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राजनीति: स्वास्थ्य और भविष्य

एनडीएचएम का मकसद एक डिजिटल स्वस्थ राष्ट्र बनाने का है, जो ‘‘बड़ा सोचो, छोटे से शुरू करो और तेजी से आगे बढ़ो’’ के सिद्धांत पर आधारित है। यह एक ऐसा मिशन है, जिसका उपयुक्त समय आ गया है, क्योंकि आत्म-निर्भरता की तरफ बढ़ने के लिए स्वास्थ्य पहला कदम है।

NDHM, PM Modi,स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी ने नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन लांच करने की घोषणा की थी। इसके अंतर्गत देश के प्रत्येक नागरिक को एक हेल्थ आईडी दी जानी है।

हर्षवर्धन

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन (एनडीएचएम) की शुरुआत एक ऐसे समय में हुई है, जब पूरा देश कोविड-19 महामारी के प्रभाव चक्र में फंसा हुआ है। यह मिशन इक्कीसवीं सदी भारत के इतिहास में शुमार परिदृश्य बदलने वाले वाली नीतियों में से एक है। इससे प्रभावशाली तरीके से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के सरकार के प्रयासों में क्रांतिकारी बदलाव आएगा और प्रधानमंत्री के हर नागरिक को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सपने को पूरा करने में मदद मिलेगी।

सबके लिए स्वास्थ्य, समन्वय, उपलब्धता, खर्च वहन करने की क्षमता, शिक्षा, सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, गोपनीयता और सुरक्षा के सिद्धांत पर तैयार किया गया एनडीएचएम डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ की हड्डी के रूप में आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। अपने मुख्य उपादानों- हेल्थ आइडी, डिजि-डॉक्टर, स्वास्थ्य सुविधा पंजी, व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकार्ड, टेलीमेडिसिन और ई-फार्मेसी- के जरिए यह मिशन अलग-थलग पड़े पणधारियों को साथ लाने और उन्हें पूरी तरह सक्षम बनाने में सहायक साबित होगा- और इस तरह भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा परिदृश्य ही बदल जाएगा।

एनडीएचएम संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास लक्ष्य के तहत सार्वभौम स्वास्थ्य पहुंच हासिल करने के उद्देश्य की तरफ सोद्देश्य उठाया गया कदम भी है। इसके मुख्य लक्ष्य हैं- वित्तीय जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करना, आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं और सभी तक दवाओं तथा टीकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना। डिजिटल भागीदारी के माध्यम से स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्त्वपूर्ण सफलता हासिल की जा सकती है।

इस मामले में अब तक कहीं भी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से बेहतर प्रदर्शन नहीं देखा गया है, जिसमें एक स्वदेशी रूप से विकसित अत्याधुनिक आइटी-प्लेटफार्म तैयार कर 1.2 करोड़ कैशलेस द्वितीयक और तृतीयक उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। यह प्लेटफार्म डाटा गोपनीयता और सूचना सुरक्षा संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करते हुए विश्व स्तरीय तकनीकी अनुप्रयोगों का उपयोग करता है।

आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप में आइसीटी नवाचारों का उपयोग किया गया है, जिससे वह कोविड मामलों की पहचान करता और व्यक्ति के आसपास के कोविड रोगियों की निशानदेही कर उन्हें रोग के लक्षणों के आधार पर इलाज संबंधी जानकारियां भी देता चलता है। एक ऐसे समय में जब तेजी से जांच चल रही है, बड़े पैमाने पर लोगों को टेलीमेडिसिन संबंधी प्रयासों से लाभ मिल रहा है और इस तकनीक आधारित प्रयास में विस्तार की बहुत संभावनाएं हैं।

जबसे एनडीएचएम की शुरुआत हुई है, डॉक्टरों समेत इस क्षेत्र से जुड़े बहुत सारे लोगों, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वालों और नागरिकों ने इस परियोजना को बहुत उत्साहजनक समर्थन दिया है। एनडीएचएम, वर्षों के नीतिगत अध्ययनों और देश में तकनीक का उपयोग करते हुए सामाजिक कल्याण योजनाओं के तहत किए गए कार्यों, यहां तक कि दुनिया भर में स्वास्थ्य कार्यक्रमों से मिले अनुभवों का एक मिलाजुला उत्पाद है। इसे तैयार करने में नागरिकों की इच्छाओं का पूरी तरह ध्यान रखा गया है। इसकी कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं।

