’ के मुताबिक अक्षय ऊर्जा असीमित और प्रदूषण रहित ऊर्जा है, जिसका नवीकरण होता रहता है। ऊर्जा संरक्षण की आदतों को अपनाने के साथ ही ऐसे अक्षय ऊर्जा संसाधनों की ओर कदम बढ़ाना आज समय की सबसे बड़ी मांग है। वैश्विक ताप तथा जलवायु परिवर्तन से बचाव की दृष्टि भी अक्षय ऊर्जा संसाधनों को प्रोत्साहित किया जाना जरूरी है।

पर पूरी दुनिया के समक्ष बिजली जैसी ऊर्जा की महत्त्वपूर्ण जरूरतें पूरी करने के लिए सीमित प्राकृतिक संसाधन हैं, साथ ही पर्यावरण असंतुलन और विस्थापन जैसी गंभीर चुनौतियां भी हैं। ऐसी गंभीर समस्याओं और चुनौतियों से निपटने के लिए अक्षय ऊर्जा ऐसा बेहतरीन विकल्प है, जो पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के साथ-साथ ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने में भी कारगर साबित होगा। अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने, पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण फैलाने वाले कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत जैसे- सौर और पवन ऊर्जा क्षमता को बेहतरीन निदान के रूप में देखा जा सकता है।

दरअसल, किसी भी देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा का मतलब है कि वर्तमान और भविष्य की ऊर्जा आवश्यकता की पूर्ति इस तरीके से हो कि सभी लोग ऊर्जा से लाभान्वित हो सकें, पर्यावरण पर कोई कुप्रभाव न पड़े और यह तरीका स्थायी हो। भारत में इसके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। सरकार इन स्रोतों को विकसित करने को प्राथमिकता दे रही है। आज जरूरत है कि हम सब अक्षय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें। साथ ही ऊर्जा संरक्षण को एक राष्ट्रीय मिशन की तरह क्रियान्वित करना होगा। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस समय देश का बहुत सारा राजस्व ऊर्जा संसाधनों को आयात करने में खर्च हो रहा है।

दुनिया की आबादी लगभग आठ अरब है, जो 2050 तक नौ अरब तक पहुंच सकती है। इस बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करने के लिए संसाधनों की तेजी से खपत हो रही है। संभावित तौर पर सभी गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत निकट भविष्य में समाप्त हो जाएंगे, इसलिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत और स्वच्छ र्इंधन की खोज एक महत्त्वपूर्ण विषय बन गया है। भारत एक तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है।

किसी भी अर्थव्यवस्था में ऊर्जा तथा वित्त र्इंधन का काम करते हैं। वित्त के अभाव में ऊर्जा आर्थिक प्रगति को रफ्तार नहीं दे सकती। ऐसे में दुनिया के निवेशक आज भारतीय ऊर्जा क्षेत्र को एक आकर्षक निवेश मंजिल के रूप में देख रहे हैं, जिसका पूरा-पूरा लाभ उठाने के लिए भारत को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के स्तर पर नए कीर्तिमान बनाने होंगे। लेकिन इसके लिए हमें ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिहाज से कई मोर्चों पर एक साथ काम करने की जरूरत है।

गौरतलब है कि देश के नागरिकों के लिए एक ऐसी ऊर्जा संरक्षण नीति की जरूरत है, जिससे गैर-जरूरी ऊर्जा के इस्तेमाल को रोका या कम किया जा सके। इसके लिए अब सरकार को संजीदा होना पड़ेगा, क्योंकि आज के हालात में देश में ऊर्जा के उत्पादन और खपत में बहुत बड़ा अंतर है। हालत यह है कि देश में करोड़ों लोग आज भी अंधेरे में जीवन जीने को मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आइईए) के अनुसार अगले बीस सालों में भी भारत में ऊर्जा की समस्या बनी रहेगी। अब भी देश के कई हिस्सों में मांग की सिर्फ पंद्रह प्रतिशत बिजली की आपूर्ति हो पाती है।

वास्तव में ऊर्जा की यह समस्या देश के विकास और भविष्य को सीधा-सीधा प्रभावित कर रही है, जिसके लिए हमें अभी से संजीदा होना होगा। हमें अपने जीवन में ऊर्जा के महत्त्व को समझते हुए ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक होना ही होगा। देश के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि ऊर्जा चाहे किसी भी रूप में हो, वह उसे व्यर्थ में नष्ट न करे। अपने और आने वाली पीढ़ियों के सुखद भविष्य के लिए हमें अपने व्यवहार में ऊर्जा संरक्षण की आदतों को शामिल करना ही होगा।

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