पहली, एनडीएचएम एक स्वैच्छिक योजना है- हेल्थ आइडी पूरी तरह नागरिकों के लिए स्वैच्छिक है। हालांकि इस आइडी से स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त करना बहुत आसान और तनावरहित हो जाएगा, पर अगर कोई व्यक्ति इसे नहीं लेता है, तो इसका अर्थ यह कतई नहीं होगा कि वह स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं लेना चाहता। लोग अपने आधार कार्ड या डिजिटल प्रमाण के रूप में अपना मोबाइल नंबर, पते का विवरण या मेल-आइडी देकर अपना स्वास्थ्य खाता संचालित कर सकते हैं। इसके बावजूद आधार का उपयोग बाध्यकारी नहीं है।

दूसरा, अपना निजी स्वास्थ्य विवरण किसी से साझा करना या उपलब्ध कराना पूरी तरह हेल्थ आइडी धारक की इच्छा पर निर्भर करेगा। उसके स्वास्थ्य विवरण या उसके स्वास्थ्य से जुड़ी सूचनाओं का उपयोग करने के लिए उसके स्वामी की सहमति आवश्यक होगी। स्वास्थ्य विवरण को एक घंटे से लेकर असीमित समय तक के लिए साझा किया जा सकता है।

सहमति कभी भी वापस ली जा सकती है। यानी मालिक कभी भी कह सकता है कि वह अपना स्वास्थ्य विवरण साझा नहीं करना चाहता। निजी स्वास्थ्य रिकार्ड में नागरिकों का स्वास्थ्य संबंधी विवरण संचित होगा, जिससे उन्हें व्यापक जानकारियां उपलब्ध हो सकेंगी और उन्हें अपना निजी स्वास्थ्य रिकार्ड बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

तीसरा, एनडीएचएम को सार्वभौम मौलिक अधिकारों और विधायी प्रावधानों का ध्यान रखते हुए तैयार किया गया है, जैसे आधार अधिनियम, आइटी अधिनियम 2008, निजी विवरण सुरक्षा अधिनियम 2019। इस नागरिक-केंद्रित परियोजना को तैयार करते समय जनतांत्रिक सिद्धांतों और संघीय मूल्यों के अलावा सर्वोच्च न्यायालय के तमाम फैसलों को भी ध्यान में रखा गया है।

इसकी रणनीतिक और तकनीकी नीव नेशनल हेल्थ ब्ल्यू प्रिंट के आधार पर रखी गई है, तो इसका संपूर्ण ढांचा एनएचपी 2017 के दृष्टिकोण पर खड़ा किया गया है। इसकी डिजाइन में गोेपनीयता और सुरक्षा की गारंटी है। इसके हर खंड को, जिसमें व्यक्तिगत स्वास्थ्य आंकड़ा संचित होगा, उनमें नीतियों और कानूनों का पूरी तरह ध्यान रखा जाएगा।

चौथा, आम नागरिकों में से बहुत सारे लोगों का सवाल हो सकता है कि अगर यह तकनीक से संचालित होने वाला डिजिटल मिशन इंटरनेट से चलेगा, तो फिर ऐसे बहुसंख्य लोगों को इसका लाभ कैसे मिल सकेगा, जो इंटरनेट से जुड़े ही नहीं हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए हमने इसे इस ढंग से डिजाइन किया है कि जो लोग इंटरनेट से न भी जुड़ें हों, समाज के हाशिये पर पड़े हों, डिजिटल माध्यमों के बारे में कुछ न जानते हों, दूर-दराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों में रहते हों, आदिवासी समाज से जुड़े हों, वे भी आफलाइन इसका लाभ उठा सकें।

इसके लिए हम भौतिक और सामाजिक तंत्र का उपयोग करते हुए लोगों तक पहुंच बनाने का प्रयास करेंगे, जिसमें पंचायती राज संस्थाओं, लाखों आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा और नागरिकों को डिजिटल तकनीक में सक्षम बनाने का प्रयास होगा। इस तरह इस माध्यम से सही अर्थों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ का उद्देश्य भी पूरा होगा।

अंतिम और सबसे महत्त्वपूर्ण बात कि एनडीएचएम को इस क्षेत्र के सभी प्रमुख पणधारकों की सहभागिता के सिद्धांत पर तैयार किया गया है- डॉक्टरों, स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वालों, तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने वालों, और सभी नागरिकों की इसमें सहभागिता होगी। बिना इन सबके विश्वास, भरोसे और निगरानी के यह मिशन अपने लक्षित परिणाम तक नहीं पहुंच सकेगा।

एनडीएचएम का मकसद एक डिजिटल स्वास्थ्य राष्ट्र बनाने का है, जो ‘‘बड़ा सोचो, छोटे से शुरू करो और तेजी से आगे बढ़ो’’ के सिद्धांत पर आधारित है। यह एक ऐसा मिशन है, जिसका उपयुक्त समय आ गया है, क्योंकि आत्म-निर्भरता की तरफ बढ़ने के लिए स्वास्थ्य पहला कदम है। एक स्वस्थ देश ही आत्मनिर्भर बन सकता है।
(लेखक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हैं।)

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